UN में क्लाइमेट चेंज पर भारत की आवाज बनी रिधिमा पांडे

हाल ही में यूनाइटेड नेशन यानि यूएन का ग्लोबल समिट हुआ। इस समिट की सबसे खास बात रही बच्चों के द्वारा दुनिया के लीडरों से सीधे तौर पर क्लाइमेट चेंज को लेकर पूछा गया सवाल। इस बार के समिट की चर्चा जोरों पर रही। ऐसा शायद पहली बार था कि यूएन की समिट को आम दर्शन मिले हो। ये सब मुमकिन हुआ 15 बच्चों के कारण, जिन्होंने दुनिया के इस सबसे बड़े मंच पर दुनिया के तमाम बड़े लीडरों की आंखों में आंखे डालकर पर्यावरण को लेकर उनके रवैये पर तीखे सवाल किए। इन बच्चों में आकर्षण का केन्द्र रहीं 16 साल की स्वीडिश पर्यावरण एक्टिविस्ट, ग्रेटा थनबर्ग। उनका यूएन में दिया गया स्पीच भी काफी सुना गया और इस दौरान उनका गुस्सा भी चर्चा का विषय बना। लेकिन वातावरण को लेकर दुनिया के लीडरों से लड़ने वाले बच्चों में ग्रेटा थनबर्ग के अलावा और कई देशों के बच्चे भी थे। इन्हीं में से एक हैं रिधिमा पांडे, जो भारत की हैं।

भारत की रिधिमा दुनियाभर के उन 15 बच्चों में से एक हैं जिन्होंने दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले देशों, जिनमें अर्जेटीना, जर्मनी, तुर्की, फ्रांस और ब्राजील आते हैं, उनके खिलाफ पेटिशन फाइल किया था। रिधिमा अभी सिर्फ 11 साल की हैं।

यूएन में अपना परिचय देते हुए रिधिमा ने कहा – नमस्ते, मैं यहां हूं क्योंकि मैं चाहती हूं कि विश्व के लीडर क्लाइमेट चेंज को रोकने के लिए कुछ करें। अगर यह नहीं रुका तो यह हमारे भविष्य को हानि पहुंचाएगा।”

Ridhima Pandey-  सिर्फ 9 साल की उम्र में फाइल किया था पहला पेटिशन

यूएन में रिधिमा का चेहरा जैसे ही सामने आया भारतीय मीडिया में उनकी चर्चा जोरों से होने लगी। बता दें कि, यूएन के मंच पर भले ही पहली बार रिधिमा का चेहरा दिखा हो, लेकिन भारत में रिधिमा कई सालों से पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज को लेकर आवाज बुलंद करती रही हैं। जब वे 9 साल की थीं तभी उन्होंने पर्यावरण को लेकर अपना पहला पेटिशन दायर किया था। वहीं साल 2017 में रिधिमा ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सबमिट को एक पेटिशन दिया था, जिसमें उन्होंने कोर्ट से अपील करते हुए कहा था कि भारत सरकार को क्लाइमेट चेंज रोकने और इसके प्रभाव को कम करने के लिए प्रभावी और विज्ञान आधारित हल निकालने चाहिए। रिधिमा ने अपने इस पेटिशन में कार्बन बजट बनाना और नेशनल क्लाइमेट रिकवरी प्लान भी करने की अपील सरकार से की थी।

अपने इस पेटिशन को लेकर रिधिमा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर सरकार क्लाइमेट चेंज और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को रोक नहीं सकती तो यह भविष्य के लिए बड़ा खतरा होगा। रिधिमा मानती हैं कि हमारे देष में पारंपरिक इंधन के बजाए जैविक इंधन का प्रयोग करने की क्षमता है लेकिन वो किया नहीं जा रहा।

Ridhima Pandey

Ridhima Pandey-  बेटी के साथ-साथ पिता भी हैं, क्लाइमेट एक्टिविस्ट

आमतौर पर हमने सुना होगा कि किसी को साहित्य का ज्ञान, या नौकरी पेशा, या कोई टैलेंट उन्हें विरासत में मिली है। यानि उनके पिता या पुरखों से मिली होती है। रिधिमा के साथ भी कुछ ऐसा ही है। रिधिमा आज अगर इतनी कम उम्र में क्लाइमेंट के प्रति इतनी सजग हैं और चिंता करती हैं तो इसका श्रेय उनके पिता को भी जाता है। रिधिमा को ये काम विरासत में मिला है।

दरअसल उनके पिता दिनेश पांडे खुद एक क्लाइमेट एक्टिविस्ट है। रिधिमा के पिता पिछले दो दशकों से पर्यावरण के अधिकारों को लेकर अभियान चला रहे हैं। एक इंटरव्यू में दिनेश ने कहा था कि वे हमेशा अपनी बेटी रिधिमा को पर्यावरण के मुद्दों के बारे में बताते रहे हैं और चाहते थे कि वो भी पर्यावरण को लेकर कुछ करे।

रिधिमा को एक संस्कार मिला है जो उसके पिता ने दिया है। आज वे उसी संस्कार की बदौलत देश सहित पूरी दुनिया में क्लाइमेट चेंज को लेकर लोगों को जागरूक कर रहीं हैं। चिल्ड्रेन वर्सेस क्लाइमेट क्राइसिस नाम की एक वेबसाइट पर रिधिमा के बायो पर अगर गौर करे तो क्लाइमेट को लेकर उनकी सिरियसनेस का हमे पता चलता है।

वे लिखती हैं – “मुझे एक अच्छा भविष्य चाहिए। मैं अपने भविष्य को बचाना चाहती हूँ। मैं हमारे भविष्य को बचाना चाहती हूँ। मैं आने वाली सभी पीढ़ियों के बच्चों और लोगों के भविष्य को बचाना चाहती हूँ।”

रिधिमा पांडे ने जो बाते अपने बायो में कही हैं, उससे उनका इशारा साफ है कि देश और दुनिया क्लाइमेट चेंज के खतरे के बीच फंसी हुई है, और अगर आज इस खतरे से नहीं निपटा गया तो आने वाले हमारे बच्चे और उनकी आनेवाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में होगा। यह बात गौर करने वाली है कि, रिधिमा जैसे बच्चे आज इस देश और दुनिया के भविष्य के लिए, पर्यावरण के लिए चिंता कर रहे हैं, लेकिन यह सिख भी है और हमे अपने अंदर एक बार झांकने और सोचने पर मजबूर करती है कि जब बच्चे इस बारे में इतना सोच रहे हैं तो हम लोग जिनकी जिम्मेदारी इन बच्चों के भविष्य को सवारने की है, क्यों इस मामले को इतना लाइटली ले रहे है। रिधिमा जैसे बच्चे हमे यह एहसास करा रहे हैं कि क्लाइमेट चेंज हमारी धरती और हमारी पूरी इंसानों की नस्ल के लिए सबसे बड़ा थ्रेट है।

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