20 हज़ार से ज्यादा पेड़ लगाने वाले वृक्ष मित्र जितेंद्र प्रसाद

रास्ते से गुजरते किसी बोर्ड पर, किसी होर्डिंग पर, किताबों पर या फिर पेड़ पौधों के सुरक्षा कवच पर हम हमेशा से पढ़ते हैं कि, वन नहीं तो जन नहीं, वृक्ष लगाओ जीवन बचाओ….और पढ़कर इन्हें नज़रअंदाज कर देते हैं. जिसकी महज़ एक वजह है कि हमें पढ़कर भूलने की आदत है. हालांकि कुशीनगर के नेबुआ नौरागिया तहसील के एक छोटे से गाँव मठिया धीर के रहने वाले जितेंद्र प्रसाद गोपाल हम सभी से अलग हैं. बचपन में अपने अध्यापक गणपति गुप्ता के पढ़ाए पाठ को जितेंद्र ने इस तरह पढ़ा कि आज जितेंद्र अपने साथ-साथ अपने पूरे इलाके में सभी की प्ररेणा बन गए हैं और वजह है पर्यावरण के प्रति उनका स्नेह…

बचपन के स्कूली शिक्षा के बारे में जितेंद्र प्रसाद बताते हैं कि, “हमारे अध्यापक स्वर्गीय गणपति गुप्ता जी ने एक बार कक्षा में पढ़ाते वक्त कटने जंगलों, पेड़-पौधों पर चिंता ज़ाहिर की थी. ये बात तब से मेरे ज़हन में बस गई और मैं उसी वक्त प्रेरणा ले ली कि, मैं अपनी जिंदगी में मरते दम तक पेड़ लगाऊंगा.”

महज़ दसवीं पास जितेंद्र प्रसाद ने साल 1985 से ही पर्यावरण को बचाने का बेड़ा उठा लिया और तब से लेकर अब तक जितेंद्र पेड़ पौधे लगा रहे हैं. जितेंद्र अपने इस सफर के बारे में बताते हैं कि, “एक समय था जब मैं अकेला अपने इलाके में पेड़-पौधे लगाया करता था. कहीं भी अन्यथा जगह पर पड़े पेड़-पौधे का रेस्क्यू किया करता था. हालांकि मेरे काम से प्रेरित होकर मेरे साथ काफी लोग जुड़ते चले गए आज हम सभी मिलकर पेड़-पौधे लगाते हैं. लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हैं ताकि हम अपनी प्रकृति की सुंदरता को बचा सकें.”

पेड़-पौधों की देखभाल के लिए बनाई नर्सरी-

आज पेड़-पौधों की देखभाल के लिए उन्हें पालने पोसने के लिए जहां जितेंद्र प्रसाद ने अपने यहां एक नर्सरी तैयार की है. जहां वो रेस्क्यू करके लाए पेड़-पौधों की देखभाल करते हैं. साथ ही पीपल, बरगद, नीम, पाकड़, बेल, जामुन, अशोक और तुलसी जैसे पेड़-पौधों की उगाते हैं. फिर उन्हें निशुल्क लोगों की शादियों से लेकर अन्य त्योहारों और अपने समाज में बांटते हैं. ताकि दिनों दिन बढ़ते प्रदूषण को रोकने के साथ-साथ पृथ्वी को फिर से हरा भरा बनाया जा सके.

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पौधे तैयार करने का संसाधन-

जितेंद्र प्रसाद बताते हैं कि, “अक्सर शादियों में लोग प्लास्टिक के ग्लास का इस्तेमाल करते हैं और फिर उन्हें फेंक देते हैं. हम सभी उन गिलासों को उठाकर लाते हैं और उनमें तुलसी और छोटे मोटे पौधे उगाते हैं. इसके अलावा हम आंगन बाडी केंद्र से दलिया की खाली पैकेट इकट्ठा करते हैं. उनमें पेड़-पौधे तैयार करते हैं. जबकि हमारे आस-पास किसी भी गांव मोहल्ले में अगर किसी के यहां छत लगती है तो हम उनके यहाँ से सीमेंट का कट्टा ले आते हैं. जिसमें हम बरगद, पीपल, नीम, पाकड़ जैसे पेड़ तैयार करते हैं. फिर उन्हें बेहतर जगहों पर लगाते हैं.”

अपनी मेहनत के चलते आज तक जितेंद्र प्रसाद गोपाल 18945 से ज्यादा पेड़ तैयार कर चुके हैं. जितेंद्र प्रसाद कहते हैं कि, “1985 से शुरू हुआ सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा. जिसमें हमेशा से मेरी पत्नी और मेरे बच्चों में मेरा सहयोग किया है. हमारी कोशिश रहती है हमारी धरा पर वृक्ष विहीन जमीन न रह जाए. अगर ऐसा हुआ तो निश्चित ही दुनिया बेहतर हो सकती है.”

जितेंद्र प्रसाद गोपाल की इन्हीं मेहनत और लगन के चलते जहाँ जितेंद्र जी आज अपने पूरे इलाके में अलग पहचान बन चुके हैं. वहीं कुशीनगर के 45 ग्राम प्रधान इन्हें वृक्ष मित्र जैसी उपाधि से सम्मानित कर चुके हैं.

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