सरकारी स्कूल को बदल डिजिटल स्कूल बनाने वाली शिक्षिका ममता

आज पूरी दुनिया डिजिटल होने को है. भारत भी उसी होड़ में लगा हुआ है. क्या शहर, क्या गाँव हर तरफ डिजिटल ज़माने की बात हो रही है. न जानें कितने ऐसे लोग हैं जो डिजिटलाईजेशन के दम पर आज अपनी अलग पहचान बना चुके हैं तो ऐसे भी न जाने कितने लोग हैं जो अनेकों लोगों के लिए मिसाल बन चुके हैं. उन्हीं नामों में से एक नाम है Mamta Mishra का…

वो कहते हैं न कि, एक बच्चा जब स्कूल में जाने की शुरुवात करता है तो भले ही उसे क्या बनना है क्या नहीं मालूम न हो, लेकिन स्कूल में मौजूद शिक्षक-शिक्षिका उसको इस काबिल बना देते हैं कि वो किसी भी मंजिल को अपने दम पर तय कर सकता है. ममता मिश्रा भी यही काम करती हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के विकासखंड चाका की रहने वाली Mamta Mishra पेशे से अध्यापिका हैं.

आज उनके पढ़ाने का सबसे अलग ढंग और तरीका ही है कि, वो लोगों के बीच स्टार अध्यापिका बन गई हैं. Mamta Mishra की चर्चा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात में कर चुके हैं. साथ ही उन्हें लैटर तक लिख चुके हैं.  उनके पढ़ाने का तरीका ही वजह है कि, आज के समय में वो सोशल मीडिया स्टार बन चुकी हैं.

Mamta Mishra ने सबसे पहले लोगों को समझाई पढ़ाई की अहमियत

आज अपने दम पर ममता ने जहाँ सरकारी स्कूल की कायापलट दी है. साथ ही उनका सरकारी स्कूल आज किसी भी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं है. इसकी खास बात ये है कि, यहाँ पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे फर्स्ट क्लास हैं. जिसका सारा श्रेय ममता को जाता है. अपनी काबिलियत के ही दम पर जहाँ ममता ने सरकारी स्कूल को प्राइवेट स्कूल की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है. वहीं उन्होंने अपने स्कूल में सभी सुविधाऐं तक बच्चों को मुहैया कराई हुई है. साथ जब से लॉकडाउन चल रहा है. ऐसे में ममता अपने बच्चों से जुड़ी रहने के लिए सोशल मीडिया का ही सहारा लेती हैं.

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अपनी जिंदगी के बारे में ममता कहती हैं कि, “मेरी शुरुआती शिक्षा एक केंद्रीय विद्यालय कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज से शुरु हुई. कानपुर से ही मैं ग्रेजुएट हुई. जिसके बाद बी. एड. फिर परास्नातक किया. ममता की माँ भी एक शिक्षिका हैं. Mamta Mishra कहती हैं कि, मैंने हमेशा से अपनी माँ को परिश्रम, ईमानदारी और निष्ठा के साथ बच्चों को पढ़ाते देखा है. यही वजह थी कि, मैंने हमेशा से अपनी माँ को अपना रोल मॉडल माना है. यहीं से मैंने एक शिक्षिका का सपना देखना शुरु किया था और आज मैं उन्हीं की बदौलत यहाँ हूँ.”

ममता बताती हैं कि, “जिस समय में एक अध्यापिका के तौर पर नियुक्त हुई थी. उस समय मेरी सबसे बड़ी चुनौती बस ये थी की जो लोग सरकारी विद्यालय को गंभीरता से नहीं लेते उन्हें फिर से इस विचारधारा से अलग करना, साथ ही लोगों को सरकारी स्कूलों में रीजनल भाषा के साथ पढ़ाई को गंभीरता से न लेने की थी.”

जिसकी मुख्य वजह ये थी की अधिकतर बच्चे गरीब घर से थे. यही एक वज़ह थी की उन बच्चों को पहले घर का काम करना पड़ता था. उसके बाद फिर स्कूल आने की उन्हें मोहलत मिल पाती थी. यही वजह रही कि, ममता ने सबसे पहले बच्चों के परिजनों को शिक्षा की अहमियत समझाने की पहल की. ताकि उन्हें जागरुक किया जा सके.

Mamta Mishra ने खुद अपनी सैलरी से जुटाई सारी सुविधाएं

इसके अलावा Mamta Mishra ने अपने स्कूल में पढ़ाई की शुरुवात के साथ बच्चों के लिए अलग-अलग तरह के स्पोर्ट्स व एक्स्ट्रा कैरिकुलर एक्टिविटी की शुरुआत की. जिसके लिए उन्होंन स्मार्ट क्लासेज की भी सहारा लिया. बच्चों के लिए चाहे डेस्क का बंदोबस्त करने की बात हो या फिर मोबाइल, टेबलेट सब कुछ उन्होंने अपनी सैलरी से खरीदी और बच्चों को पढ़ाने की शुरुवात की.

आज अपनी इन्हीं खास पहल की वज़ह से ममता अपने स्कूल में सबसे बेहतर अध्यापिका होने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी सबसे खास हैं. जहाँ उनके अनेकों फॉलोवर्स हैं. यही वजह है कि, ममता कहती हैं की आज के परिदृश्य की अगर बात करें तो शिक्षा और तकनीक दोनों ही एक दूसरे की पूरक हैं. यही वजह है कि, हमें शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बेहतर से बेहतर करना होगा. ताकि हम डिजिटल इंडिया जैसे सपनों को साकार करने के साथ-साथ बच्चों के भविष्य को बेहतर बना सकें.

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आज सरकारी स्कूल की हकीकत क्या है….इसका पता तो इस बात से चल जाता है कि, प्राइवेट में बच्चों की भीड़ सरकारी के मुकाबले कई गुना में है. ऐसे में ममता मिश्रा की एक छोटी सी कोशिश जहाँ औरों के दिमाग में शिक्षा की अलख जगा रही है. वहीं कितनों के लिए ममता आज मिसाल बन चुकी हैं. शिक्षा को बेहतर करने के लिए आज हमारे समाज में इसी तरह अनेकों ममता की जरूरत हैं जो शिक्षा की रुपरेखा बदल सकें.

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