रास्ते से गुजरते किसी बोर्ड पर, किसी होर्डिंग पर, किताबों पर या फिर पेड़ पौधों के सुरक्षा कवच पर हम हमेशा से पढ़ते हैं कि, वन नहीं तो जन नहीं, वृक्ष लगाओ जीवन बचाओ….और पढ़कर इन्हें नज़रअंदाज कर देते हैं. जिसकी महज़ एक वजह है कि हमें पढ़कर भूलने की […]

एक बार शेक्सपियर ने कहा था, कि नाम में क्या रखा है। लेकिन अगर शेक्सपियर भारत में होते तो वो इसके उलट कहते कि नाम में बहुत कुछ रखा है। दरअसल, भारतीय संस्कृति में नामकरण संस्कार भी 16 संस्कारों में से एक माना जाता है। और सिर्फ इंसान ही नहीं […]

आज से 10-11 साल पहले अगर आप किसी दावत में खाना-खाने और खिलाने के बारे में सुनते होंगे या देखा होगा या फिर खुद अटेंड किया होगा तो आपको याद होगा कि कैसे एक पात (कतार) में बैठाकर लोगों को खाना खिलाया जाता था। तब प्लास्टिक से बनी पत्तलों का ट्रेंड नहीं था। उस समय […]