Lockdown में भी जरूरी है सतर्क रहना, नहीं तो हो जाएंगे संक्रमित

कोरोना वायरस को लेकर देशभर में लॉकडाउन लागू कर दिया गया है। सरकार की ओर से अब इसे लेकर सख्ती भी बरती जा रही है। सरकार ने अब लोगों को साफ चेतावनी दे दी है कि अगर लोग पालन नहीं करेंगे तो सरकार को मजबूरन सख्ती दिखानी होगी। ऐसे में अब सरकार के संग ही हमारा भी यह फर्ज बनता है कि अपने आप को घरों में लॉकडाउन कर ले ताकि कोरोना को फैलने से रोक सकें। लेकिन सिर्फ लॉकडाउन करना ही एक हल नहीं है। लॉकडाउन के संग ही हमें कुछ एहतियात बरतना होगा। घरों में रहने के संग ही हमें बहुत कुछ एहतियात घर के अंदर भी बरतना होगा। इन एहतियातों को अगर हम बरतें तों हम कोरोना वायरस के संक्रमण को खुद के संग ही अपने आस—पास के लोगों में भी फैलने से रोक सकते है।

Lockdown है क्या?

सबसे पहले लॉकडाउन को समझिए कि, आखिर यह है क्या। आसान भाषा में कहें तो लॉकडाउन वह स्थिति है जब लोगों को एक सीमित जगह से बाहर जाने से रोक दिया जाता है। पूरी तरह से लॉकडाउन का मतलब यही है कि, आप जहां पर हैं, वहीं रहें। इसमें आपको किसी बिल्डिंग, इलाके, या राज्य, देश तक सीमित किया जा सकता है। लॉकडाउन के दौरान सामान्य तौर पर जरूरी चीजों की सप्लाइ नहीं रोकी जाती। जैसे किराना स्टोर, मेडिकल से जुड़ी चीजें, बैंक आदि।। हां गैर जरूरी कामों पर रोक होती है। इसमें यातायात के सार्वजनिक साधनों को बंद किया जाता है। लॉकडाउन का पालन नहीं करने पर सरकार सख्त ऐक्शन भी ले सकती है।

अब जब एक वायरस ने महामारी फैला रखी है तो मजबूरन दुनिया के तमाम देशों को अपने नागरिकों को लॉकडाउन करना पड़ रहा है। लेकिन यहां सवाल है कि क्या लॉकडाउन से हम वायरस से बच जाएंगे? चांस 80 प्रतिशत से ज्यादा है अगर कुछ सावधानी बरती जाए तो।

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Lockdown- परिवार में कोई संक्रमित नहीं है तो यह काम करें

अगर आप कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं है, तब भी आपको इस लॉकडाउन के समय में अपने घर के अंदर कुछ एहतियात बरतने की सख्त जरूरत है। घर में आइसोलेट होने के बाद हमारे लिए सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है कि, हम किसी भी तरीके से अपने घर में वायरस को आने से रोकना होगा। दरअसल इस दौरान एक चीज है हमारे लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकती है और वो है ‘फोमाइड्स’। यहां सवाल यह है कि आखिर यह फोमाइड्स है क्या? तो बता दें कि फोमाइड्स ऐसी चीज है जिसमें वायरस पिचक जाता है और जिसके सरफेस पर वह बहुत देर तक जिंदा रह सकता है।

यह फोमाइड्स कोई भी चीज हो सकती है जैसे कि हमारे घर में आनेवाला न्यूज पेपर, दूध की थैली,प्लास्टिक, आपका हैण्डबैग या कोई और चीज़। ऐसे में इन फोमाइड्स से दूर रहे तो अच्छा है। आप चाहें तो अस दौरान न्यूजपेपर  से दूर रह सकते हैं, दूध की थैली है तो उसे पहले सर्फ या साबुन से धो लें ताकि उसपर चिपका वायरस खत्म हो जाए, या कोई अन्य चीज को छूने से पहले उसे सेनिटाइज कर लें। इसके अलावा अपने कमरें को सेनिटाइज करते रहे मतलब साफ—सफाई का ख्याल रखे। वहीं इस दौरान घर के अंदर भी आपस में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखें, हाथ को धोते रहे और अगर बाहर निकलें तो मास्क जरूर पहनें।

प्रेग्नेंट महिलओं और बच्चों का ख्याल रखें

अभी तक के जो मामले सामने आएं हे उसके अनुसार इस वायरस से महिलाएं पुरूषों से कम संख्या में संक्रमित हैं, इसका कारण यह भी है कि महिलाओं का इम्यून सिस्टम पुरूषों के मुकाबले ज्यादा अच्छा होता है। लेकिन बात अगर प्रेग्नेसी की करें तो इस दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह की क्रियाएं होती हैं और इस दौरान उनका शरीर कमजोर भी हो जाता है। लंदंन में एक मामला सामने आया था जिसमें एक नवजात इस वायरस से संक्रमित हो गया था। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह यही है कि प्रेग्नेट महिलाओं को इस दौरान सावधानियां बरतनी चाहिए। उन्हें कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे कि खांसी के दौरान अपने मुंह को ढक कर रखें. टिश्यू ना होने पर खांसी के समय अपने हाथ की बाजू से मुंह ढकें, बीमार लोगों से बिल्कुल दूर रहें, सोशल डिस्टेंट मेंटेंन करें, समय-समय पर हाथ धोते रहें और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते रहें और प्रेग्नेंट महिलाएं घबराएं नहीं क्योंकि स्ट्रेस बच्चे के लिए घातक हो सकता है। दूध से बच्चे को कोई खतरा नहीं है क्योंकि इसमें वायरस नहीं होता।

बात बच्चों की करें तो अभी तक इसको लेकर हुए शोध में कुछ खास बातें सामने नहीं आईं हैं। लेकिन बावजूद इसके बच्चों का ख्याल रखना बहुत ज्यादा है। आमतौर पर बच्चों में फ्लू होता है और उनसे यह दूसरों में फैलता भी है, ऐसे में लॉकडाउन के दौरान आप अपने बच्चों का विशेषकर ख्याल रखें।

दमा के मरीज का ख्याल रखें

हमारे श्वसन तंत्र या हमारी सांस लेने की प्रणाली में किसी भी तरह का संक्रमण, वो चाहे कोरोना वायरस ही क्यों न हो, अस्थमा की तकलीफ़ को बढ़ा देता है। कोरोना वायरस को लेकर चिंतित अस्थमा के मरीज कुछ एहतियाती कदम उठा सकते हैं। इसमें डॉक्टर द्वारा सुझाए गए इनहेलर का इस्तेमाल भी शामिल है, इससे कोरोना सहित किसी अन्य वायरस की वजह से पड़ने वाले अस्थमा के दौरे का ख़तरा कम होगा।

फोन इस्तेमाल करना कितना सुरक्षित

शोध करने वाले मानते हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण छींकने या खांसने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, साथ ही वे यह भी मानते हैं कि वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी कई दिनों तक। इस लॉकडाउन में आपकी बोरियत को कम करने के लिए आपके पास जो सबसे अच्छा साथी है वो है आपका फोन। आपने भी कुछ ऐसा ही डिसाइट कर रखा होगा कि हम तो फोन पर कुछ न कुछ करेंगे, चाहे नेटफिलिक्स करें, या अमेजन प्राइम पर फिल्में देखें या सोशल मीडिया यूज करें। लेकिन आपका यह साथी आपकी चिंता को बढ़ा सकता है।

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ऐसे में आपको एहतियात बरतना होगा। आपको अपना फोन पूरी तरह से बार-बार साफ़ करते रहना चाहिए। लेकिन अपने फोन को एल्कोहॉल से, हैंड सैनिटाइज़र से या स्टरलाइजिंग वाइप्स से साफ़ न करें क्योंकि इससे फोन की कोटिंग को नुक़सान होने का ख़तरा रहता है और इस कोटिंग लेयर को नुक़सान पहुंचने से कीटाणुओं के लिए मोबाइल फोन में फंसे रहना आसान हो जाता है। आप अपने फोन को पेपर टॉवल से साफ़ कर सकते हैं, अगर फोन वाटर वाटर रेजिस्टेंस है तो आप फोन को साबुन और पानी से साफ कर सकते हैं।

कोरोना से बुजुर्गो का बचाव कैसे करें

कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में जिनकी हमे सबसे ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत है वो हैं हमारे बुजर्ग। अगर आपके घर में काई बुजुर्ग हैं तो आपको उनका खास ख्याल रखना होगा क्योंकि कोरोना मामले से मरने वाले लोगों में सबसे ज्यादा मरने वाले लोग बुजुर्ग है। बुजुर्ग यानि की जिनकी उम्र 60 से ज्यादा है। इस दौरान जरूरी है कि उनकी दवाइयों का, उनके आस—पास सफाई का खास ख्याल रखा जाए। लॉकडाउन में बाहर नहीं जा सकते तो फोन पर ही डॉक्टर से सलाह लेते रहें। यहां जरूरी है कि बुजुर्गों से एक खास दूरी बना कर रखी जाए, लेकिन यह दूरी व्यवहार में न झलके। बता दें कि कोरोना से पीड़ित बुजुर्ग जिनकी मौत हुई, उनमें 60 साल के उम्र वालों की संख्या 5 प्रतिशत है, 70 वाले 10 प्रतिशत है और 80 के उम्र वाले 20 प्रतिशत हैं। इस लिए अपने घर के बुजुर्गों का अच्छे से ख्याल रखें और उनका आशीर्वाद पाएं

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