कोरोना से मिली सिख के जरिए हम Global Warming से निपट सकते हैं

दुनिया इस समय कोरोना महामारी की चपेट मै है। आज इस महामारी के कारण दुनियाभर के 65  लाख से ज्यादा लोग  संक्रमित हैं। जिनमें से 3 लाख 88 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं। बात अपने देश भारत की करें, तो हम कोरोना संक्रमितों के मामले में आज दुनिया में चौथे नंबर पर चले आए हैं। हमारे यहां भी संक्रमितों का आंकड़ा 2 लाख के पार चला गया है। लेकिन यहां हमे एक बात समझने की जरूरत है, और वो ये है कि, कोरोना तो बस झाकी मात्र है। असली पिक्चर तो अभी दिखना बाकी है और ये पिक्चर है Global Warming का।

कोरोना से भी बड़ा खतरा कई सालों से ग्लोबल वार्मिंग के रूप में पूरी दुनिया के ऊपर मंडरा रहा है। वहीं जानकारों की माने तो, 2030 तक Global Warming की भयावह तस्वीर हम सब के सामने होगी। हमारे पास केवल 10 साल है, जिसमें हम अपनी धरती और अपने अस्तित्व को Global Warming के ख़तरे से बचा सकते।

कोरोना ने बताया कितना भयावह होगा Climate Change

Covid-19 आने वाले खतरे के लिए एक Case Study का काम कर सकता है। इस कोरोना काल में हमने देखा है कि, किस तरह से एक महामारी के कारण आज पूरी दुनिया लॉकडाउन में है। जिसके कारण बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्था भी अपने घुटनों पर आ गई है। हमने ये भी देखा है कि, इस महामारी के दौर में असमानता से भरी इस दुनिया में हर इंसान पर इसका असर अलग-अलग तरह से पड़ा है।

भारत की ही बात कर लें तो, यहीं हमने देखा कि, प्रवासी मजदूरों को किस तरीक़े की दिक्कत उठानी पड़ी। लाखों की संख्या में ये लोग शहरों से पैदल ही अपने गांव और घर के लिए निकल पड़े। जिसके कारण भूख प्यास से कितनो की जाने गईं। वहीं मिडिल क्लास पर इसका असर ये हुआ कि, कईयों की नौकरियां चली गई और उनकी माली हालत खराब हुई। जबकि, इंडस्ट्रियल सेक्टर पर  असर ये हुआ कि, वे बंद पड़े हैं, खास तौर पर छोटे और लघु उद्योग। जिसका असर सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा।

दुनिया आज इस पेंडेमिक को ‘ Black Swarn’ बता रही है। लेकिन Black Swarn उस खतरे को कहा जाता है, जिसके बारे में पता न हो, असल में ये ‘grey rino’ है, यानि ऐसी घटना जिसके बारे में पता है, जिसका अनुमान है लेकिन हमारे नेगलेजेंस के चलते हम उसके कुप्रभाव को भुगत रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग भी ऐसी ही घटना है। हो सकता है ये पेंडेमिक कुछ और सालों तक दुनिया के लोगों की जान ले और अर्थव्यवस्था को गर्त में धकेल दे।

इसी तरह के हालात जब आगे आने वाले सालों में होंगे तो फिर क्या होगा। लगातार बढ़ रहा धरती का तापमान कैसी तबाही लाएगा। इसका अंदाजा लगाना और समझ पाना मुश्किल है। जिस तरह आज हर वर्ग पर कोविड का प्रभाव अलग अलग है, उस समय भी समाज में आसमनता के कारण अलग अलग प्रभाव सब पर पड़ेगा।

Covid-19 एक मौका है जो प्रकृति ने दिया है

लगातार होते आधुनिकरण और अंधाधुन विकास ने धरती को Global Warming के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। धरती का तापमान पहले ही 1 डिग्री  बढ़ गया है। ऐसे में ये हाल ही में हुई पेरिस मीटिंग में तय किया गया कि, धरती का तापमान 1.5 डिग्री न हो इसके लिए कदम उठाने पड़ेंगे। ऐसे में लगातार बड़ी मात्रा में हो रहे कार्बन उत्सर्जन को कम करना बहुत जरूरी हो गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि, अगले कुछ दशकों में धरती का तापमान और बढ़ेगा क्योंकि, इंसानों के द्वारा किए जाने वाले काम रुकेंगे नहीं। 

इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज, जिससे 1300 से ज्यादा वैज्ञानिक जुड़े हैं, उनका मानना है कि, अगले कुछ दशकों में तापमान 2.5 से 10 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ सकता है।  IPCC की पूरी रिपोर्ट का निचोड़ ये है कि, ग्लोबल वार्मिंग से होने वाला खतरा महत्तवपूर्ण और समय के साथ बढ़ने वाला होगा। लेकिन अभी एक बड़ा मौका हम सबके पास है। कोरोना के कारण मानव गतिविधियां रुकने से धरती में थोड़े परिवर्तन हुए हैं। कार्बन उत्सर्जन कम होने के कारण हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा घाटी है। वहीं नदियों और जलाशयों के पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। और सबसे बड़ी बात ये हुई है कि, लोगों में एक लक्ष्य को लेकर एकजुटता बढ़ी है। लोग पहले से ज्यादा रिस्पॉन्सिबल हुए  है और विज्ञान और वैज्ञानिकों पर विश्वास भी बढ़ा है। ऐसे में अब जब लॉकडाउन खुलेगा तो लोगों की इस आदत का ही इस्तेमाल Climate Change के ख़तरे से निपटने के लिए किया जा सकता है।

  • कोरोना के कारण पॉलिटिक्स, धर्म और लालच से बड़ा विज्ञान साबित हुआ है। क्योंकि जब कोरोना अपने पीक पर है ऐसे में वैज्ञानिकों के कहने पर पॉलिटिकल रैली, चर्च, मंदिर सब बंद हैं, लोग विज्ञान की बात सुन रहे हैं। ऐसे में अब जब वैज्ञानिक Climate Change को लेकर सतर्कता बरतने की बात कहेंगे तो लोग उन्हें ज्यादा सीरियसली लेंगे।
  • कोरोना ने दुनिया को सचेत किया है कि, अव्यवस्थित आर्थिक और सामाजिक असमानता, कमजोर आबादी के लिए सबसे विनाशकारी हैं, ऐसे में हम क्लाइमेट चेंज के समय दुनिया भर में अत्यधिक गर्मी, सूखा और बाढ़ गरीब और वंचित समुदायों पर होने वाले प्रतिकूल प्रभाव का आकलन कर सकते हैं।
  • कोरोना के कारण लोगों के व्यवहार में बदलाव आया है। वहीं पॉलिटिकल और सरकारी पॉलिसीज में भी बदलाव आए हैं। जिसका एक बड़ा प्रभाव है। यानि कि, अगर क्लाइमेट चेंज को लेकर ऐसा हो तो हम इस खतरे को टाल सकते हैं।
  • वहीं ये भी दिखा है कि, जब बात लोगों के जान की आएगी तो सरकारें करोड़ो खर्च करने को तैयार रहेंगी, जैसा भारत में हुआ। यानि सरकार चाहे तो क्लाइमेट चेंज को लेकर एक बड़ी राशि सही दिशा में खर्च कर सकती है।

क्या किया जा सकता है ? Global Warming के लिए भले ही भारत जैसे डेवलपिंग देश ज्यादा जिम्मेदार न हो, लेकिन इस खतरे का सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव हमारे जैसे देशों पर ही पड़ेगा। ऐसे अब सवाल उठता है कि, किया क्या जाए? 

Go Green Economy-  हमने देखा कि, भारत जैसे देशों ने भी बड़े पैंडेमिक के ख़तरे से निपटने के लिए 20 लाख करोड़ तक के पैकेज का ऐलान किया। ऐसे में अगर इसी समय इकोनोमिक बूस्ट करने के साथ ही इसमें ग्रीन वर्ड जोड़ कर काम किया जाए तो हम एक बेहतर कल का निर्माण कर सकते हैं। Green Growth वाली पॉलिसीज बनाकर उन्हें प्रोत्साहित किया जा सकता है। पॉवर सेक्टर को रिन्यूएबल बनाने के लिए एक नया रोडमाप तैयार हो सकता है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को प्रोत्साहन, एग्रीकल्चर फॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने, ज़ीरो एमिशन वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने में सरकारें इन्वेस्ट कर सकती हैं। इसके साथ ही जरूरी है डाटा क्लाइमेट रिस्क का सही डाटा कलेक्शन और उसके हिसाब से सरकारी नीतियों का निर्माण किया जाना।

Individual Effort – बदलाव के लिए एक रिस्क टेकिंग लीडरशिप की जरूरत है। ये लीडरशिप हर क्षेत्र में होना जरूरी है तभी बात बन सकती है। जिसमें सबसे ज्यादा जरूरी है कि, एक इंसान अपने लेवल पर क्या कर सकता है। कोरोना काल में हम सबने इस बात को बड़े अच्छे से जान लिया है कि, हम सब एक दूसरे से कितने जुड़े हैं और इंडिविजुअल स्तर पर हम क्या काम करके देश और दुनिया को क्या फायदा और नुकसान दे सकते हैं। इस पेंडिमिक ने हमे ये सिखाया है कि, एक नॉर्मल जिंदगी मुफ्त में और गारंटी के संग नहीं मिलती। ऐसे अब जरूरी है कि हर एक इंसान अपने स्तर पर Climate Change से लड़ने के लिए तैयार हो।

Indian

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

कबीर के वो दोहे जो 600 साल बाद भी बच्चे-बच्चे की जुबान पर हैं।

Fri Jun 5 , 2020
Share on Facebook Tweet it Pin it Email संत कबीरदास का नाम सुनते हमारे मन में उनके कुछ खास दोहे अपने आप उफान मारने लगते हैं। ऐसा लगता है कि, बस अभी इन दोहों को मन से निकाल कर आवाज का रूप देकर गा लिया जाए। ये दोहे या तो […]
Kabir Das