Kal Bhairav Temple – यहां प्रसाद में मिलती है Whisky, Vodka और Rum

भारत एक ऐसा देश है जहां शराब सिर्फ पी ही नहीं जाती बल्कि मंदिरों में भगवान को भी चढ़ाई जाती है। ये सुनकर शायद आपको बुरा लगे, लेकिन आज हम आपको भारत के ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पंडित खुद भगवान को प्याले में शराब डालकर पिलाते हैं।

आप सबने क्लब्स, बीयर बार, पब, पार्टी और घरों में तो लोगों को शराब के नशे में नाचते और गाते तो जरूर देखा होगा, लेकिन क्या कभी आपने मंदिर के अंदर शराब पीने के बारे में सोचा है। अब आप सोच रहे होंगे कि मंदिर जैसी पवित्र जगह पर शराब पीना तो दूर, वहां तो शराब ले जाना भी पाप से कम नहीं है। आप ये जानकर चौंक जाएंगे कि भारत के उज्जैन में मौजूद मंदिर में ना केवल शराब चढ़ाई जाती है, इसके साथ ही प्रसाद के रूप में भी बांटी जाती है।

Kal Bhairav Temple – शराब पीकर खुश होते है काल भैरव

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में काल भैरव मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर में पीछले 40 सालों से प्रसाद के रुप में व्हिस्की, रम और वोडका ही चढ़ाई जाती है। काल भैरव को समर्पित इस मंदिर में माना जाता है कि इससे भगवान भैरव खुश रहते हैं और सबकी मुराद पूरी करते हैं। इतना ही नहीं यहां चढाई जाने वाली शराब सभी भक्तों को चाहे वो महिला हो, पुरूष हो या बच्चा, सबको प्रसाद के रूप में बांटी जाती है। 9 वीं से 13 वीं शताब्दी के बीच बने इस मंदिर को पानीपत की लड़ाई जीतने के बाद मराठा सेनापति महादजी शिंदे ने अपनी पगड़ी चढ़ाकर दोबारा बनवाया था। जीत की खुशी में मंदिर में तांत्रिक हवन होने लगे, जिसमें शराब,  मांस, मछली और अनाज तो चढ़ाया ही जाता था, लेकिन इसके साथ मंदिर में कुंवारी कन्या के साथ संभोग करने की प्रथा का भी पालन होने लगा। पुराने समय में पूजा के दौरान ये पांच प्रसाद भैरव देव को चढ़ाए जाते थे, लेकिन अब चढ़ावे में सिर्फ मदिरा ही चढ़ाई जाती है।

वैसे तो उज्जेन में शराब पूरी तरह से बैन है लेकिन सिर्फ मंदिर के बाहर खुली ओपन दुकानों में आपको नारियल, फूल और शराब की बोतलें बीकती नजर आएंगी। यहां शराब में केवल व्हिस्की,  वाईन और वोडका ही मिलते हैं। इतना ही नहीं देसी से लेकर विदेशी तक हर तरह के ब्रांड यहां आसानी से मिल जाते हैं।

Kal Bhairav Temple – धर्म के नाम पर हो रहा जिंदगियों से खिलवाड़!

यहां आने वाले भक्त शराब की बोतलों को पुजारी को थमा देते हैं और पुजारी थोड़ी सी शराब प्याली में डालकर मूर्ति के होठों के पास ले जाता है। हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि होंठो के पास रखी गई प्याली चमत्कारी रूप से कुछ सेकंड में अपने आप खाली हो जाती है। इस तरह बोतल में बची हुई एक तिहाई शराब भक्त को प्रसाद के रूप में लौटा दी जाती है।

भगवान की प्रतिमा को शराब पिलाने की ये प्रथा उज्जैन के साथ महाराष्ट्र के चेम्बूर में शमशान के पास स्थित भैरव मंदिर और दिल्ली के पुराने किले के पास मौजूद भैरों बाबा के मंदिर में भी मनाई जाती है।

यूं तो हम सब पढ़ते और सुनते हैं कि शराब पीना सेहत के लिए नुकसानदायक है। लेकिन मंदिरों में खुली मिलने वाली इस शराब का सेवन बड़ो के साथ बच्चे भी करते हैं। यहां अक्सर छोटे बच्चे शराब पीकर नशे में झूमते नजर आते हैं, जो कि उनके स्वास्थय के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। इतना ही नहीं, शनिवार और रविवार को तो यहां बहुत सारे भक्त सिर्फ शराब का प्रसाद लेने के लिए ही आते हैं। आलम अब ये हो चला है कि यहां शराब पीकर घरों में औरतों और बच्चों पर होने वाले जुल्म की दुर्घटनाएं भी बहुत बढ़ चुकी हैं।

अगर इसी तरह धड़ल्ले से मुफ्त में शराब बिकती रही तो इन मदिंरो में जाने वाले लोगों में भक्त कम और बेवड़े ज्यादा मिलेंगे। कई लोगों की मानें तो धर्म के नाम पर जिंदगी खराब करने वाली चीजों पर लगाम लगानी चाहिए।

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