कल तक सब नचनिया कहते थे, आज साथ नाचने की मिन्नतें करते हैं : Eshan Hilal

बेली डांस…एक ऐसा डांस जिसे खासकर लड़कियों का कहा जाता है. जहां लड़कियों को तवज्जो दी जाती है. लेकिन बदलते भारत का स्वरूप कहें या फिर बदलते भारत के हुनरबाजों की दास्तां इस समय दिल्ली का रहने वाला, एक लड़का इस मान्यता को चुनौती दे रहा है. यही नहीं वो लड़का अपने परिवार, रिश्तेदार और समाज के सभी लोगों को समझाना चाहता है की आज के समय में कोई भी इंसान किसी भी काम को करने के लिए आजाद है. हालांकि फिर भी उसे आज उसके ही रिश्तेदार और हमारा समाज अपनाने को तैयार नहीं है…क्योंकि वो भारत का पहला पुरुष बेली डांसर है.

Indian Male Belly Dancer Eshan Hilal

ये कहानी है, दिल्ली के रहने वाले इशान हिलाल की, वो ईशान जो भारत के पहले पुरुष बेली डांसर हैं. यहीं नहीं अब तक ईशान हिलाल डांस प्लस थ्री, हाई फीवर जैसे रियलिटी शो में हिस्सा ले चुके हैं. अपने हुनर और अपने जज्बे से सबको मात दे अपनी अलग पहचान बनाने वाले ईशान आज के समय में स्टेज परफॉर्मेंस भी करते हैं. साथ ही वो मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं. जो लोगों को मोटीवेट करते हैं.

ईशान हिलाल की मानें तो वो कहते हैं कि, मैंने डांस सीखने के लिए सबकुछ छोड़ दिया, अपना पूरा करियर मैंने यहीं लगा दिया था. हालांकि उस समय लोगों की नजरों में मैं एक ‘नचनिए’ से ज्यादा कुछ नहीं था, वो नचनिया जो लड़कियों की तरह स्कर्ट पहन कर, माथे पर बिंदी लगाकर नाचता है.

दिल्ली के रहने वाले ईशान आज बेली डांस के साथ-साथ कत्थक करते हैं, यहीं ईशान पेंटिंग और फ़ैशन डिज़ाइनर का काम भी करते हैं. हालांकि अपने हुनर को निखार कर दुनिया के सामने खुद को रखकर यहां तक का सफर तय करना ईशान के लिए मामूली बात नहीं थी. आज ईशान कहते हैं कि, डांस के ज़रिए मैं अपने जज़्बात लोगों के सामने दिखाना चाहता हूं, जब कभी भी मैं दुखी होता हूं तो नाचता हूं, जब काफी खुश होता हूं तो नाचता हूं. आज मेरी हर फिलिंग डिज़ाइनिंग और डांस से ही जुड़ गई है.

माधुरी दीक्षित को देख डांसर बनने की सोची- Eshan Hilal

ईशान बताते हैं कि, जब मैं 9वीं में था उस समय मैंने डांस सीखना शुरू किया था. बचपन में उसी समय मैंने माधुरी दीक्षित को टी.वी में डांस करते देखा था और उनको देखकर, उनसे प्रेरित होकर मैंने कत्थक सीखना शुरू कर दिया, यहां तक की मैं अपने ट्यूशन तक की फीस को भी अपने डांस क्लास में दे आता था और ट्यूशन से बंक मारकर मैं अपने डांस क्लास में जाया करता था.

हालांकि इसमें भी एक दौर होता है, “एक ऐसा दौर जिस समय कोई भी इंसान आपका साथ नहीं देता. वो एक समय होता है जब आप अंदर तक हिल जाते हैं और फिर समय नहीं पाते आखिर अब करें तो करें क्या…? मेरे साथ भी यही हुआ था. यहां तक की मेरे मम्मी-पापा, भाई सबने मुझसे मुंह मोड़ लिया था. मेरे अपने दोस्तों ने भी मुझे दरकिनार कर दिया था. वो एक समय था जिस समय मुझको कुछ समझ नहीं आता था. मैं काफी अकेला था, छुप-छुप कर रोता रहता था, मुझको समझ नहीं आता था की आखिर मैंने ऐसा किया क्या है. जो लोग मेरे साथ ऐसा वर्ताव कर रहे हैं. डांस ही तो कर रहा था और डांस करना कोई अपराध तो था नहीं…तो फिर लोग मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे थे.”

जब भी डांस का नाम लेता पिटाई हो जाती थी- Eshan Hilal

इसके आगे ईशान कहते हैं कि, इतना सबकुछ होने के बावजूद भी मैंने अपना पैशन नहीं छोड़ा. स्कूल  के दिनों में एनुअल फंक्शन के टाईम में जब मैंने परफॉर्म करने को घर पर कहा तो उस समय मेरे पापा ने मेरी इस कदर पिटाई की थी कि मेरे पैर में फ्रैक्चर हो गया था, हां मगर ऐसा पहली बार नहीं था और मुझको मालूम था की ये आखिरी बार भी नहीं है. ये सिलसिला यूं ही चलता रहा. जब भी मैं नाचने की बात करता तो मेरे पापा मेरी पिटाई कर देते. मैंने उन्हें कई बार समझाने की कोशिश की. मैंने उनसे कई बार कहा की मुझे डांस में दिलचस्पी है, बतौर प्रोफेशनल मैं इसमें आगे जाना चाहता हूं. लेकिन मेरे पापा मेरी कभी नहीं सुनते थे उन्हें बस एक चीज आती थी पिटाई और ना. क्योंकि उनका मानना था कि, नाचना और गाना हमारा काम नहीं है. ये काम हमारे पूरे खानदान में कभी किसी ने नहीं किया तो तुम क्यों ‘नचनिया’ बनना चाहते हो?

ऐसा नहीं की मैंने ये एक बार कोशिश की मैंने जितनी बार भी कोशिश की सभी बार ये जबाव मिलता. इसलिए मैं चुप हो गया, लेकिन मैंने कभी डांस करना बंद नहीं किया. अपने घर में छिप-छिपकर मैं नूतन, माधुरी और बैजंतीमाला के डांस स्टेप्स फॉलो करता. वहीं जब मेरा स्कूल खत्म हुआ तो मैंने कत्थक सीखने के लिए कत्थक स्कूल में एडमिशन लिया. अपने ही घर में छिप-छिपकर मैं कत्थक सीखता. इसी बीच मुझे बैली डांस में दिलचस्पी आई. जिसके बाद मेरे बैली डांस की जर्नी शुरू हुई.

जिसके बाद में बिना घरवालों को बताए दिल्ली के ही ‘बंजारा स्कूल ऑफ डांस’ में एडमिशन लिया. यहां डांस सीखने के बाद मुझको चीन के एक डांस कॉम्पीटिशन में हिस्ला लेने का ऑफर मिला. हालांकि मुझे अभी ज्यादा दिन बैली डांस करते नहीं हुआ था तो मैं वहीं सेकेंड रनर अप पर रहा. मेरी इस जीत की कवरेज नेशनल ही नहीं बल्कि इंटरनेशनल मीडिया तक ने की. जाहिर है ये बेहद खुशी की बात थी, लेकिन जब मेरी फोटो में अब्बा ने अखबार में देखी तो उनके मालूम हो गया कि, मैंने डांस नहीं छोड़ा. जिसके बाद मेरी मां से उन्होंने कहा की ये क्या कर रहा है? इसने पूरे समाज में हमारी नाक कटा दी, पूरे समाज में आज ये नचनिया बना फिर रहा है.

ईशान की मानें तो वो कहते हैं कि, “जब मैं छोटा था उस समय किसी ने मुझे नहीं रोका लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ मेरे परिवार वालों ने मुझसे कहना शुरू कर दिया की नाचना ‘हराम’ है. मेरे घर के सभी सदस्यों ने मुझे रोकने की कोशिश. यहां तक की सभी ने कहा कि, अगर यूं ही नाचता रहा तो तेरी मर्दानगी पर सवाल उठेगा, मेरी मां मौलवी से काला धागा ले आई. लेकिन मैंने नाचना बंद नहीं किया.”

यहीं नहीं मेरे दोस्त मुझसे कहते कि, लड़का होकर लड़की की स्कर्ट पहनता है, बिंदी लगाता है तू तो लड़कियों की तरह कमर घुमाता है. ये सब इस्लाम में हराम है. ये सब चीजें थी की दुनिया के इतने ऊंचे स्तर पर जीतने के बाद भी मैं अपनों के बीच हार चुका था. मुझे बस एक ही बात हमेशा कही जाती थी कि, नाचना हराम है. लेकिन मैं किसी का खून नहीं कर रहा था, किसी को मार नहीं रहा था, किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहा था तो ये हराम कैसे हो सकता था. इन सबके साथ मैं अंदर से पूरी तरह टूट रहा था. लेकिन, मेरा नाचना मेरे अपनों के नहीं, सबकी नजरों में आ रहा था. एक-एक करके मुझे अलग-अलग जगह से ऑफर आने लगे थे.

मैं ‘डांस प्लस 3’, ‘हाई फीवर’जैसे शोज का हिस्सा बन चुका था. यहां कल्कि कोएचलीन से लेकर रेमो डिसूजा, शक्ति मोहन से लेकर भारत के बड़े-बड़े डांसर थे. जब मैंने इनके साथ नाचना शुरू किया तो लोगों का नजरिया बदलने लगा. कल तक जो लोग मुझ नचनिया कहकर ताने मारा करते थे. आज उन्हीं के बच्चे मेरे घर आकर मेरे साथ सेल्फी की मांग करते हैं. कल तक जो लोग मुझे लड़कियों की तरह कमर मटकाने वाला कहते थे आज मुझसे वही लोग डांस सीखना चाहते हैं. कल जो लोग मेरी संगत से अपने बच्चों को दूर रखने की कोशिशें करते थे आज वो लोग मुझ जैसा अपना बच्चा चाहते हैं. मुझे ये सबकुछ देखकर अच्छा लगता है. खुशी होती है, धीरे धीरे ही सही…चीजें बदल गई, लोगों की सोच बदल गई, यहां तक की नजरिया बदल गया. क्योंकि आज के समय में लोग डांसर को नाचना-गाने वाले न कहकर कलाकार कहते हैं.

आज सोशल मीडिया पर भी मुझको सकारात्मक से लेकर नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है. कुछ लोग कहते हैं कि, मेरे वजह से वो अपने बच्चों के दर्द को समझ पाए हैं तो कुछ कहते हैं आपकी वजह से हम अपने हुनर को आगे बढ़ा पाने को प्रेरित हो पाए हैं. मैं सबसे यही कहना चाहता हूं, कभी खुद को मत रोको, न तो कभी अपने को रोकने दो, आज अगर मुझे कुछ भी करना है तो उसके लिए पहले मुझे खुद को अपनाना होगा, फिर मेरे परिवार वाले और समाज वाले मेरे साथ आ जाएगें.

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