Mata Hari ख़ूबसूरत मगर खूंखार जासूस, जिसने ली हज़ारों की जान

जासूसों के किस्से कहानियां तो आप सभी ने देखे और सुने होंगे। जेम्स बॉण्ड जैसी कई फिल्में भी आपने देखी ही होंगी, जिनमें जासूसों को हीरो की तरह दिखाया जाता है। मगर आजतक कभी कोई किस्सा या फिल्म किसी महिला जासूस के ऊपर नहीं दिखाई गई। लेकिन हम आपको एक महिला जासूस के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी कहानी असली है मगर हां वो कम फ़िल्मी नहीं है। एक ऐसी महिला जासूस जो अपने डांस और अपने दिमाग दोनों से वार करने के लिए महशूहर थी। कहते हैं कि इस महिला जासूस के अंदर ऐसा हुनर था कि वो किसी भी मर्द के दिल की बात पलक झपकते ही जान लेती थी। तभी तो उसके हुनर से बड़े से बड़ा अधिकारी भी ख़ुद को नहीं बचा पाता था। यहां तक कि उसके इस हुनर से बड़े से बड़ा अधिकारी भी खुद को नहीं बचा पाता था।

Mata Hari अपने कामुक डांस से अफसरों को फंसाया करती थी।

1876 को नीदरलैंड में जन्मीं ‘माता हारी’ का असली नाम मार्गेटा गीरत्रुइदा मैकलियोड था जो बला की खूबसूरत थीं। उन्हें सजने सवरने का बड़ा शौक था वो पूरी दुनिया घूमना चाहती थीं। मगर वो ऐसा कुछ कर उससे पहले ही महज 18 साल की उम्र में उन्होंने एक दोगुनी उम्र के डच अधिकारी से शादी कर ली जो एक नंबर का अय्याश था। वो हर रोज शराब पीकर आता और माता हारी को पीटता। कई सालों तक माता हारी ये सब झेलती रहीं लेकिन एक दिन माता हारी से जब नहीं सहन हुआ, तो उन्होंने अपने पति को हमेशा के लिए छोड़ दिया। माता-हारी ने अपने पति को छोड़ जरूर दिया था, लेकिन अब वो एक पैसेवाले डच अधिकारी की पत्नी नहीं थी तो उनके सामने सबसे बड़ी समस्या थी कि अब वो अपना खर्चा कैसे चलाएंगी। लेकिन ऐसे ही वो बाकि लड़कियों से अलग नहीं थीं कुछ तो खास बात उनमें थी ही। आखिर एक डांसर के रूप में उसने नए सिरे से अपनी जिंदगी को शुरु किया और देखते ही देखते बेहद कम समय में वो जल्द ही अपने हुनर से लोगों के दिलों में बस गईं। वो शुरुआत से ही माता हारी के नाम से नहीं जानी जाती थीं। कहते हैं कि जब वो डांस सीख रही थी, तो एक पुजारी ने उसे देखा और माता हारी नाम दिया।

Mata Hari ने जर्मनी और फ़्रांस दोनों देशों के लिए की जासूसी

प्रथम विश्व युद्ध के आस पास माता हारी का नाम काफ़ी फेमस हो चुका था। जिस जगह पर वो डांस किया करती थी, वहां उन्होंने सभी मर्दों को अपना दीवाना बना दिया था। हर कोई बस एक बार माता हारी को छू लेना चाहता था। अक्सर ऊंचे पदों पर बैठे मर्द उनके पास आया करते थे। हर कोई उनकी अदा में मानों मदहोश रहता था। शुरुआत में माता हारी की ये कला महज उनका रोजगार था, मगर थोड़े ही समय बाद वो उनका हथियार बन गई। माता हरी डांस, सेक्स और सीक्रेट डीलिंग का खेल खेलने लगीं।

माता हारी का डांस लोगों के लिए कितना मादक रहा होगा, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी डिमांड यूरोप तक में होने लगी थी। वो वहां कई जगहों पर अपने डांस शो के लिए जाने लगी थी। उनके डान्स शो को दौरान आलम कुछ यूं होता था कि रूस से लेकर फ्रांस तक डांस हॉल और ओपेरा हाउस दर्शकों से खचाखच भरे रहते थे। क्योंकि कई बार माता हारी डांस करते हुए अपने बदन से सारे कपड़े उतार दिया करती थी। इसलिए अक्सर मर्द उसे देखने के लिए दीवाने हुए रहते थे। देखते ही देखते बड़े बड़े अफ़सर माता हारी के लिए दीवाने होने लगे। इसी दौरान फ्रांस सरकार ने माता हरी को जासूसी करने के लिए राजी कर लिया। इसके बदले में उसे अच्छी खासी रकम दी गई। अपने अश्लील डांस और नंगे बदन का फायदा उठाकर माता हारी सैन्य अधिकारियों से खुफिया जानकारियां निकलवाने लगीं। अक्सर वो बड़े अफसरों के साथ रातें गुजारने लगीं। लेकिन, माता हरी की पैसों की भूख बहुत बढ़ चुकी थी। उसने फ्रांस सरकार की भी जानकारी जर्मनी सरकार को देनी शुरू कर दिया। इस तरह वो अधिकारियों से जानकरी इकठ्ठा करती थी और फिर उन्हें बेच दिया करती थी। धीरे धीरे ही सही मगर माता हारी एक खतरनाक जासूस बन चुकी थी। इसका फायदा उठाते हुए उसकी पूरी दुनिया घूमने की जो हसरत पहले पूरी न हुई उसे वो अब पूरा होते देखना चाहती थी। मगर ये कोई जानता नहीं था कि वो आखिर जासूसी किसके लिए करती थी।

मगर फ्रांस के खूफिया डिपार्टमेंट को एक दिन माता हारी पर शक़ हो गया। सन् 1917 में फ्रांस में माता हरी को अरेस्ट किया गया। इस दौरान माता हरी ने खुद को फ्रांसीसी जासूस के तौर पर पेश किया, लेकिन उनका झूठ पकड़ा गया। फ्रांसीसी सेना ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड से जर्मनी की राजधानी बर्लिन भेजे जा रहे उन संदेशों को पकड़ा, जिसमें कहा गया था कि उन्हें एच-21 से सटीक जानकारियां मिल रही हैं। वहीं दूसरी ओर उस पर ये भी इल्जाम लगने लगे कि वो जर्मनी के राज़ फ़्रांस को बताती है। इस तरह माता हारी पर हर किसी को शक होने लगा था। जर्मन और फ़्रांस सब उसके दुश्मन बन गए थे। दोनों को ही लगने लगा कि जंग में जो उनका नुक्सान हो रहा है उसका कारण माता हारी है। आखिर में फ़्रांस की सेना ने माता हारी को पकड़ ही लिया। इसके बाद फ्रांसीसी सेना ने उन्हें पेरिस में 13 फरवरी, 1917 को उनके होटल रूम से अरेस्ट कर लिया गया।

उस पर इल्जाम थे कि उसने सेना की जरूरी जानकारियों को बाकी देशों से साझा किया है। इसके बाद उन्हें 50 हजार लोगों के मौत का जिम्मेदार ठहराया गया। माता हारी ने ख़ुद तो किसी को नहीं मारा, लेकिन उनकी जासूसी ने लगभग 50 हज़ार फ्रांसिसी सैनिकों को मौत के घाट उतारा। जिसके बाद माता हारी को सीधे मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने सजा से पहले माता हारी को अपनी आंख पर बांधने के लिए एक सफेद कपड़ा दिया, लेकिन उन्होंने उसे बांधने से मना कर दिया। वो सबसे इतनी अलग थीं कि मौत से डरने की बजाय अधिकारियों के गोली चलाने से पहले माता हारी ने उन्हें एक फ्लाइंग किस दिया। जिसके बादकमांडर ने अपनी तलवार को नीचे की ओर लहराया और गोलियों की तेज आवाज के साथ माता हारी जमीन पर गिर पड़ीं। थोड़ी देर बाद एक अधिकारी ने अपनी रिवॉल्वर से उनकी खोपड़ी पर गोली चलाई और इसके साथ ही माता हारी की ख़ूबसूरती बदसूरत सी मौत में बदल गई। मौत के बाद माता हारी के शरीर को लेने कोई नहीं आया क्योंकि माता हारी ने ज़िंदगी भर बस मतलब के रिश्ते ही बनाए थे। उसका कोई अपना नहीं था। इस वजह से वो एक गुमनाम लाश बनकर रह गई थी। वैसे भी इस तरफ या उस तरफ में से जिसने भी उनसे पीछा छुटाना चाहा आसानी से छुड़ा ही लिया। इसलिए माता हरी के मरने के बाद भी ये साफ नहीं हो सका कि वो किस देश के लिए जासूसी कर रही थी। माता हरि को आज भी ‘फेमिनिन सिडक्शन’ और देश को धोखा देने वाली महिला की तरह देखा जाता है। सच तो ये है कि दुनिया कभी जान ही नहीं पाई कि वो फ्रेंच जासूस थी, या जर्मन। इस तरह उनकी मौत और उनकी जासूसी दोनों ही रहस्य बन कर रह गईं।

देखे माता हारी की पूरी कहानी

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