‘Village Story’,ये है खेती की अनोखी पाठशाला

भारत की 50 फिसदी से ज्यादा अबादी खेती पर डीपेंडेंट है। लेकिन भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान लगभग 18 % के करीब है। भारत में किसानी एक घाटे का सौदा मानी जाती है यहीं कारण है कि यह सेक्टर अब धीरे—धीरे खाली होता जा रहा है। किसानों के बच्चे भी अब खेती नहीं करना चाहते, शहरों में रहनेवाले बच्चों की तो बात ही नहीं की जा सकती। लेकिन हम सब खेती से डायरेक्ट या इनडायरेक्ट जुड़े हुए हैं। ऐसे में एग्रीकल्चर को लेकर युवा पीढ़ी में घटते लगाव को बढ़ाने की जरूरत है, ताकी हमारी आनेवाली पीढ़ी इस बात से परिचित हो सके की उनकी थाली में जो खाना है वो किस—किस प्रोसेस से होकर उनतक पहुंची है।

शायद इसी एक सोच से प्रेरणा लेकर कर्नाटक की अनामिका बिष्ट ने एग्रीकल्चर को शहरी लोंगो से जोड़ने की शुरूआत की होगी और इसी इसी सोच से अस्तित्व में आई होगी ‘विलेज स्टोरी’ नाम की उनकी एक स्टार्टअप कंपनी। जो फुल्ली खेती अधारित स्टार्टअप है। सुनने में कितना अलग और शानदार लगता है न स्टार्टअप और वो भी जमीन से, किसानो से और खेती से जुड़ा हुआ। आमतौर पर हमने और आपने एग्रीकल्चर बेस्ट स्टार्टअप्स के बारे में बहुत कम ही सुना होगा। अनामिका बिष्ट का यह यूनिक और फुल्ली एग्रीकल्चर बेस्ड स्टार्टअप लगातार कामयाबियों की बुलंदियों को छू रहा है और साथ ही शहरी वयस्कों से लेकर शहर की नई पीढ़ी के बीच खेती करने, इसके प्रति सजगता और उनमें खेती के प्रति एक लगाव पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

क्या है ‘Village Story’ का आइडिया?

अनामिका बताती हैं कि हर किसी के अंदर खेती की एक चाहत होती है। एक चाहत होती है कि उनका भी एक फार्म हो जहां वो अपनी थाली की सब्जी खुद उगा सकें। बस इसी चाहत से यह आइडिया निकल के आया और विलेज स्टोरी की नीव पड़ी। अनामिका बताती हैं कि विलेज स्टोरी के ऑर्गेनिक स्क्वॉयर फुट के तहत हम शहरी लोंगो को मौका देते हैं कि वे कुछ समय के लिए खुद से ऑर्गेनिक खेती कर सकें। वहीं यहां हम शहरी बच्चों को भी खेती के हर एक प्रोसेस से अवगत कराते हैं। अनामिका बताती हैं कि उन्होंने पहले तो खुद के घर के लिए फल सब्जियां उगाने के लिए इसे शुरू किया लेकिन बाद में जब फसलें बढ़ने लगीं तो हमने इसे शेयर करते हुए कम्यूनिटी फार्मिग की ओर रूख किया। अनामिका की माने तो ‘विलेज स्टोरी’ का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को मदर अर्थ से जोेड़ना है।

विलेज स्टोरी के तहत चलाए जानेवाले स्क्वॉयर फुट फार्मिंग प्रोग्राम के तहत शहरी परिवारों को खुद से खेती करने के लिए आमंत्रित करती है। इसमें तीन महीने, 6 महीने, नौ महीने और 12 महीने के प्लान है। इनमें से किसी भी प्लान का सब्सक्रिप्सन आप अपने च्वाइस के हिसाब से ले सकते है। सब्सक्रिप्सन के बाद आपको इसके हिसाब से सीमित समय के लिए जमीन का प्लॉट दिया जाता है जिसपर आप अपने हिसाब से खेती कर सकते हैं। साथ में आपसे 2000 रुपये के अतिरिक्त चार्ज लिया जाता है जिसमें सीड, पानी, खाद और फसलों की सुरक्षा इन सबका ख्यााल कंपनी रखती है। आपके पास समय नहीं है तो आप ये चार्ज देकर अपने प्लॉट के ख्याल रखने की जिम्मेदारी कंपनी को दे सकते हैं।

इसके अलावा अनामिका अपने इस स्टार्टअप के फार्म पर स्कूली बच्चों को विजिट भी करवाती हैं। ताकी शहरी अबादी में रह रही देश की युवा पीढ़ी अपने बेस से जुड़ सके और इसके बारे में जान सके। इस दौरान बच्चों को खेती से जुड़े हर एक के पहलुओं की जानकारी जैसे बीज लगाना, खाद डालना, पानी देना इत्यादी से परिचित करवाया जाता है। वहीं वे अपने साथ जुड़े सीखने और सिखानेवाले लोंगो संग मिलकर साल में कई सारी खेती से जुड़ी हुई वकशॉप भी ऑर्गेनाइज करवाती हैं। उनके फार्म टू टेबल नाम के वर्कशॉप में इस बात की जानकारी दी जाती है कि जो भी हम उगा रहे हैं उसका किस—किस प्रकार से उपयोग किया जा सकता है। वहीं अनामिका का एक किसान समूह भी है जिसमें 200 से ज्यादा किसान जुड़े हैं और अनामिका इनके लिए एक फार्मर बाज़ार का आयोजन भी करती हैं।

Village Story- अनामिका के इस प्रयास से सीखा जा सकता है बहुत कुछ

वाकई में अनामिका बिष्ठ का यह एग्रिकल्चर स्टार्टअप अपने आप में बेहद खास है। जहां एक ही जगह पर खेती से जुड़ी हर एक प्रकार की जानकारी लोंगो को मिलती तो है कि साथ ही शहरी लोंगो के बीच भी खेती के प्रति एक भाव पनपता है कि खेती हमसे अलग नहीं है, यह हमसे जुड़ी हुई है। वहीं उनका यह स्टार्टअप शहर में बसे कई ऐसे लोंगो की ख्वाहिशों को पूरा करने का मौका दे रही है जो खेती करने की और अपनी थाली में अपने हाथ की उगाई सब्जी या खाना देखना चाहते हैं। साथ ही आनेवाली पीढ़ी को भी नेचर और मदर अर्थ के साथ—साथ किसानी और किसान दोंनो से भी जुड़ने का मौका दे रही है ताकि आने वाले वक्त में भारत की नई पीढ़ी खेती से भागने के बजाए इसमें भी कुछ सार्थक प्रयास और सुधार करने के प्रति सजग हो सके।

अपनी स्टार्टअप की तरह ही अनामिका बिष्ट भी खुद में एक प्रेरणास्त्रोत हैं। कॉपरेट की जॉब छोड़ खेती का काम करनेवाली अनामिका कई किसानों के लिए एक प्रेरणा हैं जो अपनी खेती से एक अलग प्रकार का भविष्य चाहते हैं। उन सभी लोंगो के लिए अनामिका एक इंस्प्रेशन हैं जिनके पास खेत तो है लेकिन वे खेती नहीं करना चाहते। बता दें कि अनामिका ने सिर्फ एक एकड़ में अपने नायाब आइडिया से खेती को एक अलग अंदाज और रुप दिया है। वहीं अब वो इसे कर्नाटक से बाहर देश के दूसरे हिस्से में भी फैलाने की सोच रही हैं। ऐसे में जिनके पास बीघे पर बीघे जमीन है लेकिन आज खेती करना नहीं चाहते वैसे देश के युवा अनामिका से प्रेरणा लेकर नौकरी के लिए भटकने के बजाए अपनी माटी से ही अपनी विकास की गाथा लिख सकते हैं। 

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