पुरानी बुलेट से बनाया एक लाख का ट्रैक्टर, बना सैकड़ों किसानों की पहचान

महाराष्ट्र का लातूर जिला, जो अक्सर पानी की समस्या से बेहाल रहा है. यहां से आई खबरें हर वक्त वहां पानी की किल्लतों को दिखाती रहती हैं. जिसके चलते यहां के किसान अपने जानवर तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं. वजह है, पानी की समस्या. ऐसे में किसानों की जुताई, बोवाई के लिए समस्या खड़ी हो जाती है.

साल 2015 में जिले में पड़े सूखे के बाद से, यहां पानी की विकराल समस्या हर साल खड़ी हो जाती है. जिसके चलते अनेकों किसानों ने जहां जानवरों को रखना छोड़ दिया. वहीं इसी जिले के निलंगा इलाके में रहने वाले मकबूल शेख ने भी अपने बैल बेंच दिए. ताकि पानी की किल्लत से बच सकें.

बैल बेचने के बाद उनके सामने उनकी खेती की समस्या पैदा हो गई. जिससे न तो समय पर वो, अपने खेतों की जुताई कर पा रहे थे न ही, बुवाई कर पा रहे थे. वजह थी, उनके पास बैल न होने की. ऐसे में मकबूल शेख ने ऐसा समाधान ढूंढा, जो आज उनकी ही नहीं, बल्कि सैकड़ों किसानों की परेशानियां हल कर रहा है.

वो चीज है बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor). आज हमारे बाजार में अगर कोई इंसान ट्रैक्टर लेने जाए तो, उसे लाखों की कीमत चुकानी पड़ती है. ऐसे में जहां एक ओर मकबूल शेख पानी की समस्या से जूझ रहे थे. वहीं उन्हें अपने बैल बेचने पड़े ताकि, जो पानी उनके पास है. उसे घर में इस्तेमाल कर सकें. लेकिन पेशे से खेती करने वाले मकबूल खेती भी नहीं छोड़ सकते थे.यही वजह थी कि, उन्होंने सस्ते दाम का जुगाडु आविष्कार बुलेट ट्रैक्टर बना ड़ाला.

अब तक ये जुगाडु बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor) जहां उनके इलाके में 140 किसान खरीद चुके हैं. वहीं मकबूल के इस आविष्कार को देखते हुए राज्य सरकार ने भी उन्हें सम्मानित किया है.

ऐसे शुरू हुआ बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor) जुगाड़

बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor)

मकबूल कहते हैं कि,

“उन्होंने जो बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor) बनाया है. उसकी प्ररेणा उन्हें उन्हीं के बड़े भाई से मिली है. क्योंकि बड़े भईया की ट्रैक्टर वर्कशॉप, ‘एग्रो वन ट्रेलर्स ऐंड मंसूरभाई ट्रैक्टर्स’ है. जिसमें वो मकैनिक के तौर पर काम करते हैं. साथ ही ट्रैक्टर की मरम्मत और रख रखाव का काम भी करते हैं. हालांकि कुछ साल पहले भईया का देहांत हो गया और तब से लेकर अब तक मैं ही अपनी खेती और उनकी वर्कशॉप संभालता हूँ.”

इसके आगे मकबूल कहते हैं कि, “साल 2015 में पड़े सूखे के बाद. जब साल 2016 आया तो मैंने अपने बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor) मॉडल पर काम करना शुरू किया. इस मॉडल में मैंने हमारी वर्कशॉप में पड़े पुराने इंजन को इस्तेमाल किया. मैंने पहले ही सोचा था कि, मैं एक ऐसा ट्रैक्टर बनाउंगा. जोकि आकार में छोटा हो. हाँ मगर उसके जरिए आसानी से खेती की जा सके. अपने भाई की वर्कशॉप में बचपन से काम करते मुझे इतना तो मालूम हो ही गया है. मुझे ट्रैक्टर बनाने की सभी तकनीकें मालूम हैं. यही वजह थी कि, मैंने तीन पहियों वाला, 10 एचपी इंजन का ट्रैक्टर बनाने की फैसला लिया. जिसके लिए मैंने हमारे यहां पड़ी एक पुरानी बुलेट मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया.”

मकबूल को अपना पहला बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor) बनाने में लगभग दो साल का वक्त लगा. इस ट्रैक्टर पर उन्होंने लगभग 100 बार काम किया. अनेकों बार ऐसा हुआ कि, सब कुछ तैयार होने के बाद भी मोटर साइकिल के कल-पुर्जे (पार्ट्स) ठीक से काम नहीं करते थे. साथ ही इस ट्रैक्टर को मकबूल इस तरह बनाना चाहते थे. जिसमें तेल की कम खपत कम हो. यही वजह थी कि, उन्हें इतना वक्त लग गया.

इसके बाद जब ट्रैक्टर बनकर तैयार हुआ तो, उन्होंने उसका परीक्षण किया और बेहतर रिजल्ट देखकर उन्होंने कुछ ही दिनों में पाँच और ट्रैक्टर बना ड़ाले. जिन्हें मकबूल ने किसानों को दे दिया. ताकि वो उसे ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल कर सकें.

खुद के बनाए ट्रैक्टर बेचने लगे मकबूल शेख

ट्रायल के बाद मकबूल ने अपना पहला फाइनल ट्रैक्टर साल 2018 में पूरा किया. साथ ही इस ट्रैक्टर के जरिए किसान बुवाई, निराई, छंटाई के साथ कीटनाशकों का भी छिड़काव कर सकते हैं. यही वजह रही कि, जल्द ही मकबूल अपने यहां के किसानों की पंसद बन गए.

मकबूल कहते हैं कि-

“आज जब हम किसी भी सामान्य ट्रैक्टर को बाज़ार से खरीदने जाते हैं तो, उसकी कीमत कम से कम छह लाख होती है. जबकि उसके सभी उपकरण लेने में भी हमें उससे कहीं ज्यादा खर्च करना पड़ जाता है. लेकिन मेरे बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor) की कीमत महज़ एक लाख पड़ती है. जबकि इससे छोटा मॉडल भी मैं अब तैयार करता हूँ. जिसकी लागत 60 हजार रूपये तक होती है.”

बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor) के फायदे

बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor)

साल 2018 के बाद से अब तक लगभग 140 किसान मकबूल से बुलेट ट्रैक्टर खरीद चुके हैं. बुलेट ट्रैक्टर इस्तेमाल करने वाले एक किसान सुधीर कपलापुरे की मानें तो, “मैं आज बुलेट ट्रैक्टर की मदद से ही अपने 20 एकड़ खेतों पर खेती करता हूँ. इसकी मदद से सभी काम बेहतर तरीके से हो जाते हैं. जबकि मुझे न तो अब किसी बैल की जरूरत पड़ती है और न ही किसी मंहगे ट्रैक्टर की जरूरत मुझे लगती है. इस ट्रैक्टर की मदद से खेत के हर कोने की बुवाई, जुताई आसानी से हो जाती है. जबकि बड़े ट्रैक्टर छोटे खेतों में ठीक से घूम भी नहीं पाते. यह ट्रैक्टर सबसे बेहतर फायदा गन्ने के खेत में दवा छिड़काव में देता है. क्योंकि ये ट्रैक्टर पतली क्यारियों में भी आसानी से चल सकता है. यही वजह है कि, बुलेट ट्रैक्टर (Bullet Tractor) मेरे लिए काफी उपयोगी है.”

जुगाडु आविष्कारक मकबूल तीन पहियों के अलावा चार पहिये वाला भी टैक्टर बनाया है. जोकि इससे भी छोटा ट्रैक्टर है. इस ट्रैक्टर की कीमत लगभग 60 हजार रुपये है. इस ट्रैक्टर को उन्होंने उन किसानों के लिए बनाया है. जो किसान एक लाख रुपये नहीं खर्च कर सकते. वो ये ट्रैक्टर ले सकें.

यही वजह है कि, मकबूल के इन जुगाडु आविष्कारों के चलते जहां आज लातूर जैसे जिले में किसानों की जिंदगी संवर रही है. वहीं महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें ‘कृषि रत्न अवॉर्ड’ से सम्मानित किया है.

इसको लेकर मकबूल कहते हैं कि, “आज मुझे खुशी होती है कि, मेरी मेहनत अनेकों किसानों के लिए किफायती बन रही है. मैं ये सोचकर खुश हो जाता हूँ कि, मैं अनेकों किसानों की जिंदगी में बदलाव ला पा रहा हूँ. मैं इसी तरह आविष्कार करता रहूंगा और कुछ न कुछ बेहतर किसानों के लिए बनाता रहूंगा.”

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