भूख तो सेक्स वर्कर्स को भी लगती है

दुनिया थम गई है, हर तरफ कोरोना वायरस का खौफ दिखाई देने लगा है. एक वक्त था जिस समय लोग प्रदूषण से बचने के लिए अपने चेहरे पर मास्क लगा कर घूमते थे. वहीं आज एक ऐसा दौर आ गया है, जिस समय प्रदूषण न के बराबर है तब भी इंसान अपने चेहरे को ढक कर चलने पर मजबूर है. जिसकी एक ही वजह है वो है कोरोना वायरस. जिसके चलते पूरी दुनिया शांत हो चुकी है. इस शांति भी के भी दौर एक में एक चीज है जो शांत नहीं हुई है..और वो है इंसान की भूख.

वो कहते हैं न इंसान को चाहे कितना कुछ क्यों न कर ले. लेकिन उसे दो वक्त के खाने की जरूरत हमेशा रहती है. कुछ यही वजह है कि, जहाँ पूरी दुनिया ठप पड़ी हुई है. वहीं न जानें कितने ऐसे लोग हैं जिन्हें दो जून का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है. जिसके लिए भारत के हर राज्य की सरकारें और न जानें कितने ही गैर सरकारी संगठन काम कर रहे हैं.  

इसी तरह भारत के मुंबई में एक जगह है नागपुर, जहाँ रहती हैं. सेक्स वर्कर्स. वो जो इंसान के पेट की भूख तो नहीं मिटाती, वो इंसान के अंदर की भूख मिटाती हैं. लेकिन आज वो भारत में पिछले एक महीने से चल रहे लॉकडाउन में खुद की भूख से परेशान हैं. छोटे से घर के रोसाई के हिस्से में पड़े अनाज के डब्बे इस लॉकडाउन के चलते खाली हो चुके हैं. आटा, चीनी, दाल, चावल सब कुछ खत्म हो चुका है. लेकिन इन सेक्स वर्कर्स की पेट की भूख नहीं खत्म हुई है.

लॉकडाउन ने छीन लिया जीने का सहारा

 Sex workers

आज जहाँ इंसान एक छोटे से कोरोना वायरस से डरकर अपने घरों में कैद है. वहीं वो बाहर न निकल पानें पर मजबूर है. ऐसे में इन दिनों अपनी पूरी भड़ास इंसान अपने घर में मौजूद स्त्रियों पर निकाल रहा है. क्योंकि पिछले एक महीने में घरेलू महिलाओं के खिलाफ भारत में अत्याचार को लेकर अकूत वृद्धि दर्ज की गई है. जिसकी शायद एक खास वजह ये भी है कि, इंसान अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहा और बाहर न निकल पाने की वजह के चलते, इन सेक्स वर्कर्स के जिस्म का सौदा करने वाला कोई नहीं है. यही वजह है कि, इस समय उनके घरों में न तो खानें को आटा रह गया है, न तो चावल. बचा है तो वो पेट….जिसे दो वक्त की रोटी चाहिए होती है. ऐसे में मजबूर सेक्स वर्कर्स के पास मदद की गुहार लगाने के अलावा को और उपाय नहीं है. इन सभी न गुहार भी लगाई. लेकिन उनकी गुहार सरकार तक नहीं पहुंच सकी.

ठीक वैसे ही जिस तरह देश के अनेकों हिस्सों में न जानें कितनी ही सेक्स वर्कर्स के पास खाने को कुछ नहीं बचा. उस तरह न जानें कितनी ही जिंदगियां इस समय भुखमरी का शिकार हो रही है. लेकिन सरकार, प्रशासन और न जानें कितने ही गैर सरकारी संगठन इस भूख की खाई को पाटने का काम कर रहे हैं.

GB Road की सेक्स वर्कर्स की गुहार

 Sex workers

जो हाल इस समय मुबंई के नागपुर की सेक्स वर्कर्स का है. वही हाल इन दिनों दिल्ली में मौजूद सबसे चर्चित GB Road श्रद्धानंद मार्ग पर स्थित सेक्स वर्कर्स का भी है. उनके यहाँ भी इस समय खाने के लाले पड़े हुए हैं. जिसकी वजह है लॉक डाउन. क्योंकि जिस्म के सौदागर अब बाहर जो नहीं निकल रहे. इस लिए ये महिलाऐं मदद की गुहार लगाने को मजबूर हैं.

और इनकी गुहार सुनी RSS की दिल्ली इकाई के संयुक्त सचिव अनिल गुप्ता ने, अनिल गुप्ता बताते हैं कि, हम सभी ने एक हेल्प लाइन लॉन्च की है और इस हेल्पलाइन पर हमें हर दिन करीब 10 हजार फोन कॉल्स आ रहें हैं. हमारे कार्यकर्ता इस पर काम भी कर रहे हैं. जब हमें GB Road की इन महिलाओं का कॉल आया तो हमने इनकी मदद करने की योजना बनाई और हमने इनके पूरे एरिये का सर्वे करवाया.

जिसमें हमें अब तक कुल 986 ऐसे परिवारों के बारे में पता चला है. जिनके पास खाने को कुछ नहीं है. हमने राशन बांटना भी शुरू कर दिया है. जल्द ही सभी परिवार को खान मिल जाएगा.

लेकिन सोचने वाली बात है न, जहां पूरे देश में पिछले एक महिने से सब कुछ बंद है. वहीं पूरे देश में न जानें कितने ऐसे पेट हैं जो इस लॉक डाउन के चलते भूखे पेट सोने पर मजबूर हैं. क्योंकि उनके पास खाने को दो वक्त का खाना नहीं है. इसलिए एक वक्त का खाना आप भी खिलाए और अपनी भारतीयता दिखाए.

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