ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर 1400 किलोमीटर का सफर तय कर, एक दोस्त ने बचाई दूसरे की जिंदगी

कोरोना वायरस की भयावहता ने जहां आज पूरे देश की व्यवस्थाओं को तोड़ कर रख दिया है. साथ ही हेल्थ सेक्टर पूरी तरफ बर्बाद होने को है. उसके बावजूद डाक्टर, नर्स, कोरोना फ्रंट वर्कर दिन रात काम कर रहे हैं. देश में हर रोज तीन लाख से अधिक कोरोना मरीज सामने आ रहे हैं. जिसमें अनेकों मरीज हर रोज अपनी जिंदगी की जंग हार है. अनेकों लोग एक दूसरे की जान बचाने की खातिर दिन-रात मेहनत कर मिसाल बन रहे हैं.

इसके उलट ऐसे भी अनेकों लोग हैं. इस मुश्किल वक्त में अपनों का साथ भी छोड़ रहे हैं. हालांकि बीते रोज जो तस्वीर इस भयावहता में सामने आई. उसने अनेकों दिल को पसीज कर रख दिया. जिसमें एक दोस्त ने अपने दोस्त की जान बचाने की खातिर 1400 किलोमीटर का सफर तय कर, ऑक्सीजन पहुंचाई. बीते रोज हनुमान जंयती थी. हर ओर लोग सोशल मीडिया पर कष्ट निवारक हनुमान की तस्वीर शेयर कर रहे थे. हालांकि बोकारो के रहने वाले एक शिक्षक देवेंद्र कुमार शर्मा ने एक ऐसी मिसास पेश कि, की हर ओर उनकी बातें होने लगी.

ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ, 1400 किलोमीटर का सफर

दरअसल देवेंद्र कुमार के दोस्त रंजन गाजियाबाद में रहते हैं. जोकि नोएडा में किसी आईटी कंपनी के लिए काम करते हैं. ऐसे में कोरोना काल में कुछ समय पहले देवेंद्र और रंजन के एक कॉमन फ्रेंड का कोविड की वजह से देहांत हो गया. इस बीच रंजन को भी कोविड से संक्रमित हो गए. इस बीच रंजन का ऑक्सीजन स्तर नीचे जाने लगा. डॉक्टरों ने उन्हें ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की बात कही. हालांकि तमाम प्रयासों के बावजूद भी कहीं ऑक्सीजन का जुगाड़ नहीं हो सका.

24 अप्रैल को रंजन के परिचित ने उनके दोस्त देवेंद्र कुमार को फोन किया और स्थिति के बारे में जानकारी दी. ऐसे में कुछ समय पहले अपने एक दोस्त को खो चुके, देवेंद्र के सामने दुविधा खड़ी हो गई. क्योंकि वो अपने दूसरे दोस्त को खोना नहीं चाहते थे. यही वजह थी कि, उन्होंने बोकारो से 150 किलोमीटर का सफर तय कर रांची पहुंचे. वहां पहुंचने के बाद उन्होंने अपने दोस्त की खातिर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करनी शुरू कर दी.

इस दौरान देवेंद्र ने अनेकों ऑक्सीजन प्लांट और सप्लायर से बात की. लेकिन कहीं भी ऑक्सीजन नहीं मिल सकी. हालांकि देवेंद्र कुमार लगातार कोशिश करते रहे. ऐसे में एक और मित्र ने उन्हें जानकारी दी की बियाडा स्थित झारखंड इस्पात ऑक्सीजन प्लांट में उन्हें ऑक्सीजन मिल सकता है. देवेंद्र वहां पहुंचे और संचालक से बात की.

देवेंद्र की बातों को सुनने के बादे, संचालक ने ऑक्सीजन सिलेंडर देने को तो कह दिया. हालांकि उन्होंने कहा कि, आपको सिक्योरिटी मनी जमा करनी पड़ेगी. जंबो सिलेंडर के लिए देवेंद्र ने फिर 10 हजार रुपये सिक्योरिटी के तौर पर जमा किए. जबकि ऑक्सीजन की कीमत महज 400 रुपये थी. और 9600 रुपये सिलेंडर की सिक्योरिटी थी.

ऑक्सीजन मिलने के बाद देवेंद्र ने बिना वक्त गंवाए, रविवार को कार से नोएडा के लिए निकले की योजना बनाई और महज़ 24 घंटे के अंदर ही रांची से नोएडा पहुंच गए. देवेंद्र ने बताया कि, इस दौरान उन्हें कई बार पुलिस बॉर्डर पर रोककर पूछताछ की गई. हालांकि वक्त ज्यादा नहीं था. इसलिए मैं सबको असल मामला समझाकर निकल आया.

अपने दोस्त को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ देख रंजन की आंखें भर गई, रंजन ने कहा कि, ऐसे दोस्त के होते भला कोरोना मेरा क्या बिगाड़ सकता है. जबकि रंजन के परिचितों की मानें तो, इस मुश्किल वक्त में ऑक्सीजन लेकर आने वाले देवेंद्र किसी भगवान से कम नहीं. ऐसा दोस्त भगवान सबको दें.

जाहिर है, इस मुश्किल घड़ी में देवेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी दोस्त की खातिर जो किया. वो किसी मिसाल से कम नहीं. साथ ये बताने को भी काफी है कि, एक दोस्त वास्वत में क्या कुछ कर सकता है. आज देश में कोरोना वायरस की जो स्थिति है. उसमें इसी तरह के किस्से हर ओर लोगों को मनोबल बढ़ाने को काफी हैं.

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