ढ़ाई महीने में 76 गुमशुदा बच्चों को अपनों से मिलाकर, हेड कॉन्स्टेबल से ASI बनी सीमा

अपनों से बिछड़ने का गम अक्सर इंसान उम्र भर नहीं भूल पाता. यही वजह है कि, कभी उसकी जिंदगी उसके इंतजार में गुज़र जाती है या फिर हर राह उसकी याद में कट जाती है. जहाँ इस साल पूरी दुनिया कोरोना वायरस के चलते दूसरों से लेकर अपनों तक सभी से दूरी बनाने पर मजबूर है. वहीं कोरोना काल में ही ऐसे न जानें कितने बच्चें हैं जिन्हें अगवा कर लिया गया. हालांकि, ऐसा कोरोना काल में ही नहीं बल्कि हमेशा से हमारे पूरे देश में होता रहा है.

बच्चों को अगवा कर उन्हें बाल मजदूरी करने पर या तो मजबूर किया जाता है या फिर उन्हें रोड़, मंदिर-मस्जिद के किनारे भीख मांगने के लिए छोड़ दिया जाता है. यही वजह है कि, ऐसे न जानें कितने मासूम है जो बचपन से ही अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं. जिन्हें वापस अपने घर लाने का जिम्मा अक्सर देश की पुलिस उठाती है. कभी-कभी इन बच्चों को वापस अपना घर मिल जाता है. हालांकि कभी-कभी ये बच्चे हमेशा के लिए गुमनाम हो जाते हैं.

इसी तरह पिछले कुछ महीने में पूरे भारत में सैकेडों बच्चे गायब हुए. जिनके घरवालों ने पुलिस को इत्तेला की. उनकी खोज में लगी पुलिस जहाँ इक्का-दुक्का बच्चों को अपने घर वापस पहुंचा पाई. वहीं देश की राजधानी दिल्ली में मौजूद एक हेड कॉस्टेबल ने पिछले ढ़ाई महीने में 76 बच्चों को अपने घर वापस पहुंचाकर मिसाल पेश की हैं.

सीमा ढाका की मेहनत और लगन को सलाम कर रहा है पूरा देश

दिल्ली पुलिस की हेड कॉन्स्टेबल सीमा ढाका की इसी मेहनत के चलते जहाँ दिल्ली पुलिस ने उन्हें प्रमोशन देकर हेड कॉन्स्टेबल से असिस्टेंट सब इन्सपेक्टर (ASI) बना दिया. वहीं उनकी मेहनत और लगन को आज पूरा देश सलाम कर रहा है.

76 बच्चों को वापस अपनों से मिलाने वाली सीमा ढाका बताती हैं कि, “मैंने जितने बच्चों को वापस उनके घर पहुंचाया है. उनमें 56 बच्चें ऐसे हैं जिनकी उम्र अभी 14 साल से भी कम है. मुझे खुशी है कि मैं इन बच्चों को वापस उनके परिवार से मिला पाई.”

शामली के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली सीमा इस समय समयपुर बादली थाने में तैनात हैं. जबकि ऐसा प्रमोशन पाने वाली सीमा ढाका पहली पुलिसकर्मी हैं. जिन्हें हेड कॉन्स्टेबल से असिस्टेंट सब इन्स्पेक्टर बनाया गया है.

बच्चों को उनके घर पहुंचाने का ये सिलसिला शुरू करने पर सीमा कहती हैं कि, “देश में चल रहे कोविड और लॉकडाउन के बीच ऐसा करना मुश्किलों भरा था. ऐसे में डर भी लगा. हालांकि पुलिस में होने की वजह से ये मेरी जिम्मेदारी है. यही वजह है कि, जहां कुछ बच्चे पंजाब तो कुछ पश्चिम बंगाल और बिहार से रेस्क्यू करने पड़े. इनमें जहां कुछ बच्चों को अगवा किया गया था तो कई ऐसे बच्चे थे. जिन्हें नशे की लत लगवाकर दूसरी जगह ले जाया गया था. यही वजह थी कि, इन बच्चों को वापस उनके घर पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी थी.”

दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने ट्विट कर की सीमा ढाका की तारीफ

साथ ही इस दौरान सीमा बताती हैं कि, “उनका एक बेटा है जिसकी उम्र 8 साल है. जिबकी उन्हीं की तरह उनके पति भी दिल्ली पुलिस में सेवारत हैं. जिसके चलते उनको अपने परिवार वालों से भी भरपूर सहयोग मिल सका.”

सीमा ढाका की इस मेहनत को देखते हुए जहां आज पूरा देश उनको सलाम कर रहा है. वहीं इस उपलब्धि पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने भी उनकी तारीफ की. आज सीमा कहती हैं कि, मैं अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी परिवार के साथ-साथ CP साहब, DSP को देती हूँ. जिन्होंने मेरी हर संभव मदद की. उम्मीद है आगे भी सबका सहयोग मिलता रहेगा और मैं यूँ ही काम करती रहूंगी.”

गौरतलब है कि, दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने हाल ही में अपने एक ट्वीट के जरिए सीमा ढाका की बहादुरी को सलाम करते हुए लिखा था कि, “महिला हेड कॉन्स्टेबल सीमा ढाका नए इंसेटिव स्कीम के तहत पिछले ढाई से तीन महीनों में 76 गुमशुदा बच्चों को अपने घर पहुंचाने वाली व आउट-ऑफ टर्न प्रमोशन पाने वाली पहली पुलिसकर्मी हैं. उनको जज्बे और इन परिवारों की खुशी वापस लौटाने के लिए उनको सलाम.”

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