रिटायरमेंट के बाद पति-पत्नी बने खेती के उस्ताद, हर दिन पैदा करते है 7 क्टिंवल टमाटर

आप किसी मिडिल क्लास इंसान से पूछे कि, उसका सपना क्या है तो वो यही कहेगा कि, मैं चाहता हूँ. अच्छी पढ़ाई करूं, अच्छी नौकरी करूं और फिर साठ साल में रिटायर होने के बाद अपने जीवन के आखिरी समय अपने परिवार वालों के साथ रहूं. हालांकि जिन लोगों के पास अच्छी नौकरी नहीं होती. उनके सामने समस्या उनकी जीविका की होती है.जिसके चलते उम्र के उस पड़ाव में जाने के बाद अपने बच्चों पर पूरी तरह निर्भर हो जाते हैं. कुछ इसी तरह की कहानी कनक लता की भी है. जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर अपने रिटायर पति के साथ घर में बैठने की बजाय, अपनी तकदीर बदल दी.

कहानी शुरू होती है साल 2017 से. जिस समय कनक लता के पति वासुदेव पांडेय सहकारिता बैंक से रिटायर हुए थे. रिटायर होने के बाद वो अपने बेटे के साथ अमेरिका में रहने लगे. हालांकि वहां मन न लगने के चलते जल्द ही दोनों पति-पत्नी अमेरिका से लौट आए. ऐसे में रिटायर हो चुके वासुदेव पांडेय और कनक लता जब अपने गाँव वापस आए तो उनके पास कुछ करने को नहीं था. गाँव के लोग भी मजाक उड़ाया करते थे कि, बुढ़ापे में अपना गाँव याद आया. लेकिन कनक लता और उनके पति ने न तो कभी हार मानी, न ही कभी खाली बैठे. यही वजह रही कि, अपने गाँव वापस लौटने के बाद उन्होंने टमाटर की खेती (Tomato Farming) करने की योजना बनाई.

ऐसे में गाँव के लोगों ने उनका कई बार मज़ाक उड़ाया, कई बार इस दौरान असफलताएं मिली, लेकिन दोनों ने कभी हार नहीं मानी और रिजल्ट ये रहा कि, दोनों एक सफल किसान बन गए. टमाटर की खेती की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से 30 किलोमीटर दूर विट्ठल पुर गाँव में रहने वाले वासुदेव पांडेय और कनक लता ने, अपनी आजीविका बेहतर करने की खातिर सबसे पहले डेढ़ एकड़ जमीन से की थी. हालांकि इसके पहले दोनों ने ही कभी खेती नहीं की थी.

जब कनक लता ने शुरू की पहली बार खेती

यही वजह है की अपनी खेती के बारे में कनक लता बतातीं हैं कि, “मैंने कभी खुद खेती नहीं कि, हाँ मगर किसान परिवार से होने के नाते अपने दादा जी को, रिश्तेदारों को खेत में काम करते देखा था. शुरुआती समय में हमने अपने खेत में गेहूं, मटर और टमाटर की खेती शुरू की. हालांकि इस दौरान उपज बेहतर नहीं मिली. ऐसे में सभी ने हमारा मजाक उड़ाया की खेती आती नहीं फिर भी खेती कर रहे हैं.”जिसके चलते कनक लता ने अपने खेतों में एक ही फसल पर काम करना शुरू किया. जिसमें उन्होंने टमाटर की खेती करना सबसे बेहतर समझा और उसके बारे में पढ़ना शुरू किया. जानकारी इकट्ठा करना शुरू किया.

अपनी उन्हीं पढ़ाई और जानकारी का खामियाजा आज ये है कि, कनक लता आज अपने उसी खेत से औसतन हर रोज सात क्विंटल टमाटर का उत्पादन ले रही हैं. जिसे वो अपने आस पास के बाजारों में बेचने के अलावा यूनाइटेड किंगडम और ओमान में बेच रही हैं. कनक लता कहती हैं कि, “शुरुवाती असफलता के बाद हमने सफलता प्राप्त करने की खातिर प्रयास जारी रखा. यही वजह रही कि, मैंने नव चेतना कृषि केंद्र निर्माता कंपनी लिमिटेड (जोकि नेशनलबैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) की सहयोगी है) से भी जानकारी ली, जहाँ उन्होंने खेती को जैविक तरीके से करने की जानकारी दी. यही वजह रही कि,हमने खेती में अपने बदलाव की खातिर दिल्ली से प्रयत्न संस्था से पचास हज़ार रुपये का कर्ज लिया.”

टमाटर की खेती के लिए सबसे पहले कनक लता ने अपने खेत में जैविक खाद, वर्मीकंपोस्ट और अन्य कई तरह के पोषक तत्वों को खेत में डाला ताकि, खेती की उर्वरक क्षमता को बढ़ाया जा सके. फिर अगस्त 2020 आते-आते उन्होंने अपने खेत में दुर्ग औरआर्यमन किस्म के टमाटर के पौधे लगाए. कनक लता कहती हैं कि, “दुर्ग किस्म के टमाटरों से हमें अच्छी और किफायती उपज मिली. साथ ही इस टमाटर की मांग भी होती है.  यही वजह है कि, इस टमाटर की हर पेटी पर हमें औसतन 100 रुपये सामान्य टमाटरों के मुकाबले ज्यादा मिले. क्योंकि दुर्ग टमाटर ज्यादा खट्टे नहीं होते साथ ही काफी रसदार होते हैं. जबकि इन टमाटरों को लंबे समय तक अपने यहां रखा जा सकता है.

हर दिन 50 टोकरी टमाटर का उत्पादन करती हैं कनक लता

यही वजह रही कि कनक लता के टमाटरों का नमूना लेने की खातिर वहां के वानीअधिकारी (डीएचओ) मेवाराम कनक लता के यहाँ पहुंचे. उपज का नमूना लेने के बाद उन्होंने भी माना कि, ये टमाटर बिना रेफ्रिजरेटर के दो हफ्ते तक रखे जा सकते हैं.जबकि अन्य टमाटर एक हफ्ते में ही खराब होने शुरू हो जाते हैं. हर रोज 50 टोकरी टमाटर की उपज का दावा करने वाली कनक कहती हैं कि, “टमाटर की खेती हमारे लिए काफी बेहतर रही. हमारे यहाँ 50 टोकरी टमाटर रोज़ तैयार हो रहे हैं, हर पेटी 25 किलो की होती है. यही वजह है कि, हम दोनों को लगभग 2.5 लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है.

साथ ही कनक लता के पति कहते हैं कि, औसतन रिटायर होने के बाद लोग घर पर खाली बैठ जाते हैं. हालांकि हमने घर पर बैठने की नहीं नई पारी शुरू करने की योजना बनाई. जहाँ नौकरी खत्म होने के बाद लोग अक्सर महसूस करते हैं कि, जितना उन्हें करना था कर चुके. वहीं इसके उलट हमने अपना शौक पूरा करने की शुरुआत की. अपनी खेती के दम पर अपनी पहचान बनाने वाले दंपत्ति कहते हैं कि, हम सभी किसानों से गुजारिश करते हैं की खेतों में सिंचाई का ऐसा माध्यम अपनाएं जिससे पानी-बिजली दोनों की बचत हो सके. हमारा इलाका मिर्जापुर खुद एक पहाड़ी इलाका है.जहाँ पानी की दिक्कत सबको रहती है. हालांकि हम ड्रिप ऐरीगेजशन विधि से खेती करते हैं. ताकि पानी बिजली की बचत कर सकें. यही वजह है कि, खेती को समझना चाहिए.पारंपरिक तरीके की खेती छोड़कर अब सभी को वैज्ञानिक तरीके की खेती शुरू करनी चाहिए. ताकि सभी को बेहतर मुनाफा हो सके.

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