MBA गौतम ने बदली अपने गाँव की सूरत, हर साल बचाते हैं 25 लाख लीटर पानी

पानी…कहने में ये शब्द ही है. हालांकि इसके असल अस्तित्व के बिना जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती. वजह शायद हम सबको मालूम है. अनेकों संस्थाओं से लेकर, अनेकों लोग पानी बचाने की भरकस कोशिशें कर रहे हैं. और दूसरी ओर करोड़ों लोग बिना सोचे समझे हर रोज़ सैकड़ो-हज़ारों लीटर पानी यूँ ही बर्बाद कर रहे हैं. ऐसे में शहरों का जलस्तर जहां धरातल में सैकड़ों फिट नीचे चला गया है तो, अगर कहीं बचा भी है तो वो पीने योग्य नहीं है. एक ओर जहां पानी की किल्लत हर गर्मी में अनेकों गांव, शहर झेलते हैं. वहीं उन्हीं गांवों में कुछ ऐसे लोग भी पनपते हैं. जो उनके मसीहा बनते हैं. जो उन्हें पानी की किल्लत से लड़ना भी सिखाते हैं. साथ ही पानी की एक-एक बूंद कितनी कीमती है. उसका अर्थ सबको समझाते हैं.

इस कड़ी में कई लोगों ने ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ (वर्षा जल संचयन) करने की भी शुरूवात की है. जिससे अनेकों लोगों को पानी की समस्या से कहीं न कहीं निजात मिल सकी है. रेन वाटर हार्वेस्टिंग के तहत सूखाग्रस्त इलाकों से लेकर बारिश वाले इलाके में भी लोग पानी को संरक्षित करते हैं. बादलों से होने वाली बारिश को संचय करते हैं. फिर उसी पानी से अपना पूरा काम करते हैं. इसकी अनूठी मिसाल पेश की है. हरियाणा की ‘भिडूकी ग्राम पंचायत’ ने.

आज इस ग्राम पंचायत पानी बचाने की वो कला सीख गया है. जो अभी भी कई सूखाग्रस्त इलाके तक नहीं सीखे हैं. जिसका श्रेय जाता है गाँव के सरपंच सत्यदेव गौतम को, पलवल जिले के भिडूकी गाँव में आज एक नहीं बल्कि चार अलग-अलग जगहों पर ‘रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम’ बनाए गए हैं. जहां से बारिश का पानी संचय होता है. और लोगों की पानी की समस्या दूर होती है.

इसलिए पड़ी रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम की जरूरत

rain harvesting system

18 हजार आबादी वाले इस गाँव में, एक समय तक बारिश के मौसम में सभी लोग परेशान रहते थे. जिसकी वजह थी पूरे गांव में पानी की निकासी न होना. बारिश के समय में हर तरफ पानी भर जाता था. गाँव का सरकारी स्कूल भी पानी के चारों ओर घिर जाता था. जिससे न तो बच्चे स्कूल जा पाते थे न ही अध्यापक बच्चों को पढ़ा पाते थे. यही वजह थी कि, सत्यदेव गौतम के मन में पूरे गाँव में ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ बनवाने का विचार आया.

सत्यदेव कहते हैं कि, “इसका विचार मुझे स्कूल से ही आया. एक बार जब मैं दौरे पर था. उस समय गाँव के अध्यापक ने मुझे इसे परेशानी से निजात दिलाने की बात कही. उसके बाद मैंने भी सोचा कि, ग्राम पंचायत होने के चलते मुझे इस पर कुछ करना चाहिए. ऐसे में स्कूल को तो बदला नहीं जा सकता था.”

गुरुग्राम की एक कंपनी में काम कर चुके सत्यदेव गौतम बीटेक और एमबीए हैं. गौतम जिस कंपनी में काम करते थे. उस कंपनी में भी पानी की समस्या रहती थी, जिसे हल करने की खातिर कंपनी ने ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ लगवाया था. ऐसे में गौतम कहते हैं कि, “मुझे कंपनी में काम करने के दौरान इतना समझ आ गया था कि, जल-भराव की समस्या से निपटा जा सकता है. लेकिन तकनीक को और बेहतर समझने की खातिर मैं उस कंपनी में गया. वहाँ जाकर मैं इसकी बारीकियां समझी और अपने गाँव वापस लौटकर मैंने सबसे पहले स्कूल में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम शुरू करवाया.”

इस दौरान गौतम ने स्कूल की छत से लेकर आस पास की सड़कों, जल भराव वाली जगहों को एक-दूसरे से जोड़ा. फिर एक हिस्से में आठ फिट चौड़ी और दस फिट लंबी अंडर ग्राउंड टंकियों को निर्माण करवाया. इसी तरह दो और टंकियां बनवाई. तीनों को एक दूसरे से जोड़ दिया. अब बारिश का पानी दो टंकियों में फिल्टर होता है. जबकि तीसरी टंकी जिसमें 120 मीटर गहरा बोरवेल बनवाया हुआ है. उसके जरिए पानी जमीन के नीचे चला जाता है.

rain harvesting system

जिसके जरिए स्कूल जल-भराव की समस्या पूरी तरह से खत्म हो चुकी है. इसके आगे गौतम बताते हैं कि, “हमने महज़ स्कूल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर एक साल के अंदर 11 लाख लीटर से ज्यादा बारिश का पानी बचाया है. यही वजह रही कि, मैंने गाँव के अन्य हिस्सों में भी इसे लगाने का प्लान तैयार किया. इसके लिए पहले मैंने ये देखा कि, गाँव के किन हिस्सों में जल-भराव की समस्या सबसे ज्यादा है. जिससे मुझे मालूम चला कि, गाँव की वाल्मीकि बस्ती में 40 घर ऐसे हैं. जिनके घर के सामने बारिश के दौरान पानी भर जाता है. लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत होती है. इसलिए हमने तय किया कि, हम यहाँ रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएगें. और हमने कर दिखाया.”

सत्यदेव गौतम की सोच है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

सत्यदेव गौतम की इस सोच की तारीफ करते हुए स्कूल के प्रिंसिपल हरी सिंह कहते हैं कि, “गाँव का स्कूल काफी पुराना हो चुका है. बाकी समय तो ठीक है. हालांकि बारिश के समय में बच्चों से लेकर अध्यापकों तक की मुसीबतें काफी बढ़ जाती थी. लेकिन जब से सिस्टम लगा है. सब बदल गया है. हमारे गाँव की समस्याओं को लेकर ग्राम पंचायत काफी सक्रिय हैं.”

अब तक चार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवा चुके हैं गौतम

वाल्मीकि बस्ती के अलावा, गौतम गाँव के खेल परिसर व उप स्वास्थ्य केंद्र में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवा चुके हैं. इन सभी सिस्टम फिल्टर भी लगाए गए हैं. जिसके चलते गंदा पानी न तो जमीन के अंदर जा पाता है. न ही इससे जमीन का पानी खारा होता है.

rain harvesting system

आज यही वजह है कि, हरियाणा का भिडूकी गाँव हर साल औसतन 25 लाख लीटर बारिश का पानी बचा पा रहा है. साथ ही अपने यहाँ के भूजल स्तर को बढ़ा पाने में अहम भूमिका निभा रहा है.

इन सबके अलावा गौतम ने ग्राम पंचायत रहते गाँव में जोहड़ के लिए आवंटित जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया है. साथ ही इन सबकी साफ-सफाई भी करवा कर तालाब खुदवाया है. ताकि बारिश के पानी को बेहतर तरीके से सहेजा सके. इसके साथ उन्होंने तालाबों को सीवरेज लाइन से भी जोड़ा है. ताकि जरूरत पड़ने पर गाँव के किसान सीवरेज के जरिए अपने खेतों की सिंचाई कर सके.

गौतम बताते हैं कि, गाँव के खेतों में करीब दो किलोमीटर तक हमने कुछ-कुछ दूरी पर दस फीट लंबे और 6 फीट चौड़े गड्ढ़ों का भी निर्भाण करवा रखा है. जिन्हें हमने जोहड़ के सिवरेज पाइप से जोड़ा हुआ है. जिससे जिस किसान को पानी की जरूरत होती है. वो पाइप डाल कर अपने खेत की सिंचाई कर लेता है.

rain harvesting system

आज भिडूकी गाँव में किसानों की खेती के लिए नहर का पानी भी आता है. हालांकि यहां के किसान नहर के पानी के भरोसे नहीं बैठते. इसके बारे में गौतम कहते हैं कि, “रेन वाटर हार्वेस्टिंग एक अनूठा तरीका है, आज पूरे देश को घटते जलस्तर को रोकने की खातिर इसे अपनाना चाहिए. ताकि पानी को बचाया जा सके. साथ ही जलस्तर बेहतर किया जा सके.”

आगे गौतम कहते हैं कि, “आज हमारा गाँव वर्षा जल का संचय कर मिसाल बनने के साथ, अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए भी काम कर रहा है. क्योंकि पानी की कीमत आने वाले समय में क्या होगी सबको मालूम है.”

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