सफेदी की गांरटी देने वाला ‘निरमा पाउडर’ कैसे बना हर भारतीय की पहली पसंद

हम सभी हमेशा से टेलीविजन देखने के शौकीन रहे हैं. भले ही बदलती दुनिया के बीच टेलीविजन का आकार बदल गया हो. हम सभी की कई यादें भी उस दशक से जुड़ी हुई हैं. जिस समय टेलीविजन Black & White के दौर से निकलकर रंगीन की दुनिया में आ रहा था. हमने उस समय के अनेकों जिंगल सुने. जो आज भी हमें याद है.

कुछ ऐसा ही जिंगल था. वॉशिंग पाउडर Nirma का. जिसमें एक लड़की सफेद फ्रॉक पहने गोल-गोल घूमती नज़र आती है और पीछे से जिंगल चलता है-

वॉशिंग पाउडर निरमा…दूध सी सफेदी कपड़ों में आए रंगीन कपड़े भी खिल-खिल जाए. सबकी पसंद निरमा….वॉशिंग पाउडर निरमा.

भले ही आज के समय में हम अपने कपड़ों को धोने के लिए महंगे साबुन, मंहगे डिटर्जेंट इस्तेमाल करते हो. लेकिन एक वक्त ऐसा था. जिस समय डिटर्जेंट पाउडर का बोलबाला पूरे भारत में था. जिसकी वजह थे. निरमा पाउडर के संस्थापक करसनभाई पटेल (Karsanbhai Patel), जिन्होंने 1980 के दशक में निरमा पाउडर को लांच कर उसे पूरे भारत की पहली पसंद बना दी.

उन्होंने पूरे देश को बताया कि, कैसे आकर्षक जिंगल और विज्ञापन के जरिए हर किसी की पहली पसंद बना जा सकता है.

Karsanbhai Patel,Nirma Powder ,Success story

Karsanbhai Patel का निरमा पाउडर

बात है 1969 कि, जिस समय पूरे देश में हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड (हिंदुस्तान यूनिलीवर) का डिटर्जेंट ‘सर्फ’ पूरे भारत में डिटर्जेंट पाउटर की दुनिया में राज करता था. अमीर घरानों के लोग सर्फ का इस्तेमाल करते थे. अपने कपड़ों को चमकाते थे. जिसकी सबसे बड़ी वजह ये थी कि, इस डिटर्जेंट की कीमत 10 रुपये से 15 रुपये के बीच थी.

जिसकी बाज़ार में इसलिए पंसद किया जाता था. क्योंकि क्योंकि यह डिटर्जेंट हाथों को बिना नुकसान पहुंचाए कपड़ों से दाग हटाता था. साथ ही देश में चल रहे उस समय के अन्य साबुनों की तुलना में बेहतर था.

लेकिन सर्फ डिटर्जेंट पाउडर उस समय देश के गरीब वर्ग और मध्यम वर्ग की पहुंच से काफी बाहर था. जिसकी मात्र एक वजह थी कीमत. यही वजह थी कि, यह लोग अपने कपड़ों को साफ करने के लिए साबुन का इस्तेमाल करते थे.

उस वक्त Karsanbhai Patel गुजरात सरकार के खनन और भूविज्ञान विभाग में एक केमिस्ट के तौर पर काम करते थे. हालांकि वो हमेशा से चाहते थे की वो डिटर्जेंट की दुनिया में कदम रखे. साथ ही मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बाजार में पाउडर उपलब्ध कराएं.

यही वजह थी कि, उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद के अपने घर के आँगन में ही डिटर्डेंट पाउडर बनाने का निश्चय किया. जिसकी एक मात्र वजह थी कि, उस समय उनके पास उतनी न तो लागत थी. न ही वो अपने पाउडर को मंहगा बनाना चाहते थे. इस दौरान उन्होंने एक फॉर्मूले पर काम करते हुए. पीले रंग का डिटर्जेंट पाउडर बनाया.

Karsanbhai Patel,Success story

जिसे उन्होंने बाजार में महज़ 3 रुपये में बेचना शुरू किया. साथ ही उन्होंने अपने इस डिटर्जेंट का नाम रखा निरमा.

डिटर्जेंट पाउडर कैसे बना “Nirma Powder”

करसनभाई पटेल ने जब अपना डिटर्जेंट बाज़ार में लांच किया. उस समय उन्होंने अपने पाउडर का नाम निरमा रखा. जिसके पीछे की वजह थी उनकी बेटी. उनकी बेटी का नाम निरुपमा था. जिसकी एक भीषण दुर्घटना में मौत हो गई थी. यही वजह थी कि, Karsanbhai Patel ने अपने डिटर्जेंट का नाम Nirma Powder रखने का निश्चय किया.

शुरुवाती समय में करसभाई पटेल अपने पाउडर के प्रचार के लिए अपने घर के आस-पास के घरों में जाया करते थे. वहां लोगों को पाउडर बांटा करते थे. साथ ही लोगों को गारंटी भी देते थी कि, अगर पाउडर काम नहीं करता तो उनके पैसे वापस.

कम रेट के साथ उत्तम गुणवत्ता वाला यह Nirma Powder कुछ ही दिनों में अहमदाबाद में एक ब्रांडेट वाशिंग पाउडर बन गया. यही वजह थी कि, करसनभाई पटेल ने अपनी नौकरी छोड़ दी. और अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने का प्लान किया.

लोगों का पसंद बना चुका निरमा पाउडर जहां पूरे अहमदाबाद की पहली पसंद बना चुका था. वहीं देखते हुए देखते पूरे गुजरात की भी पसंद बन गया. यही वजह थी कि, पूरे भारत के बाज़ार में जाने के पहले करसनभाई पटेल ने टेलीविजन विज्ञापन में उतरने का फैसला किया.

उन्होंने इस दौरान जिंगल तैयार करवाया “सबकी पसंद निरमा” का. जिसमें एक सफेद फ्रॉक वाली लड़की देश में मौजूद हर एक टेलीविजन पर छा गई. जिसके चलते इस प्रोडक्ट को खरीदने के लिए भारतीय बाज़ार में ग्राहकों की होड़ लग गई. हालांकि जिस समय Karsanbhai Patel की मार्केट बढ़ने लगी. उसी समय उन्होंने अपने प्रोडक्ट की सप्लाई बाज़ार में बंद कर दी.

एक ओर मांग बढ़ रही थी. दूसरी ओर बाज़ार में Nirma Powder आना बंद हो चुका था. लोग जब भी दुकानों पर डिटर्जेंट पाउडर लेने के लिए जाते. खाली हाथ वापस आ जाते. यही वजह थी कि, खुदरा विक्रेताओं ने करसनभाई पटेल से खुद अनुरोध किया की अपने प्रोडक्ट की सप्लाई बाज़ार में फिर से शुरू कर दें.

फिर क्या था. देखते ही देखते Nirma Powder भारत के हर एक घर तक पहुंच गया. मांग इस कदर बढ़ी की. निरमा पाउडर ने सर्फ पाउडर का आधार ही खत्म कर दिया. बढ़ती बुलंदी और मांग के चलते करसनभाई पटेल ने डिटर्जेंट पाउडर से आगे निकलने का फैसला किया. इस दौरान उन्होंने बाज़ार में टॉयलेट सोप, टूथपेस्ट, साबुन भी लांच किए.

हालांकि इस दौरान कुछ ही उनके प्रोडक्ट सफल हो सके. लेकिन Nirma Powder की होड़ के बराबर कोई नहीं पहुंच सका. यही वजह है कि, आज भी इस साबुन में 20% व डिटर्जेंट पाउडर में 35% प्रतिशत तक की हिस्सेदारी है.

इन सभी बुंलदियों के बीच Karsanbhai Patel ने साल 1995 में अहमदाबाद में अपनी कंपनी शुरू की. इस कंपनी का नाम निरमा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रखा. उसके महज़ आठ साल बाद 2003 में उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और निरमा यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की भी स्थापना की.

Karsanbhai Patel, indianness

इन सबके अलावा पटेल को अनेकों संस्थाओं ने पुरस्कारों से सम्मानित किया. जहां 2010 में उन्हें भारत सरकार की तरफ से पद्मश्री से नवाज़ा गया. वहीं उनका नाम फोर्ब्स पत्रिका में भारत के सबसे धनी लोगों की सूची 2009 और 2017 में शामिल किया गया.

जाहिर सी बात है कि, करसनभाई पटेल ने कभी मैनेजमेंट की कभी कोई डिग्री नहीं ली. न ही इसकी कभी पढ़ाई की. लेकिन अपने विज्ञापनों और अपने प्रोडक्ट के दम पर पटेल हर भारतीय घर की पहली पसंद और जरुरत बन गए.

उन्होंने साबित कर दिया की “ब्रांड बनने से पहले जरुरत बनना जरूरी है. दुनिया खुद ही आपको ब्रांड का दर्जा दे देगी.”

Indian

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