कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों की मदद में जुटे हैं दो जिगरी दोस्त

दुनिया सहित भारत में भी कोरोना का तांडव जारी है। एक अदने से वायरस के कारण पूरी दुनिया लॉकडॉउन में है। लेकिन इस कोरोना के कारण उन लोगों की जिंदगी पर दोहरा असर पड़ा है जिनकी जिंदगी रोज कमाने और खाने पर गुजरती है। प्रवासी मजदूर जो देश के गांवो से निकल कर बड़े शहरों में रोजगार की तलाश में पहुंचे थे, आज शहर छोड़ अपनी जड़ों तक पैदल ही जाने को मजबूर हैं। सरकार अपनी ओर से कोशिश तो कर रही है लेकिन वो नाकाफी है। ऐसे में देश भर में कई जगहों पर युवाओं ने इन लोगों की मदद के लिए अपने हाथ बढ़ाए हैं। ऐसे ही युवाओं में से एक है राहुल शर्मा और उनके बचपन के दोस्त अंशुमन अमरेश की जोड़ी।

राहुल और अंशुमन की जोड़ी लॉकडाउन के शुरूवात से ही समाज के निचले तबके के लोगों की मदद में लगे हुए हैं। ये दोनों साथ मिलकर प्रन्यास डेवलपमेंट फाउंडेशन नाम का एक एनजीओ चलाते हैं। इसी एनजीओ और अपने वॉलंटियर्स की मदद से दोनों दोस्त इस मुश्किल घड़ी में जरूरत मंद लोगों की हर संभव मदद कर रहे हैं। राहुल और अंशुमन की संस्था ने अभी तक कोरोना काल में दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों में  30,000 से अधिक लोगो को भोजन कराया है। यही नहीं, खाना खिलाने के साथ ही दोनों वो हर मुमकिन चीज कर रहे हैं, जिससे प्रवासी लोगों की मदद हो सके।

Lockdown के पहले ही कर ली थी प्लानिंग

Pranyas Development Foundation

कोविड-19 के खिलाफ प्रन्यास डेवलपमेंट फाउंडेशन के संस्थापक राहुल शर्मा और अंशुमन अमरेश ने भारत में पनपने वाली स्थिति का आकलन अंतर्राष्ट्रीय  मामलों को देखते हुए पहले ही कर लिया था। ऐसे में प्रन्यास ने कोरोना के भारत पहुंचने से पहले ही अपनी प्राथमिकताओं के लिए रणनीति बना ली थी।  प्रन्यास  के  वालंटियर्स ने तय रणनीति पर काम करते हुए, दिल्ली की बस्तियों  और  ग्रामीण इलाकों  में कोरोना वायरस के शुरुआती दिनों से प्रवासी मजदूरों की बेहतरी के लिए काम करना शुरू कर दिया ताकि हालात खराब होने पर प्रवासी मजदूरों को एक सुरक्षित माहौल दिया जा सके। इसी प्लान पर फाउंडेशन ने मुंबई समेत महाराष्ट्र, तमिलनाडु के अपने वॉलंटियर्स के संग मिल कर लोगों की सुरक्षा और उनके अन्य जरूरतों की उपलब्धता को सुनिश्चित किया।

इस बारे में राहुल कहते हैं कि जिस समय लॉकडाउन शुरु हुआ उस समय भारत के अधिकांश मध्यम और उच्च वर्ग (जो दैनिक मजदूरों का सबसे अधिक उपभोग करते हैं) वो अपने घरो में बैठ गए थे। जिसका असर इन लोगों पर डिपेंड रहने वाले प्रवासी मजदूरों पर पड़ा। प्रन्यास डेवलपमेंट फाउंडेशन ऐसे समय में अपने घर से निकलकर इन लोगों की मदद के लिए आगे आया।

इसके आगे राहुल कहते हैं कि अपने घरों की ओर पैदल जाते मजदूरों को खाना मिल सके इसके लिए हमने उनके रास्तों में कई सारी अस्थायी रसोई घर बनाए हैं, इन्हीं अस्थाई रसोई घरों से हम रोज प्रवासी लोगों को खाना खिला रहे हैं।

Pranyas Development Foundation

राहुल बताते हैं कि इस दौर में काम करना बड़ा मुश्किल है, क्योंकि लोगों कि मदद करने के साथ ही खुद का और उनका भी ख्याल रखना है, ताकि दोनों में से कोई संक्रमित ना हो। ऐसे में हमने अपने वॉलंटियर्स को कई प्रेनादायक विडियोज दिखाए ताकि वे इस काम में अपना जोर लगा सकें।

अंशुमान अमरेश,  बताते हैं , “कोविड -19 के हाशिए पर खड़े और गरीब लोगों के लिए एक दोहरी आपदा बनकर आया है। गरीबी जो खुद हमारे समाज की एक बड़ी समस्या है उसके संग अब कोरोनोवायरस का खतरा आ गया है। जिसने गरीब के जीवित रहने तक पर सवाल खड़ा कर दिया है। ऐसे में जरूरत है कि समाज के  कमजोर वर्ग की मदद के लिए हम सभी अपना हाथ उनकी मदद के लिए आगे बढ़ाएं।”

कोरोना के कारण आज देश का निचला तबका दोहरी मार झेल रहा है। सरकार के तमाम आश्वासनों के बाद भी इनकी स्थिति में सुधार कम ही दिख रहा है। ऐसे में राहुल और अंशुमन जैसे नौजवान अपने देश के इस समाज की मदद को आगे आए है। राहुल और अंशुमन की संस्था भारतीयता के विचार से प्रेरित उद्देश्य की पूर्ति में लगी है। इसी भारतीयता के दम पर तो भारत का वजूद है। इन दोनों युवाओं के इस प्रयास को दी इंडियननैस का सलाम….

Pranyas Development Foundation के बारे में

Pranyas Development Foundation

प्रन्यास डेवलपमेंट फाउंडेशन एक स्वयं सेवी संस्था है, जिसकी शुरूवात राहुल शर्मा और अंशुमन अमरेश ने एक साथ मिलकर 2018 में बमुश्किल कुछ स्वयं सेवकों के संग की थी। आज इस एनजीओ के संग देश भर में 1200 से ज्यादा स्वयंसेवी जुड़े हुए हैं।  

प्रन्यास फाउंडेशन मुख्य रूप से शहरी स्लम बस्तियों के बच्चों, युवाओं और महिलाओं के उत्थान के लिए काम करता है। ये संस्था दिल्ली सहित मुंबई जैसे शहरों के स्लम एरिये में रह रहे छोटे बच्चों की शिक्षा और उनके खान पान का काम देखती है। साथ ही यहां के युवाओं में लीगल एवरेनेस के लिए अपने कैंप का आयोजन करती है।

ये संस्था महिला सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान के लिए जागरूकता कार्यकर्मों का आयोजन भी जोर- शोर से इन इलाकों में करती है। कुल मिलाकर कहे तो प्रन्यास फाउंडेशन देश के तमाम पिछले और निचले तबके के लोगों के उत्थान के लिए अथक प्रयास कर रही है। जिसके चलते न जानें कितने ही लोगों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है।

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