कुछ ऐसे नाम जो कोरोना काल में लोगों के लिए फरिश्ता बन गए

दुनिया फिलहाल कोरोना काल में है। मतलब कोरोना महामारी के कारण भारत समेत दुनिया भर में लगातार लोगों की जान जाने का सिलसिला जारी है। वहीं कोरोना सिर्फ बीमारी बनकर ही नहीं उभरा है बल्कि ये एक तरह की आर्थिक चुनौती बनकर भी पूरी दुनिया के सामने आया है। इसके कारण पूरी दुनिया में लॉकड़ाउन है, जिसके कारण सभी काम धंधे बंद पड़े हैं। हालांकि एक बार फिर से चीज़े पटरी पर लौट रही हैं। यही नहीं अब लॉकडाउन में भी छूट दी जा रही है। लेकिन जिस तरह लॉकडाउन के चलते निचले तबके के लोग त्रस्त हुए हैं। उससे कोई भी इंसान अनजान नहीं है। ऐसे में जहाँ न जानें कितने ही लोगों ने पैदल जाकर अपनी मंजिल का सफर पूरा किया, तो कई लोगों ने किसी न किसी का सहारा लेकर अपनी मंजिलें तय की। इस बीच ऐसे न जानें कितने ही लोग फरिश्ते बनकर आए जिन्होंने इन सबकी मदद कि…चलिए हम आपको उन्हीं में से कुछ नामों को बतातें हैं जो इस मुश्किल वक्त में लोगो के लिए फरिश्ता बनकर आए

Sonu Sood

Sonu Sood

बॉलीवुड फिल्म अभिनेता सोनू सूद को आज कौन नहीं जानता। भले ही वो फिल्मों मै नेगेटिव किरदार में दिखते हैं, लेकिन इस कोरोना काल में देश के प्रवासी वर्कर्स के लिए वो भगवान से कम नहीं है। इस एक्टर ने अपनी साथी नीति गोयल के संग मिल कर जमीन पर उतरे और प्रवासियों को सुरक्षित उनके घर भेज रहे हैं। वहीं सोनू ने केरल में फंसे 177 महिलाओं को एयरलिफ्ट करवाकर उनके घर तक पहुंचाया, ये महिलाएं एक लोकल फैक्टरी में सिलाई कढ़ाई का काम करती हैं। वहीं हाल में उन्होंने ट्रेन के जरिए भी प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाया। सोनू लगातार ट्विटर के जरिए लोगों की गुहार पर प्रतिक्रिया देते हैं और उन्हें उनके घर पहुंचने में मदद करते हैं। वहीं उन्होंने फसे हुए प्रवासी मजदूरों के लिए एक टोल फ्री नंबर भी जारी किया है। सोनू सिर्फ लोगों को सुरक्षित घर ही नहीं पहुंचाते बल्कि उनके पहुंचने पर उनकी सही सलामत होने की खबर भी लेते हैं।

Samajsevi Ertza Qureshi

Ertza Qureshi

कोरोना काल में ही रमजान का पाक महीना भी आया। इस दौरान भी इंसानियत की मिसाल कायम करते कई युवा दिखे। इनमें से एक हैं दिल्ली के इर्तजा कुरैशी। पुरानी दिल्‍ली के युवा इर्तजा कुरैशी की प्रेरणा से 70 से अधिक युवाओं ने खास माने जाने वाले तरावीह की नमाज की जगह जरूरतमंदों की मदद कर लोगों के लिए अलग मिसाल कायम की है। वैसे, युवा समाजसेवी इर्तजा कुरैशी ही कोरोना योद्धा की अहम भूमिका में ही नहीं हैं। बल्‍कि उनकी पत्‍नी हीना भी कोरोना की फ्रंट लाइन वॉरियर्स हैं। वह पंत अस्‍पताल में लैब टेक्‍नीशियन हैं जहां वह कोरोना के संदिग्‍ध मरीजों का रक्‍त परीक्षण करती हैं।  उन्होंने पहले एक सोशल मीडिया कैंपेन चलाया और लोगों को जोड़ा। जिसके बाद पैसे इकट्ठा हुए और जरूरतमंदों तक खाना पहुंचने के लिए लोग भी आगे आए। इस तरह कुल 70 लोगों की टोली बन गई। हर जुड़े युवक के सामने लक्ष्‍य था कि, वह 20 जरूरतमंदों तक 20 किलो की राशन की किट पहुंचाएं। इस तरह वह अब तक इस अभियान में 2447 परिवारों को दिल्‍ली भर में मदद पहुंचा चुके हैं।

Khaira Baba

Khaira Baba

80 साल के वृद्ध खैरा बाबाजी भी इस मुश्किल दौर में लोगों की मदद के लिए आगे आए। महाराष्ट्र के यावतमल में हाईवे के पास वे पिछले दो महीने से यहां से गुजरने वाले हर प्रवासी को फ्री में लंगर लगाकार अच्छा खाना खिला रहे हैं। उनके द्वारा चलाए जा रहे, इस लंगर में उनके 14 साथी हैं। जिसमें से 11 बावर्ची हैं, जो बिना रुके रोज राहगीरों के लिए खाना बना रहे हैं। उनके ‘ गुरु का लंगर ‘ से हजारों लोग खाना खा चुके हैं। उनका ये काम रोज की तरह जारी है। बाबाजी हर एक राहगीर का मुस्कुरा कर स्वागत करते हैं। यही नहीं हाइवे पर एक त्रिपाल लगाकर उनका ये छोटा सा लंगर रोज पैदल जाने वाले मज़दूरों की भूख शांत कर रहा है। इसके आलावा वे हाईवे पर मौजूद जानवरों का भी पेट भरते हैं।

Idli Wali Amma

Idli Wali Amma

लॉकडाउन के कारण सप्लाई लाइन बंद हुई और इसके कारण दुकानदारों ने हर सामान का रेट बढ़ा कर बेचना शुरू कर दिया। लेकिन तमिलनाडु कि फेमस इडली अम्मा यानि कमलाथल अम्मा के इडली का दाम नहीं बढ़ा। कोरोना काल में भी अम्मा राहगीरों को सिर्फ 1 रुपए में इडली खिला रही हैं। अम्मा कहती हैं कि, वो मदद लेकर काम चला रही हैं, लेकिन उनके इडली का दाम नहीं बढ़ेगा। वे कहती हैं कोरोना के कारण दिक्कत बड़ी है, जो लोग घर नहीं जा पा रहे, वो यहां इडली खाने आते हैं। उनको खाना खिलाना ज्यादा जरूरी है। अम्मा का काम देखकर देश भर से लोग उन्हें मदद भेज रहे हैं। चर्चित शेफ  विकाश खन्ना ने भी इडली अम्मा को मदद भेजी है ताकि उनका ये ढाबा यू हीं लोगों का पेट भरता रहे।

Anasuya alias Seethakka

Anasuya alias Seethakka

आम तौर पर विधायक और एमपी लेवल के नेताओं की छवि गाड़ी वाले बबुओ जैसी है। लेकिन देश में आज भी कई ऐसे नेता हैं। जो अपनी जनता के हर सुख दुख में उनके संग हैं। ऐसे ही नेता हैं तेलंगाना के मुलुगु की विधायक, दानसारी अनुसूया उर्फ सितक्का। लॉकडाउन के बाद से ही वो लोगों कि मदद में लगी हुई हैं। 26 मार्च को उन्होंने कुछ ग़रीबों को अपने कैम्प के दफ़्तर के पास खाना दिया। इसके बाद ग़रीबों और भूखे लोगों की भीड़ लग गई। इसके बाद सितक्का खुद लोगों के पास राहत का सामान लेकर जाने लगीं। इसके लिए उन्होंने “गो हंगर गो” नाम का एक कंपनी चलाया है। सितक्का रोज़ सुबह ट्रैक्टर से गांव के लिए निकल जाती हैं। कभी कंधे पर राहत सामग्री तो कभी सिर पर पर रखकर वो गरीबों तक उबड़ खाबड़ रास्तों से होते हुए पहुंचती है।

सितक्का का इतिहास भी काफी रोचक रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो, उन्होंने गरीबों और आदिवासियों के लिए 16 साल की उम्र में हथियार उठा लिया था। 1997 में 25 की उम्र में उन्होंने माओवादियों के संग सरेंडर कर दिया था और मुख्य धारा से जुड़ी हैं। यही नहीं उन्होंने पहले वकालत की डिग्री ली और फिर राजनीति में आ गईं।

Niharika Dwivedi

Niharika Dwivedi

निहारिका द्विवेदी का नाम भी काफी चर्चा में है। मात्र 12 साल की इस लड़की ने अपने बचत के 48000 रुपए डोनेट कर तीन प्रवासी मजदूरों को फ्लाइट के जरिए उनके घर जाने में मदद की। निहारिका नोएडा की रहने वाली हैं। निहारिका की मानें तो टीवी पर माइग्रेंट वर्कर्स की मुश्किल और लोगों को उनकी मदद करता देख उन्हें भी कुछ करने कि प्रेरणा मिली। वे कहती हैं कि समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है और यह ही वो समय है जब हम इनके लिए कुछ कर सकते हैं। निहारिका की ये बाते सुनकर हर भारतीय यहीं कहेगा कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में हैं।

ऊपर तो महज कुछ नाम हैं जो हमने आपको गिनाए। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में देश की हर गली में ऐसे लोग सामने आएं है जो अपने तरीके से एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। उन सब के बारे में लिखा जाए तो पन्ने कम पड़ जाएंगे और कलम की स्याही खत्म हो जाएगी। लेकिन इन लोगों की मानवता ने ये दिखा दिया है कि, जब तक हम एक दूसरे के संग हैं। हर पहाड़ सी लगने वाली मुश्किल को हम टाल सकते हैं। यहीं तो भारतीयता की पहचान रही है जहां के संस्कार में हमेशा से यहीं रहा है कि-

आत्मार्थं जीवलोकेऽस्मिन् को न जीवति मानवः ।

परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति ॥

मतलब – इस संसार में अपने लिए कौन नहीं जीता पर जो परोपकार के लिए जीता है, वो ही सच्चा जीना है

Indian

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

Sonam Wangchuk का कमाल, सेना के लिए बना रहे हैं "Solar Heated Mud Huts"

Wed Jun 3 , 2020
Share on Facebook Tweet it Pin it Email हम जिस देश में रहते हैं उसकी सुरक्षा की जब भी बात होती है, तो हमारा ध्यान सीधे हमारे जांबाज सैनिकों पर जाता है। आज वे सीमा पर तैनात हैं। तभी हम अपने घरों में सुरक्षित हैं। ये भारत के रक्षक हर […]
Sonam Wangchuk