House Maid से Stand-Up Comedian बनने वाली Deepika Mhatre

स्टैंडअप कॉमेडी के बारे में आजकल कौन नहीं जानता? आजकल हमारे देश भारत में इसका एक अलग ही ट्रेंड चल रहा है। दिल्ली मुंबई जैसे शहरों में कई ऐसे क्लब बन गए हैं जिनकी कॉमेडी वाली वीडियो आप यूट्यूब पर देखते ही होंगे। इसका क्रेज कुछ ऐसा है कि, कल तक सिर्फ घर से ऑफिस और ऑफिस से घर करने वालें प्रोफेसनल्स भी अब इन जगहों पर अपने ह्यूमर स्किल के जरिए लोगों को हंसाने का टाइम निकाल कर पहुंच जाते हैं। हमारें देश में कैनवास लाफ क्लब, दैट कॉमेडी क्लब, काउंटर कल्चर कॉमेडी क्लब, क्लासिक रॉक कॉफी को, प्लेग्राउंड कॉमेडी स्टूडियो, लाफिंग कलर्स जैसे कई लाफ्टर क्लब हैं, जहां हर रोज कई स्टैंडअप कॉमेडियन पहुंचते हैं। लेकिन एक कॉमेडियन ऐसी हैं जिन्होंने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा है। लोग इन्हें प्यार से कहते हैं ‘कॉमेडीवाली बाई’।

Deepika Mhatre

‘कॉमेडीवाली बाई’ नाम सुनकर/पढ़कर आपको जो समझ में आया है, वो बात एकदम सच है। ये ‘कॉमेडीवाली बाई’ पहले एक मेड थी। जिंदगी कठिन थी, लेकिन इसके बाद भी हंसने और हंसाने का एक इनबिल्ट ह्यूमर था, तो उतर गईं कॅमेडियनों के अखाड़े में और भारत में घर में काम करने वाली औरतों को लेकर जो सोच है उसको भी चुनौती दे दी। हम जिनकी बात कर रहे हैं वो मुंबई की रहने वाली और पेशे से हाउसमेड कम स्टैण्ड-अप कॉमेडियन दीपिका म्हात्रे हैं। उनका चेहरा देखते ही आपके मन में पहली आवाज तो यही आएगी So Cute.. वहीं जब वे स्टेज पर से हंसी के गोले छोड़ती हैं तब तो लोगों की हंसी ही नहीं रूकती।

Deepika Mhatre में बचपन से ही था लोगों को हंसाने का हुनर

दीपिका म्हात्रे अपने हाउस मेड से स्टैंड अप कॉमेडियन तक के सफर के बारे में बताते हुए कहती हैं कि, ये इतना आसान नहीं था, कॉमेडी का हुनर तो बचपन से था। मतलब जैसे दोस्तों में यह बात हमेशा होती थी कि, मैं साथ रहूंगी तो बोरियत तो बिल्कुल नहीं होगी। लेकिन उस समय ऐसा कुछ मिला नहीं।

दीपिका की मानें तो वो जहां काम करती हैं, उन्हीं में से एक हैं संगीता व्यास,  म्हात्रे बताती हैं कि, वो बहुत अच्छी और गरीबों के लिए काम करती हैं। उन्हीं की बदौलत कॉमेडी करने की उनकी आदत को एक पहचान मिली, दरअसल एक बार संगीता व्यास ने मेड और ड्राइवरों के लिए एक टैलेंट शो ऑर्गनाइज किया। इसी में म्हात्रे ने पहली स्टैंडअप कॉमेंडी की। इस प्रोग्राम की वीडियो फेमस स्टैंडअप कॉमेडियन अदिती मित्तल को मिली और उन्होंने फिर दीपिका को इनकरेज किया कि, वो बड़े स्टेजों पर अपना परफॉरमेंस दें। इसके बाद ही एक मेड का स्टैंडअप कॉमेडियन में ट्रांसफार्मेशन हो गया।

Deepika Mhatre

लेकिन दीपिका की लाइफ स्टोरी इतनी भर नहीं है। स्टैंड-अप कॉमेडियन होने से पहले उनकी रोज की लाइफ सुबह 4 बजे से शुरू हो जाती थी। वो सुबह ट्रेनों में सफर करती और इसी दौरान वो यात्रियों को इमीटेशन ज्वेलरी बेचती थी। इसके बाद 7 बजे मलाड के ऊपर पांच घरों मे से एक में पहुंचती, जहां वो मेड का काम करती थी। 2 बजे तक यह काम खत्म कर वो फिर 90 मिनट का सफर तय करके घर को पहुंचा करती थीं और घर पर फिर अपने अस्थमा के पेशेंट पति और तीन बेटियों की देख रेख करती थी। वहीं रात में ही वो अगली सुबह के लिए इमीटेशन ज्वेलरी की पैंकिंग करती थी। हालांकि, फिलहाल दीपिका कुकिंग का काम छोड़ चुकी हैं लेकिन ट्रेनों में ज्वेलरी बेचने का काम वो अभी भी कर रहीं हैं।

भारत में स्टैंडअप कॉमेडी की बात करें तो, ज्यादातर आपको इसमें यंग लड़के दिखेंगे और कुछ कुल डूड या थोड़े क्लासी लोग, एक और चीज कॉमन है,  इनमें ज्यादातर लोग उस प्रोफेशन से आते हैं जिसे हमारी सोसायटी एक अच्छा काम मानती है। लेकिन दीपिका जब सलवार कमीज और दुपट्टे में स्टेज पर पहुंच कर कहती हैं कि, मै एक मेड हूं तो सारी पुरानी सोच टूट जाती है। उम्र भी बस एक नंबर बनकर रह जाती है।

Deepika Mhatre

Deepika Mhatre अपनी कॉमेडी के जरिए मिटा रही हैं अमीरी और गरीबी का फर्क

स्टेज पर आते ही दीपिका दर्शकों को बताती है कि, वह बहुत खास हैं। खास इतनी हैं कि, जिस इमारत में वह काम करने जाती हैं वहां उनके लिए खास लिफ्ट लगी है। जिन घरों में वह काम करती हैं, वहां भी उनके लिए स्पेशल प्लेट और गिलास होते हैं। उनकी इन बातों को दर्शक एक से दो सकेंड में समझ जाते हैं कि, असल में वो भारत में घरेलू कर्मचारियों, नौकरानियों, रसोइयों और ड्राइवरों के साथ होने वाले व्यवहारों पर तंज कस रही होती हैं।

वे अपने तंज में इस बात को बताती हैं कि, एक हाई क्लास सोसायटी उनके प्रोफेशन वालो के साथ कैसा व्यवहार करती है। अलग-अलग लिफ्ट उपयोग करने के लिए मजबूर करती है ताकि अमीर लोगों के यूज वाली चीजें गंदी न हो जाएं। अपनी कॉमेडी में वो हर तरह की बातों को बताती हैं जैसे साहेब लोगों के हिसाब से उनके सामने नौकर को कैसे रहना चाहिए, क्या करना चाहिए। उनकी कॉमेडी में एक तरह से सामाज में क्लास डीविजन और अमीरों की उस मजबूरी जिसमें वो गरीबों को बराबर ट्रीट नहीं कर सकते, को लेकर एक व्यंग्य वाला चोट होता है।

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