रिटायर हेडमास्टर ने बनाई कीवी की खेती से पहचान, कमाई 10 लाख से ज्यादा

अक्सर इंसान अपनी जिंदगी में कई चीजों सोचकर करता है. पच्चीस तक पढ़ाई, फिर कमाई और साठ साल की उम्र के बाद रिटायरमेंट. ऐसा करने वाला इंसान खुद को एक सफल इंसान समझता है. वहीं इसके उलट ऐसे भी अनेकों लोग होते हैं. जिन्हें उम्र की परवाह नहीं होती. वो हमेशा कुछ न कुछ बेहतर करने की फिराक में रहते हैं. ठीक भवान सिंह की तरह.

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के सामा गाँव में रहने वाले भवान सिंह एक समय में सरकारी स्कूल में हेड मास्टर थे. आज भवान सिंह की उम्र 72 साल है. सरकारी स्कूल में हेडमास्टर भवान सिंह साल 2009 में अपने पद से रिटायर हुए. इसके बाद उन्होंने इन सब चीजों से हटकर कुछ अलग करने का इरादा बनाया. जिसके लिए उन्होनें खेती का चुनाव किया. हालांकि परंपरागत खेती नहीं, कुछ हटकर खेती. जिसके चलते उन्होंने कीवी की खेती (kiwi farming)  करने की शुरूवात की और आज उनकी मेहनत और दीमाग का नतीजा है कि, एक उम्र में सरकारी हेडमास्टर रहे भवान सिंह आज सफल किसान के तौर पर जाने जाते हैं.

ऐसे शुरू की भवान सिंह ने Kiwi Farming

Kiwi Farming

हमेशा से बागवानी के शौकीन रहे, भवान सिंह बताते हैं कि, मैं हमेशा से खेती से जुड़ा रहा. मेरा परिवार एक किसान परिवार था. यही वजह थी कि, नौकरी के दौरान ही मैंने तय कर लिया था की रिटायरमेंट के बाद मैं खेती करूंगा. हालांकि मुझे खेती में भी कुछ हटके करना था. साल 2004-05 के दौरान मैं उत्तराखंड के कुछ किसानों के साथ हिमाचल प्रदेश गया था. जहां मैंने पहली बार कीवी की खेती (kiwi farming) के बारे में जाना.

जिसके बाद भवान सिंह ने (kiwi farming) के बारे में जानकारियां इकट्ठा करनी शुरू कर दी. जब वो हिमाचल प्रदेश से वापस अपने यहां आए तो तीन-चार पौधे भी साथ लाए. ये पौधों महज तीन-चार साल में ही तैयार हो गए. इन पौधों पर फल आने लगे. अपनी इस छोटी सी पहल के चलते भवान सिंह ने कीवी की खेती (kiwi farming) करने का फैसला किया.

इसके बाद जब भवान सिंह रिटायर हुए तो उन्होंने अपना पूरा समय कीवी की खेती (kiwi farming) में लगाना शुरू कर दिया.

आज हर इंसान जानता है कि, कीवी फल में कितनी ही खूबियां होती हैं. अनेकों बीमारियों के दौरान लोग कीवी फल का इस्तेमाल करते हैं.

Kiwi Farming की शुरूवात में लगाए 600 पौधे

Kiwi Farming

भवान सिहं कहते हैं कि, “जिस समय मैंने कीवी की खेती (kiwi farming) शुरू की उस समय, लगभग डेढ़ हेक्टेयर में 600 कीवी के पौधे लगाए. जिसमें लगभग 350 पौधे आज पूरी तरह से तैयार हैं. इन पौधों में फल आते हैं. जबकि बाकी के पौधें अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं है. हालांकि इन पौधों को मैंने एक बार में नहीं लगाया था. धीरे-धीरे लगाते हुए आज इन पौधों की संख्या 600 पुहंची है.”

शुरूवाती समय में महज 100 पौधे लगाने वाले भवान सिंह कहते हैं कि, “शुरूवात में मैंने महज 100 पौधे लगाए थे. खेती में नया होने के चलते मैं कोई ज्यादा बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहता था. हालांकि आज परिणाम अच्छे मिल रहे हैं. पौधे तैयार हो रहे हैं. मुझे इस खेती के बारे में जानकारी भी हो गई है.”

Kiwi Farming की ऐसे करें शुरूवात

आज भवान सिंह समुद्र तल से 1000-2000 मीटर की ऊंचाई पर कीवी की खेती करते हैं. वो कहते हैं कि, इसकी कई किस्में होती हैं. जिनका आकार और स्वाद दोनों ही अलग-अलग हो सकते हैं. कीवी की खेती के लिए हम कटिंग और बीज दोनों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि हमें इसमें काफी ध्यान देने की जरूरत भी होती है. क्योंकि ये पौधों इतनी आसानी से नहीं लगते न ही तैयार होते हैं. ऐसे में अगर कोई किसान इसकी खेती करना चाहता है तो, उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए की कीवी के पौधों पंक्तिबद्ध हो. साथ ही उनकी दूरी पाँच से छह मीटर की होनी चाहिए. जबकि दो लाइनों के बीच भी चार से पाँच मीटर की दूरी होनी चाहिए.

साथ ही अपने यहां की मिट्टी की जांच भी करा लेनी चाहिए. ताकि हमें मालूम चल सके की मिट्टी में किन किन चीजों की कमी है. इसके अलावा इस खेती के लिए जैविक खाद ज्यादा बेहतर होती है. जिसमें सबसे खास बात तो ये है कि, कीवी की खेती में कोई खास कीट नहीं लगते. यही वजह है कि, इन्हें रासायनिक खाद या पेस्टिसाइड की जरूरत नहीं पड़ती.

हाँ मगर कीवी के पौधें जब ऊपर बढ़ते हैं तो उन्हें सहारे की जरूरत होती है. इसलिए हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए. कीवी की खेती काफी फायदेमंद होती है. क्योंकि इसमें एक बार निवेश करना पड़ता है. जबकि आने वाले चार-पाँच सालों में ही इसमें फल आने लगते हैं और मुनाफा भी अच्छा होता है. एक कीवी के पेड़ से औसतन 40 से 50 किलो कीवी फल मिलते हैं. जबकि अगर इसकी बेहतर तरीके से देखभाल की जाए तो ये और भी बढ़ सकता है.

Kiwi Farming

इसके अलावा भवान सिंह बताते हैं कि, “कीवी की खेती में पोलीनेशन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. यानि कि, अगर प्राकृतिक तरीके से मादा फूलों पर नर फूलों के परागकण नहीं पहुचंते हैं तो, हम खुद यह काम करते हैं. ऐसा करने से उपज बेहतर होती है.”

साथ ही बाजार में भी कीवी के फलों की ब्रिकी आकार के हिसाब से की जाती है. बड़े ग्रेडिंग वाले कीवी फल 150 रुपए प्रति किलो और छोटे आकार के कीवी फल 100 रुपए प्रति किलो तक बिक जाते हैं. इसके अलावा जो सबसे छोटे आकार के कीवी फल होते हैं, उन्हें प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में इस्तेमाल किया जाता है. जहां ये औसतन 40-50 रुपए प्रतिकिलो में बिक जाते हैं.

आज भवान सिंह अपनी कीवी की खेती से सालाना 100-115 क्विटंल तक की उपज ले रहे हैं. जिससे वो हर साल लगभग 10 लाख तक की कमाई कर रहे हैं. हालांकि किसी साल ओले गिरने की वजह से फसल खराब हो जाती है. जिसके चलते मुनाफा थोड़ा कम हो जाता है.

भवान सिंह का मानना है कि, जिस समय मैं रिटायर हुआ था. मैं भी अन्य लोगों की तरह आसाम से जिंदगी काट सकता है. हालांकि मैंने खेती चुनी. क्योंकि खाली बैठना किसी सजा से कम नहीं है. आज मुझसे सीखकर मेरे गाँव के लोग भी कीवी की खेती (kiwi farming) करने की ओर अग्रसर है. यही वजह है कि, पौधों की मांग बढ़ गई है. जिसके चलते मैंने नर्सरी भी तैयार करनी शुरू कर दी है.

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