Grabage Café- जहां प्लास्टिक कचरे के बदले मिलेगा भरपेट खाना

कचरा, मतलब जो चीज़ हमारे लिए बेकार हो जाती है वह कचरा हो जाती है। यानि कहें तो ‘The Thing Which is Not in Use’ लेकिन ऐसा नहीं है कि, जो चीज आपके यूज में नहीं हो वो किसी और के काम नहीं आ सकती। बिल्कुल आ सकती है। लेकिन कुछ चीजें यूज एंड थ्रो टाइप होती हैं जो ज्यादात्तर लोगों के लिए दोबारा काम नहीं आती या आती भी है तो हर बार लोग इसे अपने पास चाह कर भी नहीं रख पाते। जैसे कि प्लास्टिक की बोतल, यह एक आम कचरा है। लोग बोतल से पानी पी लेते हैं और बोलत फेंक देते हैं। कई बार रखने की सोचते हैं तो याद आता है कि, घर पर तो पहले से एक बोतल रखी हुई है। वहीं ऐसी चीजों पर एक चेतावनी भी होती है कि, एक से ज्यादा बार इस्तेमाल नहीं करें, तो इनका कचरा बनना तय है।

ऐसी बोतलों और कचरों को उठाते हैं ‘रैग पीकर्स’ जिस काम में ज्यादातर बच्चे लगे हुए हैं। लेकिन वो इतने नहीं हैं कि, हर प्लास्टिक कचरा रिसाइकिल वाली जगह पहुंच सके। ऐसे में जरूरत है कि, पसर्न टू पर्सन इस काम को हर कोई अपने स्तर पर करे। लेकिन हमारी भी तो एक आदत है ना, जिस चीज में हमें अपना फायदा नहीं दिखता वो काम हम करते नहीं। इसलिए हम इतनी मेहनत नहीं करते कि ये प्लास्टिक कचरा रिसाईकिल या रीयूज होने वाली जगहों तक पहुंचे। एक कहावत है ‘जितने का बच्चा नहीं उतने का झुनझुना। ये थ्योरी हम हर काम में लगाते हैं। मतलब इस तरीके से सोच लीजिए कि, जितने का प्लास्टिक होगा उससे ज्यादा आप उसे रिसाईकिल सेंटर तक पहुंचाने में अपना पेट्रोल फूंक देंगे या एनर्जी लगा देंगे। तो बेसिक फंडा मुनाफे—नुकसान का है और इसी बेसिक फंडे के कारण हम ऐसे कचरे सड़कों पर या कोने में या फिर नालों में और नदियों में फेंक देते हैं। कुछ तो फैसला ऑन द स्पॉट करके इसे जला के स्वाहा कर देते हैं। जिसके अपने नुकसान है लेकिन हम इसके बारे में सोचते नहीं।

Grabage Café

Grabage Café-  प्लास्टिक कचरा दीजिए पेट पूजा करिए 

लेकिन अगर कचरे के बदले कुछ मिले तो हर कोई खुद ही कचरे को उसकी सही जगह पहुंचाने में दिलचस्पी लेगा। देखिए साफ—साफ कहें तो मुनाफे—नुकसान का भी एक बेसिक फंडा है जो पेट से जुड़ा होता है। यानि हम जो करते हैं अपने पापी पेट के लिए करते हैं। अगर आपके और हमारे इस पापी पेट के बदले कोई कचरा मांगे तो आप क्या कहेंगे? अरे क्या कहेंगे क्या, यहीं कहेंगे.. यार ये तो बेस्ट आइडिया है! बस यहीं आइडिया अब हकीकत में सामने आ गया है। अगर आप नई दिल्ली के नजफगढ़ जोन में रहते हैं तो आप इसका अनुभव भी ले लेंगे। यहां पर एक होटल है जिसका ऑफर ऐसा है कि आप ‘स्वच्छ भारत अभियान’ में जी जान लगा देंगे। होटल की ऑफर है कि अगर आप एक किलो प्लास्टिक कचरा लाएंगे तो आप लंच और डिनर कर सकते हैं और अगर ढ़ाई सौ ग्राम प्लास्टिक कचरा लेकर आते हैं तो सुबह का नाश्ता यानि ब्रेकफास्ट कर सकेंगे।

दरअसल दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने मंगलवार को स्वच्छ भारत अभियान के तहत नजफगढ़ जोन में यह अनोखी मुहिम शुरू की है। नजफगढ़ जोन में इस योजना के तहत द्वारका के वर्धमान मॉल के एक रेस्टोरेंट में गारबेज कैफे शुरू किया गया है। यहां आने वाले कस्टमर्स पैसे के बजाए अपने घर का प्लास्टिक कचरा देकर बदले में खाना खा सकते हैं। यहां ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर तीनों की सुविधा है और इस सब के बदले आपको देना होगा एक निश्चित वजन का प्लास्टिक कचरा। अब सवाल आता है कि, प्लास्टिक कचरे में क्या क्या हो सकता है तो इसका जवाब है कि इस योजना के तहत पानी की सिंगल यूज प्लास्टिक बोतलें, प्लास्टिक कैन, कोल्ड ड्रिंक और प्लास्टिक का अन्य कचरा सब लिया जाएगा। अगर आप कचरा लेकर यहां जाएंगे तो आपको एक दम स्पेशल ट्रीटमेंट मिलेगा, मतलब गार्ड ऑफ ऑनर जैसा कुछ।

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Grabage Café-  यहां रैग पीकर्स को भी मिलेगा स्पेशल ट्रीटमेंट

ऐसा नहीं है कि, अंग्रेजी में ‘गारबेज कैफे’ नाम है तो कचरा बीनने वाले ‘रैग पीकर्स’ को यहां जगह नहीं मिलेगी। असल में तो गार्ड ऑफ ऑनर इन्हें ही मिलना चाहिए। सो जो काम कहीं नहीं होता वह इस कैफे में होगा। गारबेज कैफे में गारबेज कलेक्ट करने वाले लोगों का भी खुला वेलकम है। यहां उनके लिए भी यहां लंच डिनर और ब्रेकफास्ट उपलब्ध रहेगा। निगम का कहना है कि, किसी भी तरह का एक किलो प्लास्टिक कचरा लेकर आने वाले लोगों को एक समय का लंच या डिनर यहां मिलेगा। यहां सुबह, दोपहर और रात में लोगों के लिए यह जगह खुलेगी। आप गारबेज कैफे में अपना कचरा जमा कराकर इन तीनों टाइम्स पर खाना खा सकेंगे।

बता दें कि, दिल्ली को प्लास्टिक के प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए यह पहल शुरू की गई है। एसडीएमसी की कोशिश है कि, ऐसे प्रयासों के जरिए इलाकों से प्लास्टिक के कचरे को इकट्ठा करके उसका सही से निस्तारण किया जाए। ऐसा माना जा रहा है कि, इस योजना को दिल्ली के अन्य इलाकों में भी लागू किया जाएगा। गारबेज कैफे का उद्देश्य लोगों को प्लास्टिक कचरे के निष्पादन के बारे में जागरूक करना है।

बताते चलें कि, दिल्ली नगर निगम का यह कदम काफी इनोवेटिव है। इससे दो फायदें होंगे। भूखों को खाने के लिए अब पैसे पर डिपेंड नहीं रहना होगा। दिल्ली में ऐसे कई रैग पीकर्स है जो दिनभर कचरा बिनने के बाद भी शाम का अच्छा खाना नहीं खा पाते। इससे दूसरा बड़ा फायदा होगा कि, लोग प्लास्टिक निस्तारण से जुड़ सकेंगे और प्लास्टिक से मुक्ति दिलाने में अपना पर्सनल योगदान भी दे सकेंगे।

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