श्‍याम सरन नेगी…. देश के पहले मतदाता

आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस है। ये तो हम सभी जानते है कि मतदान कितना जरुरी है एक सही सरकार को चुनने के लिए इसलिए राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुरुआत का मकसद भी ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं का सूची में नाम जोड़ना, मतदान के लिए प्रेरित करना है। मगर आज इस ख़ास दिन पर मैं आपको देश के पहले और सबसे बुजुर्ग मतदाता के बारे में बताती हूँ। जिनकी कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। जी हाँ, मैं बात कर रही हूँ श्‍याम सरन नेगी जी की। जिनकी उम्र अभी 104 है और वो हिमाचल के प्रदेश के किन्नौर ज़िले में रहते हैं। श्‍याम सरन नेगी ने आजतक कोई भी चुनाव नहीं छूटने दिया है वो हर चुनाव में मतदान करते हैं। हालांकि अब श्याम सरन नेगी को अब दिखना और सुनना कम हो गया है। वो घुटनों के दर्द से भी परेशान हैं, फिर भी मतदान के लिए उनका जोश कम नहीं हुआ है। तो उनकी कहानी की शुरूवात होती है 1952 से, दरअसल आज़ाद भारत का पहला चुनाव 1952 में हुआ था और तब हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में रहने वाले श्‍याम सरन नेगी ने सोचा भी नहीं होगा कि वो आज़ाद भारत के पहले वोटर बनकर इतिहास रच देंगे।

दरअसल हुआ कुछ यूं था कि भारत में पहली बार “लोकसभा चुनाव” फरवरी 1952 में हुए थे लेकिन हिमाचल प्रदेश एक मात्र ऐसा राज्य था जिसे अक्टूबर 1951 में ही मतदान करने का मौका दिया गया था। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि जाड़े के महीने में बर्फवारी की वजह से हिमाचल प्रदेश के निवासियों को मतदान केन्द्र तक पहुँचने में दिक्कत होती। जब चुनाव हो रहे थे उस वक़्त चुनाव के समय श्याम सरन नेगी किन्नौर के मूरंग स्कूल में अध्यापक थे और चुनाव में उनकी ड्यूटी लगी थी। उनकी ड्यूटी शौंगठोंग से मूरंग तक थी, जबकि उनका वोट कल्पा में था, इसलिए उन्होंने सोचा कि वो सुबह पहले मतदान करेंगे फिर ड्यूटी पर जाएंगे। इसलिए वो सबसे पहले मतदान केंद्र पर पहुंच गए, और वहां उन्होंने मतदान किया। मगर उन्हें क्या पता था कि उनके एक वोट ने इतिहास बना दिया था। दरअसल मतदान करते ही इतिहास बन गया और मास्टर श्याम सरन नेगी आजाद भारत के पहले मतदाता बन गए। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 1 जुलाई 1917 को जन्मे श्याम सरण नेगी भारत के पहले आम चुनाव में मतदान करने वाले पहले व्यक्ति थे। तब से, वे एक भी चुनाव में मतदान करने से नहीं चूके। दी इंडियनेस श्‍याम सरन नेगी जी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है।

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