उडुपी रामचंद्र राव, भारत के पहले सैटेलाइट को लॉन्च करने वाले महान वैज्ञानिक

10 मार्च एक ऐसा दिन जिस दिन अगर इतिहास के पन्ने या फिर बीते सालों के पन्ने पलटे तो हमें मालूम चलता है कि, हमारे यहां इसी दिन साल 1932 में कर्नाटक के अदामरु गाँव में एक ऐसे इंसान का जन्म हुआ था. जिसने पूरी दुनिया के सैटेलाइट की प्रक्रिया को बदलकर रख दिया. जिनका नाम है उडुपी रामचंद्र राव, एक ऐसा इंसान जिसे आज पूरी दुनिया “भारत के सैटेलाइट मैन” के नाम से जानती है.

उडुपी रामचंद्र राव ने अपने करियर की शुरुआत कॉस्मिक-रे भौतिकशास्त्री और डॉ. विक्रम साराभाई के संरक्षक के तौर पर की थी. ये सभी वैज्ञानिक उस समय भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक माने जाते थे. इस दौरान अपनी डॉक्टरेट की डिग्री भारत में पूरी करके उडुपी रामचंद्र राव अमेरिका चले गए. जहाँ उन्होंने एक प्रोफेसर के तौर पर काम करना शुरू किया. इस बीच उन्होंने नासा (NASA) के पायनियर और एक्सप्लोरर स्पेस प्रोब पर प्रयोग किए.

इसके बाद 1966 में रामचंद्र राव वापस भारत लौटे आए. इस दौरान उन्होंने भारत की प्रमुख संस्था फिजिकल लेबोरेटरी में एक व्यापक उच्च-ऊर्जा खगोल विज्ञान की शुरुआत की. साथ ही 1972 आते-आते उन्होंने देश के उपग्रह कार्यक्रम की अगुवाई करने की शुरुआत कर दी.

भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ में उडुपी रामचंद्र राव ने निभाई अहम भूमिका

देश का शायद हर इंसान जानता है कि, भारत ने अपना पहला उपग्रह आर्यभट्ट किन हालातों में अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया था. साल 1975 में इस उपग्रह आर्यभट्ट को संचार, सुदूर संवेदन व मौसम विज्ञान की सेवाएं उपलब्ध कराने की खातिर लांच किया गया था. जिसके पार्ट बैलगाड़ी से लेकर साइकिल पर लाए गए थे. ऐसे में उडुपी रामचंद्र राव ने इस प्रक्रिया में अपना अहम योगदान दिया था.

इसके बाद उडुपी रामचंद्र राव ने 1984 से लेकर 1994 तक अनेकों ऐसे प्रयोग किए, इस दौरान उन्होंने भारत की सबसे उच्च संस्था ‘इसरो’ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में अध्यक्ष के तौर पर काम किया. अपने अध्यक्ष पद पर रहने के दौरान उन्होंने राष्ट्र के अंतरिक्ष कार्यक्रम में तेजी से प्रसार किया.

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यही वजह रही कि, साल 2013 में उन्हें ‘सैटेलाइट हॉल ऑफ फेम’ में शामिल किया गया. इस फेम में शामिल होने वाले उडुपी रामचंद्र राव भारत के पहले भारतीय बने. इसी साल PSLV ने भारत का पहला इंटरप्लेनेटरी मिशन- “मंगलयान-ए” उपग्रह लांच किया था. जोकि आज भी काम कर रहा है.

इन सबके अलावा उन्होंने साल 1999 में भू-स्थिर प्रमोचन यान G.S.L.V के विकास एवं निम्नतापीतय (क्रायोजेनिक) प्रौद्योगिकी के विकास की भी शुरूआत की. उडुपी रामचंद्र राव ने अंतरिक्ष अनुप्रयोग, उच्च ऊर्जा खगोलिकी, कॉस्मिक किरणें व अंतरग्रहीय भौतिकी, रॉकेट प्रौद्यगिकी के विषयों पर 350 से ज्यादा वैज्ञानिक लेख प्रकाशित किए साथ ही कई अन्य किताबें भी लिखी.

यही वजह रही कि, इनके कामों को देखते हुए इन्हें दुनिया भर में 21 से ज्यादा विश्वविद्यालयों से डी.एस.सी (मानद डॉक्टरेट) से सम्मानित किया गया. जिसमें यूरोप का सबसे पुराना विश्वविद्यालय, बोलोगना विश्वविद्यालय भी शामिल है.

गूगल ने बनाया उडुपी रामचंद्र राव का डूडल

24 जुलाई 2017 को दुनिया को अलविदा कहने वाले भारतीय प्रोफेसर और वैज्ञानिक प्रोफेसर उडुपी रामचंद्र राव का आज 89वां जन्मदिन है. “भारत के सैटेलाइन मैन” के तौर पर दुनिया भर में पहचान बनाने वाले उडुपी रामचंद्र राव के जन्मदिन पर उन्हें याद करने की खातिर गूगल ने डूडल बनाया है.

प्रोफेसर उडुपी रामचंद्र राव के इन्हीं खास कामों के देखते हुए साल 1976 में जहाँ उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था. वहीं 2017 में इन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. 

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