Prerna Verma जिन्होंने लेदर की डोरियों से बुनकर दी सपनों को उड़ान

हम में से हर इंसान सपने देखता है आप मैं और शायद हर कोई और अपने इन्ही सपनों को पूरा करने के लिए जब भी हम कोशिश करते हैं तो शुरुवात में एक अजीब सी घबराहट और बेचैनी होती कि ये काम हम कैसे करेंगे क्या हम इसमें सफल हो पाएंगे या फिर नहीं। अगर गलती से हमारे काम में शुरुवात में ही हमे असफ़लता मिल जाए तो हम बिलकुल निराश हो जाते हैं और कुछ लोग तो उस काम को बीच में ही छोड़ देते हैं। फिर हम किसी दूसरे काम की तरफ भागते हैं या डेप्रेशन में जाकर कोई काम कर ही नहीं पाते हैं। मगर यही तो वो गलती है जो हम कर जाते हैं क्योंकि अगर हमे सफल होना है और आगे बढ़ना है तो हमारे अंदर की हिम्मत और जूनून बिलकुल भी कम नहीं होना चाहिए। आज मैं आपको एक ऐसी ही सफलता की कहानी सुनाने जा रही हूँ जिससे आप ना सिर्फ आप आशावादी बनेंगे बल्कि आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलेगी। जिद हो, जुनून हो और जज्बा हो तो कोई छोटी उम्र में भी बड़ी सफलता पा सकता है। कानपुर में रहने वाली प्रेरणा भी वास्तव में दूसरों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। प्रेरणा ने अपनी इनोवेटिव सोंच से न सिर्फ फर्श से अर्श तक सफर तय किया, बल्कि कई नेशनल अवार्ड भी अपने नाम किए। मगर ये मुक़ाम उन्होंने आसानी से हासिल नहीं किया बल्कि उन्होंने भी बुरा वक़्त देखा तमाम बड़ी कठिनाइयों का हिम्मत से सामना किया और आज 12 साल पहले घर के एक कमरे से लेदर कार्ड का काम शुरू करने वाली प्रेरणा अब दुनिया के करीब 22 देशों में अपने प्रोडक्ट का बिजनेस करती हैं।

Prerna Verma ने समाज के तानों की परवाह किए बिना शुरू किया बिज़नेस

प्रेरणा और लड़कियों की तरह पढ़ना चाहती थी मगर मजबूरी ने उन्हें पढ़ाई करने की छोटी सी उम्र में नौकरी करने के लिए मजबूर कर दिया। पिता का होना हर बच्चे के लिए कितना जरुरी होता है मगर उनके पिता की मौत हो गई और फिर पिता के न होने पर मां ने ही उन्हें संभाला। प्रेरणा सिर्फ हाईस्कूल में ही थीं जब उन्हें नौकरी करनी पड़ी। पहले स्कूल जाना, फिर ट्यूशन पढ़ाना और फिर नौकरी पर भी जाना। कुछ इस तरह प्रेरणा का बचपन बीता। साल 2004 में किसी के साथ पार्टनरशिप करके लेदर की डोरी के बिजनेस की शुरुआत की। लेकिन कुछ ही दिनों में खुद को ठगा महसूस किया। फिर जिद की कि अब अपना काम करना है और लोगों को दिखाना है कि हां मैं न सिर्फ खुद के दम पर कुछ करके दिखा सकती हूं, बल्कि लोगों को भी प्रेरणा दे सकती हूं। मगर उनके इस काम में सबसे पहले तो उनके पड़ोसियों और समाज ने ही उन्हें ताने दिए। क्योंकि आज भी हमारा समाज लड़कियों का नौकरी करना तो हजम कर लेता है मगर लड़किया बिजनेस करे वो भी अकेले ये बात किसी के आज भी गले नहीं उतरती। मगर प्रेरणा ने सबकुछ अनदेखा करते हुए

Prerna Verma

Prerna Verma का शुरूआती सफ़र नहीं था आसान

इसके बाद कानपुर में जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर कौशलपुरी गुमटी में अपने ही घर के एक कमरे से ही प्रेरणा ने कुल 3000 की जमा पूंजी के साथ लेदर का काम शुरू किया। वैसे तो लेदर इंडस्ट्री बहुत बड़ी है, लेकिन प्रेरणा ने यहां अपनी इनोवेटिव सोच का सहारा लिया। लेदर जूलरी और एक्सपोर्ट आइटम के लिए लेदर कार्ड बनाने का काम वो भी हाथ की कारीगरी के साथ शुरू किया। सतह में लेदर के फीते बनाने की शुरुआत भी की। जिसके बाद एक कमरे से हुई इस काम की शुरुवात आज ‘क्रिएटिव इण्डिया’ फैक्ट्री तक पहुंच गया है। आज उनकी फैक्ट्री में लेदर की डोरी, कॉटन की डोरी, लेदर बैग्स, लेदर हैंडीक्राफ्ट जैसी तमाम चीजें बनती हैं। यहाँ के प्रोडक्ट की मांग 20 से 25 अलग-अलग देशों में होती है।

कड़ी मेहनत और विश्वास के साथ प्रेरणा इस कदर आगे बढ़ती रहीं कि फिर पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। एक कमरे से शुरू हुआ बिजनेस अब फैक्ट्री तक पहुंच चुका है। तीन हजार से शुरू हुआ बिजनेस आज करोड़ के टर्नओवर को पार कर गया।

वैसे तो प्रेरणा ने सफलता के कई आयाम छुए। उन्हें दर्जनों अवार्ड भी मिले। लेकिन सबसे खास बात ये है कि उन्हें पांच बार नेशनल लेवल पर अवार्ड मिला। 2015, 2016, 2017 तीन साल उन्हें लगातार इनवोशन कैटेगरी में नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा भी नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल और स्टेट गवर्नमेंट भी उन्हें अवार्ड से सम्मानित कर चुकी है।

प्रेरणा के प्रोडक्ट की डिमांड ज्यादातर विदेशों में ही है। प्रेरणा करीब 80 परसेंट प्रोडक्शन विदेश में सप्लाई करती हैं। उनके प्रोडक्ट की डिमांड अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, पोलेंड, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका समेत करीब 22 देशों में है। मतलब ये कि एक छोटे से कमरे से सुरु किया बिजनेस आज विदेशों तक पहुँच गया है। जब प्रेरणा अपनी मेहनत से इस मुक़ाम तक पहुँच सकती हैं तो आप और हम क्यों नहीं ?

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