पुराने कपड़े लाएं, नए कपड़े ले जाएं- Twirl.Store

अगर कोई आपसे कहे पुराने कपड़े लेकर आईऐ और गिफ्ट लेकर जाइए तो आपको कैसा लेगगा. अच्छा बताइए आप अपने पुराने कपड़ों का क्या करते हैं…? मैं बताता हूं या तो आप उन्हें अपनी आलमारी के किसी कोने में फेंक रख देते होंगे या फिर उनका गट्ठर बनाकर रख देते होंगे.

लेकिन अगर मैं कहूं की आप उन्हीं कपड़े से गिफ्ट, रिवार्ड सिस्टम या पॉइंट्स पा सकते हैं. जिसका इस्तेमाल आप सामान खरीदने में कर सकते हैं तो आपको कैसा लगेगा.

जी हां, कुछ ऐसा ही कर रही हैं कोलकाता की रहने वाली सुजाता चटर्जी…

जोकि Twirl.Store चल रही हैं.  जिसका उद्देशय है कपड़े की होने वाली बर्बादी को रोकने के साथ साथ आर्थिक रुप से कमजोर और पिछड़े लोगों की कपड़ों की जरूरतों को पूरा करना.

Twirl.Store में पुराने कपड़ों का होता है मुफ्त में पिकअप-सुजाता चटर्जी

सुजाता चटर्जी ने इस Twirl.Store की शुरुआत आज से 2 साल पहले की थी लेकिन आज सुजाता के पास टीम है और अपने इस शुरुवात के बारें में सुजाता कहती हैं कि, “ट्विर्स का मतलब होता है घूमना या फिर चक्कर लगाना. यानि की चीजों को लगातार इस्तेमाल के योग्य बनाना ताकि उन चीजों का बेहतर से बेहतर इस्तेमाल हो सके.”

अब हम आपको बताते हैं की सुजाता की Twirl.Store काम कैसे करती है. दरअसल सुजाता की टीम लोगों से कपड़े इकट्ठा करती है जिसके लिए सुजाता देशभर में पुराने कपड़ों के मुफ्त पिकअप की सुविधा देती हैं उसके बाद पुराने या इस्तेमाल हुए कपड़े इकट्ठा करने के बाद सुजाता की टीम इन कपड़ों को पुन: इस्तेमाल करने योग्य बनाती है उसे धुलती है और फिर नए डिज़ाइनर उत्पाद जैसी चीजें जैसे ऐक्ससरीज बैग बनाती है और जिन कपड़ों को अपसाइकल नहीं किया जा सकता उन कपड़ों को गैर-सरकारी संगठनों की मदद से कैंम्पों में दान कर देती हैं या तो फिर उन जरुरतमंदों को वो कपड़े दे दिए जाते हैं जिन्हें इनकी जरूरत होती है.

इसके लिए सुजाता की टीम कपड़े देने वाले लोगों को गिफ्ट या रिवार्ड सिस्टम के साथ साथ रिवार्ड पॉइंट्स देती है. उन पॉइंट्स का इस्तेमाल लोग सुजाता की वेबसाइट से अपसाइकल हुए प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए कर सकते हैं.

इन सबके अलावा सुजाता बताती हैं कि, “अब तक ट्विर्ल की टीम ने 10,000 से ज्यादा अपसाइकल्ड प्रोडक्ट्स की सप्लाई की है. इसके अलावा सुजाता कोलकाता की बस्तियों समेत शांतिनिकेतन और सुंदरवन इत्यादि के गांवों में डोनेशन ड्राइव्स आयोजित कराती है. जिससे लोगों में इन सभी चीजों को लेकर जागरुकता जगाई जा सके.

ट्विर्ल की शुरूआत में नहीं मिला था कोई साथ-सुजाता

इन सबके अलावा समाज के लिए कुछ सकारात्मक करने की अपनी इस मुहिम के अंतर्गत सुजाता कोलकाता और आस-पास की महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी काम कर रही हैं. इन क्षेत्रों की महिलाएं सुजाता की टीम का हिस्सा हैं और रोज़गार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं. बात चाहे कपड़ों को अपसाइकल करने की हो या फिर नए उत्पाद बनाने की, सभी जिम्मेदारियों को मुख्य रूप से गांवों की महिलाओं को ही इसकी जिम्मेदारी दी जाती है.

आईटी कंपनी से करिअर की शुरुवात करने वाली सुजाता चटर्जी का जन्म कोलकाता में हुआ है. सुजाता कहती हैं कि, “ट्विर्ल की शुरुआत से पहले उनके आस-पास के लोगों ने उन्हें बिल्कुल बढ़ावा नहीं दिया और न ही उनके आइडिया पर भरोसा जताया. लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी बल्कि अपना इरादा मजबूत किया और ट्विर्ल की शुरुआत की.

इसके साथ सुजाता बताती हैं कि, “ट्विर्ल की शुरुआत बूटस्ट्रैप्ड फंडिंग से हुई थी और कंपनी के पास फंड सीमित था. ऐसे में अभी तक कंपनी पूरी तरह से ऑर्गेनिक ग्रोथ के साथ ही आगे बढ़ रही है. इस काम में आज मेरी टीम मेरा पूरा सहयोग करती है. जिसके चलते Twirl.Store यहां तक पहुंच पाई है.”

जाहिर है, मेहनत और लगन के साथ आज अपने ऊपर भरोसा होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. क्योंकि अगर खुद पर भरोसा नहीं रहता तो कोई भी मुकाम हासिल करना किसी भी इंसान के लिए आसान नहीं होता

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