स्पेशल बच्चों को नई राह दिखाती रीता सक्सेना

आज आपको एक ऐसी महिला से परिचित करवाने जा रहे है जो एक गृहिणी है, एक मां है एवं उन लाखों बच्चों की एक आस है जिन्हें हमारा समाज अपाहिज कहकर ठुकरा देता है इनका नाम है रीता सक्सेना यह एक बहुत ही अच्छी शिक्षिका है। रीता सक्सेना दिल्ली में रहती हैं इनकी स्वयं की एक बेटी है। रीता जी का अपना एक स्कूल है जिसका नाम है प्रतीक स्पेशल स्कूल जिसकी स्थापना उन्होंने आज से 6-7 साल पूर्व की थी।

यह स्कूल उन बच्चों के लिए है जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं जिनको हम अपाहिज कहते हैं। रीता जी खुद बहुत शिक्षित महिला हैं और इन्होंने इन स्पेशल बच्चों को एक नई पहचान देने के लिए अपने स्कूल प्रतीक की स्थापना की थी और जब इन्होंने इस स्कूल की स्थापना की तब इस स्कूल में सिर्फ 20 बच्चे थे।

मगर आज इस स्कूल में 400 से भी अधिक बच्चे दाखिला ले चुके हैं। जब आरंभ में प्रतीक स्पेशल स्कूल की स्थापना हो रही थी तब समाज के लोगों ने रीता जी को बहुत रोकने का प्रयास किया परंतु उन्होंने सिर्फ अपनी मन की सुनी और स्कूल की स्थापना कर दी।

इस स्कूल की प्रेसिडेंट स्वयं रीता सक्सेना जी ही हैं जो लगभग पिछले 6-7 सालों से ही अपनी खुद की बदौलत स्कूल को चला रही हैं। कभी-कभी कुछ बड़े लोग उस स्कूल में आते हैं तो चैरिटी दे जाते हैं या फिर कुछ बच्चों की पढ़ाई का खर्च स्वयं उठाने का दायित्व भी लेकर रीता जी के कंधे का बोझ हल्का करते हैं।

आम बच्चों की तरह ही पढ़ाई करते हैं प्रतीक स्पेशल स्कूल के स्पेशल बच्चे

प्रतीक स्पेशल स्कूल में बच्चे आम बच्चों की तरह ही पढ़ाई करते हैं। उन्हें आम बच्चों की तरह ही स्कूल में शिक्षा दी जाती है और आम बच्चों की तुलना में यह बच्चे बहुत ही अधिक बुद्धिमान है ऐसा रीता जी का मानना है इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया कि क्यों ना ऐसे बच्चों को आम स्कूल की तरह पढ़ाई की सुख सुविधाएं प्रदान की जाए उन्होंने मन में विचार ठान लिया और स्कूल खोल डाला लेकिन आज तक इस स्कूल में किसी भी तरीके की कोई भी शिकायत नहीं आई। दिन प्रतिदिन इस स्कूल में बच्चों का दाखिला बढ़ता ही चला जा रहा है।

बच्चों के साथ रीता जी का तालमेल बहुत अच्छा है। बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास में भी पहले की तुलना में बहुत अधिक बदलाव आए हैं जो बच्चे पहले ठीक से बात नहीं कर पाते थे वह धीरे-धीरे बातों को समझने लगे हैं एवं बहुत जल्दी ही रिस्पांस भी करते हैं। ऐसा बदलाव सिर्फ रीता जी के कारण हो पा रहा है। यदि आप भी रीता जी से जुड़ना चाहते हैं तो जरूर जुड़े उनके साथ और यदि आपके घर के आसपास पर स्पेशल चिल्ड्रन है तो उनका दाखिला इस स्कूल में अवश्य करवाएं ताकि उन बच्चों को भी बाकी के बच्चों की तरह प्यार मिले और उनमें भी बढ़ोतरी हो सके।

एक इंटरव्यू के माध्यम से रीता जी से बहुत कुछ जानने को मिला रीता जी के अनुसार, यह स्पेशल बच्चे कुछ भी नहीं चाहते हैं सिर्फ आपका प्यार चाहते हैं आपसे अच्छा व्यवहार चाहते हैं मगर समाज के कुछ लोग ऐसे बच्चों को देख कर भी अनदेखा कर देते हैं। जो रीता जी को बहुत बुरा लगता था इसलिए 1 दिन बैठे बैठे उनके मन में यह विचार उत्पन्न हुआ कि क्यों ना ऐसे बच्चों के लिए भी स्कूल खोला जाए और उन्होंने स्कूल खोला रजिस्टर्ड हुआ और आज इस स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

प्रतीक स्पेशल स्कूल में बच्चों ने नहीं ली जाती कोई फीस

ज्यादातर इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बहुत ही गरीब परिवार से होते हैं इस स्कूल की कोई भी फीस नहीं है यहां मुफ्त में इन बच्चों को पढ़ाया लिखाया जाता है। रीता जी का कहना है कि कुछ ऐसी संस्थाएं भी है जो रीता जी को इस नेक कार्य में मदद करते हैं कुछ कुछ बच्चों को बड़े-बड़े संस्थानों पर लोगों ने कानूनी रूप से गोद ले लिया है और उनकी पढ़ाई लिखाई का खर्च हर महीने रीता जी के पास पहुंच जाता है यदि आप भी एक बच्चे को पढ़ाना चाहते हैं और उन्हें अच्छा भविष्य देना चाहते हैं तो अवश्य रीता जी से संपर्क करें और नेकी के कार्य में अपना भी नाम जोड़े।

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