वांगनी रेलवे स्टेशन पर हीरो की तरह एंट्री करके इस शख्स ने बचाई मासूम की जान

कहीं सामने वाले की मदद करने से मेरा तो कोई नुकसान नहीं होगा? या मुसीबत में पड़े उस इंसान को बचाने के चक्कर में मैं खुद तो मुसीबत में नहीं पड़ जाऊंगा… इसी तरह के हजारों ख्याल हर इंसान के मन में आते हैं जब कोई व्यक्ति उनसे मदद के लिए गुहार लगाता है। जबकि, ये कहना गलत नहीं होगा कि, आज भी दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो बिना अपनी परवाह किए, निस्वार्थ भावना के साथ लोगों की मदद के लिए आगे आते हैं। इसी का एक उदाहरण अभी कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र के मुंबई में देखने को मिला है। जहां एक रेलवे कर्मी मयूर सखाराम शेलके ने अपनी जान की परवाह किए बगैर, तेजी से भागकर रेलवे ट्रैक कर गिरे मासूम की जान बचाई।

ये पूरा वाक्य 17 अप्रैल को महाराष्ट्र के वांगनी रेलवे स्टेशन पर घटित हुआ था. घटना का वीडियो रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। जिसे बाद में सेंट्रल रेलवे ने सोशल मीडिया पर जारी करके मयूर सखाराम शेलके की तारीफ की। आपको बता दें कि, पाइंट्समैन मयूर सखाराम शेलके वही शख्स है जिन्होंने अपनी जान पर खेल कर बच्चे की जान को बचाया है। घटना का ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर इतनी तेजी से वायरल हो चुका है कि, हर कोई मयूर की तारीफों में पुल बांधता नज़र आ रहा है।

वांगनी रेलवे स्टेशन
वांगनी रेलवे स्टेशन

हर कोई इस वीडियों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके मयूर की इस जिंदादिली को सलाम कर रहा है। जिनमें केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल का नाम भी शामिल हैं। उन्होंने खुल रेलवे कर्मी मयुर की तारीफ करते हुए ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने ट्विट कर लिखा कि शेलके ने जो किया है उसके लिए कोई भी पुरस्कार कम है। अपनी जान की बाजी लगाते हुए शेलके ने जो साहस दिखाया है। उसके लिए भारत सरकार को शेलके पर गर्व है।

मयूर सखाराम शेलके को एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट दिया इनाम

वहीं एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट की ओर से शेलके की बहादुरी के लिए उन्हें 50 हजार का इनाम दिया है। जबकि, बच्चे की मां संगीता शिरसत का कहना है कि जितना भी धन्यवाद दें वो कम है। अपनी जान की बाजी लगाकर उन्होंने मेरे बेटे की जान बचाई है।

17 अप्रैल की शाम करीब 5 बजकर 3 मिनट पर महाराष्ट्र के मुंबई शहर के वांगनी रेलवे स्टेशन पर एक नेत्रहीन महिला अपने बच्चे के साथ प्लेटफॉर्म नंबर 2 से गुजर रही थी कि अचानक रेलवे ट्रैक की तरफ बढ़ते हुए बच्चे का पैर फिसल गया और वो ट्रैक पर जा गिरा। बच्चे की मां नेत्रहीन होने के चलते कुछ पलों तक समझ नहीं पाई कि ये अचानक क्या हुआ। वो प्लेटफॉर्म पर ही खड़े होकर चिल्लाने लगी। कोई और इस घटना को देखकर कुछ समझ पाता कि इतने में सामने से ट्रेन की सीटी बजती हुई सुनाई दी। सामने से आती हुई ट्रेन और बच्चे के बीच बहुत कम समय की दूरी थी। सोचने समझने का वक्त बिल्कुल नहीं था और इसी बीच रेलवे कर्मचारी मयुर शेलके ट्रेन की पटरियों पर भागते हुए नजर आते है। एक पल के लिए सामने से आती ट्रेन को देखकर मयुर भी घबरा जाते है लेकिन फिर अगले ही पल मयुर ने तेजी से भागकर बच्चे को गोद में उठाकर प्लैटफ़ॉर्म पर चढ़ाया और खुद भी तेजी के साथ प्लैटफॉर्म पर चढ़ गए।

वांगनी रेलवे स्टेशन

इस पूरी घटना को पढ़ने में आपको तकरीबन 1-2 मिनट तो लगे होंगे लेकिन असल में ये पूरी घटना केवल 20-25 सैंकड में ही खत्म हो गई थी। ये पूरा वाक्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं है। मानो जैसे किसी बॉलीवुड फिल्म में जब सब कुछ खत्म सा होता दिखने लगता है और ऑडियंस इस बात के लिए खुदकों मना लेती है कि, बस अब तो हिरोइन का बचना बिल्कुल ही नामुमकिन सा है। तभी अचानक हिरो की एंट्री होती है और सब कुछ ठीक हो जाता है। रेलवे स्टेशन पर घटी इस घटना में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। बस यहां हिरोइन की जगह मासूम बच्चा खतरे में था जिसे बचाने के लिए हिरो बनकर आए रेलवे कर्मी व पाइंट्समैन मयूर सखाराम।

रेलवे मंत्रालय ने भी किया मयूर सखाराम शेलके को सम्मानित

इस पूरे वाक्य के बाद सोमवार को जब मयुर अपने दफ्तर पहुंचे तो उन्हें वहां मौजूद उनके साथ काम करते हुए नहीं बल्कि, लाइन में खड़े होकर उनके लिए तालियां बजाते नजर आए। तालियों की जोरदार आवाज़ और तारीफों के साथ मयुर का अगले दिन दफ्तर में स्वागत किया गया। इस मौके पर रेलवे के कुछ वरिष्ठ अधिकारी और मीडिया भी पहुंची जो खासतौर पर मयुर के इस नेक काम के लिए उनकी सराहना करने पहुंची थी।

गौरतलब है कि आज के वक्त में अगर दूसरा व्यक्ति मयुर की तरह साहस और बहादूरी के साथ दूसरों की मदद करने लगे तो शायद ही इस दुनिया में कोई घटना या क्राइम भी अपने अंजाम तक पहुंच पाएंगे। इसी तरह प्रेरणादायी और नेक काम करने वाले लोगों की अच्छी कहानियां पढ़ने के लिए आप दी इंडियननेस की वेबसाइट पर वीजिट जरूर करें। 

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