Sathyasri Sharmila – India’s First Transgender Lawyer

आज अगर बात विकास की करें, तो हमारा देश हर नजरिये से हर तरफ बदलाव करता नजर आ रहा है यहां तक देश के अंदर उन तमाम चीजों को अपना रहा है. जोकि आज से महज कुछ समय पहले तक हमारे समाज में किसी कुरीति या किसी दुष्प्रभाव से कम नहीं थी।

आज हमारा देश और देश में रह रहा हर इंसान उन सभी चीजों को अपनाने को आगे बढ़ रहा है जोकि शायद आज से पहले तक अपनाना नहीं चाहता था। और उन्हीं में से एक है ट्रांसजेंडर्स, ये वो शब्द है जिससे आज से कुछ समय पहले तक बहुत से अनजान थे और जो जानते भी थे, उनके लिए तो ट्रांसजेंडर्स हमारे समाज का हिस्सा ही नहीं हुआ करते थे तो फिर समाज में उनके अधिकार की बात तो बहुत दूर की है।

हालांकि, हमारे देश ने आजादी से लेकर आज तक हर जगह तरक्की की लेकिन ट्रांसजेंडरों के अधिकार की अगर बात करें तो, हमारे समाज में उन्हें न तो कभी सम्मान मिला और ना ही वो अधिकार, जो हर आम इंसान को दिया जाता है हालांकि आज के दौर में भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो इन्हें खुलकर नहीं अपनाते लेकिन वो इनकी उपलब्धियों को नाकार भी नहीं पाते।

Sathyasri Sharmila – सभी ट्रांसजेंडरों के लिए मिसाल बनकर सामने आई हैं सत्यश्री शर्मिला

ऐसी ही एक नई मिसाल बनी हैं सत्यश्री शर्मिला, जो आज देश की पहली ट्रांसजेंडर वकील बनी हैं. पिछले साल 2018 में तमिलनाडु और पांडुचेरी बार काउसिंल ने सत्यश्री शर्मिला को सत्यापित कर दिया है.

तमिलनाडु के रामानथपुरम जिले की रहने वाली शर्मिला ने ग्रेजुएशन करने के बाद साल 2004 से 2007 के दौरान वहां के एक सरकारी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की थी जिसके बाद उन्होंने वो मुकाम हासिल किया जो आज तक कोई भी ट्रांसजेंडर नहीं कर पाया था.

अपने वकील बनने के संघर्ष के बारे में सत्यश्री शर्मिला कहती हैं की अपनी इस कामयाबी पर मुझे बहुते खुशी है. इसके साथ वो कहती हैं कि यहां तक का दौर वास्तव में बहुत कठिन रहा है. मैंनें कई कठिनाइयों का सामना किया है और आज मैं अपने मुकाम पर पहुंच गई हूं.

Sathyasri Sharmila – अब ट्रांसजेंडरों के लिए बदल रहा है हमारा समाज

इसके आगे वो कहती हैं कि वो आशा करती हैं कि इस पेशे में उनके समुदाए के और लोग भी आए ताकि हम और सशक्त होकर अपने अधिकारों की बात स्वयं कर सके।

गौरतलब है कि, 2014 में चेन्नई उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद ट्रांसजेंडर समुदाए के जीवन में काफी अच्छे सुधार आए हैं. उनकी मौजूदगी अब प्रतिष्ठित जगहों पर भी बढ़ने लगी है, जो आने वाले समय में एक अच्छे समाज के लिए बेहद जरूरी है.

आपको बता दें कि इससे पहले पश्चिम बंगाल की जोयिता मंडल देश की पहली ट्रांसजेंडर जज बनी थी. जोयिता की नियुक्ति पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर लोक अदालत में की गई थी. इसके अलावा पुलिस विभाग में भी पृथिका याशिनी ने ट्रांसजेंडर के रूप में पहली बार सब-इंस्पेकटर का पद संभाला था. आज समाज में अगर परिवर्तन की करें तो, निश्चित ही आज के इस दौर में सुधार और परिवर्तन दोनों बेहतरी की ओर अग्रसर है.

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