India’s First Bird Ambulance- जख्मी पक्षियों को नई जिंदगी दे रहे प्रिंस मेहरा

त्योहारों का देश यानि की भारत.. दोस्तों हमारे देश में हर त्योहार बड़े ही धूम-धाम और भरपूर जोश के साथ मनाया जाता है, बात चाहें दिवाली पर पटाखे फोड़नें की हो या फिर मकर सक्रांति पर पतंग उड़ाने की। हम भारतीय सभी त्योहारों में रंग भरना बहुत अच्छे से जानते हैं, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि, जैसे हर साल दिवाली पर पटाखे चलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, वैसे ही मकर सक्रांति के दिन हजारों पक्षी धागों में फंस कर जख्मी हो जाते हैं। जहां एक तरफ इनमें से कुछ हमेशा के लिए अपाहिज हो जाते हैं तो वहीं कुछ तो दम तोड़ कर अपनी जान दे देते हैं। लेकिन कहते हैं ना कि, ऊपरवाला एक फरिस्ता तो सबके लिए भेजता हैं, तो बस इन बेजुबान पक्षियों की जिंदगियों में फरिस्ता बनकर आए हैं प्रिंस मेहरा..

आसमान में बेपरवाह उड़ते किसी पंछी को देखकर ये कहना कि, काश हम भी इतनी ऊंची उड़ान भर सकते। या फिर किसी चिड़िया को चोंच से अपने बच्चें को खाना खिलाता देखकर आपका भी मन खुश तो जरूर हुआ होगा.. लेकिन जिन नादान परिंदो को देखकर हमारे चेहरे पर वो हल्की सी मुस्कुराहट खिल उठती हैं, उन्ही पक्षियों को चोट लगने पर दर्द से जूझता देख हम भी अक्सर मुंह फेर लिया करते हैं। तो वहीं पंजाब के रहने वाले प्रिंस मेहरा ने इन घायल परिंदों की मदद करने के लिए एक अलग ही रास्ता ढूंढ निकाला है। दरअसल, एंबुलैंस मैन के नाम से जाने जाते प्रिंस ने ऐसी पोर्टेबल एंबुलैंस बनाई है, जिससे वो रास्ते में मिलने वाले जख्मी पक्षियों को ना सिर्फ टाइम पर हॉस्पिटल पहुंचाते हैं बल्कि खुद उनका इलाज भी करते हैं।

वैसे तो पंजाब के चंडीगड़ में रहने वाले प्रिंस मेहरा रोजी रोटी के लिए साइन बोर्ड बनाने का काम करते हैं, लेकिन जब वो किसी परिंदे को लाचार और बेबस देखते हैं तो वो उसकी मदद करने के लिए हमेशा पहुंच जाते हैं। घायल परिंदो की मदद करने के लिए प्रिंस पहले साइकिल का इस्तेमाल किया करते थे, लेकिन अब ये साईकिल इ-बाईक में बदल चुकी है। इन घायल पक्षियों को ढूंढने के लिए प्रिंस साइकिल पर पूरे शहर के चक्कर काटते हैं और जब भी कोई जख्मी परिंदा दिखाई देता है, तो उसे साईकिल में लगाए बक्से के अंदर बिठा कर अपने घर ले जाते हैं। प्रिंस उस पक्षी का इलाज और देखभाल तब तक करते हैं जब तक वो पक्षी आसमान में उड़ान भरने लायक ना हो जाए। पक्षियों को नई जिंदगी देने वाले प्रिंस बिना किसी मतलब के इन परिंदो का इलाज करते हैं और बिना किसी की मदद लिए इनका पूरा पालन-पोषण भी करते हैं।

India’s First Bird Ambulance-  ऐसे साइकिल से ई-बाइक पर आई बर्ड एंबुलेंस

प्रिंस के इस नेक काम के बारे में जब नैशनल बैंक को जानकारी हुई, तब उन्होंने प्रिंस को एक वैन डोनेट करने की कोशिश भी कि, लेकिन प्रिंस ने इस वैन को लेने से साफ इंकार कर दिया। क्योंकि, वैन से निकलने वाली धुएं से जो प्रदूषण फैलता है, उससे ना चाहकर भी नुकसान कुदरत को ही होता है। और बस फिर नैशनल बैंक ने प्रिंस के पर्यावरण प्रेमी विचारों को समझते हुए उनको एंबुलैंस के तौर पर ई-साइकिल सौंप दी। तब से प्रिंस इसी ई-बाइक को Bird Ambulance बनाकर दूसरे शहरों में भी पक्षियों की जान बचा रहे हैं।

खैर, प्रिंस का परिंदो और पर्यावरण से प्यार तो हमेशा ही रहा है, लेकिन हम आपको बताते हैं कि प्रिंस पक्षियों के लिए इतने प्रोटेक्टिव आखिर कैसे बने? दरअसल, जब एक NGO की टीम के साथ प्रिंस को फिरोजपुर जाने का मौका मिला। तब प्रिंस वहां जिस घर में ठहरे हुए थे उसी घर में काम करने वाली एक औरत कुछ मरे हुए कबूतरों को डस्टबिन में डाल रही थी। और उसे ऐसा करते देख प्रिंस देख नहीं पाए। बस उसी वक्त प्रिंस ने डस्टबिन से कबूतर निकाले और दूर जाकर उनको मिट्टी में दफनाकर उनका अंतिम संस्कार कर दिया। मगर, घर वापस जाने के बाद भी प्रिंस को सुकून नहीं मिला। बहुत रातें जागकर प्रिंस ने सोच लिया कि अब वो किसी बेगुनाह परिंदे को मरने नहीं देंगे, और उसी दिन से प्रिंस ने कुछ पैसे बचाकर पक्षियों को बचाने के लिए स्लोगन बनाए और आस पास के स्कूलों में बांट दिए।

India’s First Bird Ambulance-  अब तक 1100 जख्मी परिंदो का इलाज कर चुके हैं प्रिंस

अपने पक्षियों को बचाने के अभियान को चलाने के लिए प्रिंस को अब टाईम और रूपये दोनों की जरूरत थी, इसलिए प्रिंस ने साइन बोर्ड बनाने का खुद का बिजनैस स्टार्ट कर दिया। जिसका फायदा ये मिला की जब भी वो फ्री होते दुकान बंद करके रोज गलियों और सड़को पर जख्मी परिंदों को खोजने के लिए निकल जाते। इलाज करने के लिए अब प्रिंस पक्षियों को सोसाइटी फॉर द प्रीवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल्स सेक्टर-38 और ऐनिमल हज्बंड्री डिपार्टमेंट में पहुंचाते हैं।

इतना ही नहीं पक्षियों का खुद इलाज करने के लिए वो ऐनिमल हज्बंड्री डिपार्टमेंट में नौकरी भी करते हैं। आपको बता दें कि, प्रिंस अभी तक 1100 से ज्यादा परिंदो का इलाज करा चुके हैं और 600 से ज्यादा पक्षियों का अंतिम संस्कार भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं प्रिंस गर्मियों में लोगों को पानी के कटोरे गिफ्ट में देते हैं और उनसे कटोरों में पानी भर कर घर की छतों पर रखने की अपील भी करते हैं।

पिछले 20 साल से बिना किसी स्वार्थ के पर्यावरण को बचाने वाले प्रिंस अपने अनोखे अभियान के कारण बहुत सारे अवार्डस जीत चुके हैं। India’s First Bird Ambulance बनाने के लिए प्रिंस का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। इसके साथ ही प्रिंस को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, यूनीक वर्ल्ड रिकार्ड्स और यूपी बुक ऑफ रिकार्ड्स की तरफ से भी सम्मान मिल चुका है। पक्षियों के पिता प्रिंस को रिपब्लिक डे पर चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से स्टेट अवार्ड भी मिल चुका है। यहां तक कि इसी साल प्रिंस मेहरा को 2019 में इंडिया स्टार पर्सनैलिटी अवार्ड से भी नवाजा गया है।

हालांकि, हम उन्हें इसके लिए कोई अवार्ड से तो नहीं दे सकते हैं, लेकिन हम खुद और आप सभी को उनकी इस कहानी से प्रेरणा लेने के लिए जागरूक जरूर कर सकते हैं, तो अगर अगली बार आपको राह चलते कोई पक्षी घायल या जख्मी दिखाई दे, तब मुंह फेरकर चलने की बजाय, एक हाथ आप भी उसको नई जिंदगी देने की तरफ बढ़ा सकते हैं..

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