भारत के वो मंदिर.. जहां पुरूषों के प्रवेश पर है सख्त मनाही

भारत एक ऐसा देश हैं जहां आप अगर चार कदम चलेंगे तो आपको एक मंदिर जरूर देखने को मिलेगा वहीं चार कदम आगे बढ़ेंगे तो आपकी नजरें किसी मस्जिद, गुरूद्वारा या चर्च से भी टकरा जाएंगी। भारत को एक धार्मिक देश के तौर पर भी जाना जाता है, जिसके पीछे वजह यहां लोगों का धार्मिक मान्यताओं पर विश्वास और संस्कृति के प्रति संवेदनशील होना मान सकते है।

भारत में मंदिरों का इतिहास बहुत प्राचीन और दिलचस्प रहा है। ऐसे ही कुछ ऐतिहासिक कहानियों के चलते देश में ऐसे कई मंदिरों की चर्चा जोरो पर रही है जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। इनमें सबसे मशहूर और चर्चित मंदिर सबरीमाला का नाम सबसे ऊपर है। लैंगिक समानता को लेकर सबरीमाला में महिलाओं को ना जाने देने पर कई सालों तक विरोध किया गया और सिर्फ सबरीमाला ही नहीं बल्कि कई धार्मिक जगहों पर महिलाओं की एंट्री को लेकर विवाद होते रहे हैं। कई धार्मिक मान्यताओं को नकारते हुए पिछले काफी समय से महिलाओं ने इन धार्मिक स्थलों पर प्रवेश करने की कोशिश भी की है। जिसका परिणाम ये रहा कि, साल 2016 से हाजी अली दरगाह के अंदर महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत मिल गई है इसी तरह और भी कई धार्मिक स्थलों पर महिलाओं को प्रवेश की मंजूरी मिली है जबकि कई जगह अभी भी विवाद जारी है।

ये तो रही महिलाओं की बात.. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में कई ऐसे भी मंदिर हैं जहां पुरूषों के प्रवेश पर रोक है या फिर उनके लिए तरह तरह के नियम हैं और ऐसे एक या दो मंदिर नहीं है बल्कि कुल 6 मंदिर है जहां पुरूषों के जाने के प्रवेश पर कई नियम हैं। हालांकि, सबरीमाला मंदिर की तरह यहां कोई ठोस नियम तो नहीं है लेकिन मान्यताओं के आधार पर पुरूषों को अंदर प्रवेश नहीं करने की सलाह दी जाती है।

1. अट्टुकल मंदिर (तिरुवनंतपुरम, केरल)

केरल के अट्टुकल मंदिर में आमतौर पर पुरूषों के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है लेकिन यहां पोंगल के दौरान देवी को भोग चढ़ाने का अधिकार केवल महिलाओं के पास रहा है। हालांकि, साल 2017 के बाद से इस नियम में काफी बदलाव हुआ है और अब पुरूष भी पोंगल के दौरान मंदिर में जाकर देवी को भोग चढ़ा सकते हैं। मगर मान्यताओं को मानते हुए कई लोग आज भी इस नियम का पालन करते हैं।

आपको बता दें कि, अट्टुकल मंदिर में भद्रकाली की पूजा होती है। एक कथा के अनुसार, कन्नागी जिसे भद्रकाली का रूप माना जाता है उनकी शादी एक धनाड्य परिवार के बेटे कोवलन से हुई थी, मगर कोवलन ने एक नाचने वाली पर अपना सारा पैसा लुटा दिया.. इस बात का एहसास जब तक कोवलन को हुआ तब तक वो पूरी तरह से बर्बाद हो चुका था. कोवलन के पास एक मात्र कन्नागी की बेशकीमती पायल बची थी जिसे बेचने के लिए वो मदुरई के राजा के दरबार पहुंचा, मगर दुर्भाग्य से उसी दौरान रानी की वैसी ही एक पायल चोरी हुई थी..

ऐसे में कोवलन पर पायल को चोरी करने का आरोप लगा दिया गया और इसी दोष की सजा के तौर पर उसका सिर कलम कर दिया गया। कोवलन की मौत के बाद कन्नागी ने अपनी दूसरी पायल रानी को दिखाई और पूरे मदुरई को जलने का श्राप भी दे दिया। इसके बाद कन्नागी मोक्ष को प्राप्त हो गई। ऐसा माना जाता है कि, भद्रकाली अट्टुकल मंदिर में पोंगल के दौरान 10 दिन रहती हैं. और इस दौरान केवल महिलाएं ही उन्हें भोग चढ़ा सकती हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि, ये वो मंदिर है जिसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज था क्योंकि यहां एक साथ 35 लाख महिलाएं आ गई थीं. ये अपने आप में महिलाओं की सबसे बड़ा ऐसा जुलूस था जो किसी धार्मिक काम के लिए इकट्ठा हुआ था.

2. चक्कुलाथुकावु मंदिर (नीरात्तुपुरम, केरल)

केरल में स्थित इस मंदिर में पोंगल के मौके पर यानी कि नवंबर, दिसंबर के दौरान नारी पूजा का आयोजन किया जाता है। इस पूजा में पुरूष पुजारी महिलाओं के पैर धोते हैं और इस दिन को धानु के तौर पर जाना जाता है। खास बात ये है कि, साल में केवल इस दिन मंदिर में पुरूष पुजारियों के भी अंदर आने पर रोक रहती है। पोंगल के समय 15 दिन पहले से ही यहां महिलाओं का हुजूम दिखने लगता है. महिलाएं अपने साथ चावल, गुड़ और नारियल लेकर आती हैं ताकि पोंगल बनाया जा सके और प्रसाद के तौर पर दिया जा सके.

आपको बता दें कि, केरल का ये मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है. हिंदू पुराण देवी महात्मयम में इस मंदिर का जिक्र किया गया है. इसके मुताबिक, यहां के सभी देवताओं ने शुंभ और निशुंभ नाम के दो राक्षसों को मारने के लिए देवी को याद किया था क्योंकि ये दोनो ही राक्षस किसी पुरूष के हाथों नहीं मर सकते थे। जिसके चलते देवी ने यहां आकर दोनो का वध किया।

3.  संतोषी माता मंदिर (जोधपुर, राजस्थान)

जोधपुर में संतोषी माता का एक विशाल मंदिर है जिसकी कई पौराणिक मान्यताएं हैं। इन्हीं में से एक मान्यता ये भी है कि हर शुक्रवार को मंदिर में पुरूषों का प्रवेश वर्जित है। ऐसा करने के पीछे लोगों का मानना है कि संतोषी माता की पूजा-अर्चना और व्रत दोनो ही आमतौर पर महिलाओं के द्वारा किया जाता है। और इस मंदिर में शुक्रवार के दिन महिलाओं के द्वारा संतोषी माता की खास पूजा की जाती है जिसके चलते इस दिन पुरूष मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं। खास बात ये है कि इस नियम को पुरूष और महिलाएं दोनो ही बखूबी निभा रही है।

4. ब्रह्म देव का मंदिर (पुष्कर, राजस्थान)

राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर है। जो सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे भारत का इकलौता ब्रह्मा का मंदिर है। बाकी मंदिरों की तरह ये मंदिर भी कई ऐतिहासिक मान्यताएं रखता है। जिनमें एक मान्यता ये भी है कि, इस मंदिर में शादीशुदा पुरूषों को आने की इजाजत नहीं है.. क्योंकि ऐसा माना जाता है कि, अगर कोई पुरूष जिसकी नई नई शादी हुई है वो इस मंदिर में आएगा तो उसके वैवाहिक जीवन में दुखों का पहाड़ टूट पड़ेगा। जिसके चलते शादीशुदा पुरूष केवल मंदिर के आंगन तक ही जाते हैं और अंदर जाकर पूजा केवल महिलाएं करती हैं। लेकिन अब सवाल यहां ये उठता है कि ऐसी मान्यता क्यों है..

दरअसल, कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा को पुष्कर में यज्ञ करना था तो माता सरस्वती को वहां पहुंचने में देरी हो गई। इस बात से नाराज ब्रह्मा ने यज्ञ को पूरा करने के लिए देवी गायत्री से शादी कर ली. जिससे माता सरस्वती आक्रोश में आ गई और उन्होंने गुस्से में श्राप दिया कि कोई भी शादीशुदा पुरुष ब्रह्मा के मंदिर में नहीं जाएगा.. और बस इसी कथा की मान्यता का पालन करते हुए ये नियम बना दिया गया जो आज तक चला आ रहा है।

5. कोट्टनकुलंगरा/ भगवती देवी मंदिर (कन्याकुमारी, तमिलनाडु)

तमिलनाडु के कन्याकुमारी से स्थित कोट्टनकुलंगरा मंदिर में भी पुरूषों के प्रवेश पर अनोखे नियम कानून बनाए गए हैं। इस मंदिर में मां दुर्गा के सभी रूपों की पूजा की जाती है। और ऐसा माना जाता है कि देवी इस मंदिर में तपस्या करने आईं थी ताकि शिव जी पति के रूप में मिल सकें. वहीं एक दूसरी मान्यता ये भी है कि, सती माता की रीढ़ की हड्डी यहां गिरी थी और उसके बाद यहां मंदिर बना दिया गया. जिसके चलते ये मंदिर सन्यास का भी प्रतीक है इसलिए सन्यासी पुरुष मंदिर के गेट तक तो जा सकते हैं, लेकिन उसके आगे वो भी नहीं जा सकते..

अगर पुरूषों को मंदिर के अंदर प्रवेश करना है तो उन्हें पहले महिलाओं की तरह 16 श्रृंगार करना होगा जिसके बाद ही वो मंदिर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं।

6. कामरूप कामाख्या मंदिर (गुवाहाटी, असम)

असम के गुवाहाटी मे स्थित मशहूर कामाख्या मंदिर.. जिसे देवी के पीरियड के समय उनकी पूजा करने के लिए पूरे विश्वभर में जाना जाता है। यहां माता सती का मासिक धर्म वाला कपड़ा बहुत पवित्र माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि जब सती माता ने अपने पिता के हवन कुंड में कूदकर जान दी थी तब शिव इतने क्रोधित हो गए थे कि वो सति का शरीर लेकर तांडव करने लगे. विष्णु भगवान से सृष्टि को बचाने के लिए सति के शरीर को सुदर्शन चक्र से काट दिया था.

इस दौरान सति के 108 टुकड़े हुए थे जो पृथ्वी पर जहां भी गिरे वहां शक्ति पीठ बन गई. कामाख्या में माता सती का गर्भ और उनकी योनि‍ गिरी थी. इसीलिए मूर्ति भी योनि‍ रूपी ही है और मंदिर में एक गर्भ ग्रह भी है. इस मंदिर की देवी को साल में तीन दिन महावारी होती है. और इस दौरान पुरूषों का मंदिर में प्रवेश एकदम वर्जित है। खास बात ये है कि इस समय अवधि के दौरान मंदिर में पुजारी भी महिलाएं ही रहती हैं।

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