बसंत पंचमी 2022: इस मंदिर में होते हैं देवी सरस्वती के साक्षात दर्शन

हमारे देश में ज़्यादातर त्योहारों का संबंध ऋतुओं से होता है। दरअसल हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से पूरे साल को छह महीनों में बांटा जाता है। उनमें से एक बसंत ऋतु है जो लोगों का सबसे पसंदीदा मौसम होता है। इस साल 2022 में बसंत पंचमी 5 फरवरी को है। वैसे तो बसंत पंचमी को लेकर कई तरह की मान्यताएं है। ये दिन और भी ख़ास हो जाता है क्योंकि इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की आराधना की जाती है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार देवी सरस्वती दुर्गा की तीन प्रमुख शक्तियों में एक हैं। इसलिए कह सकते हैं कि बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा का महत्व और भी ज़्यादा बढ़ जाता है। फिर भी भारत में माँ सरस्वती के मंदिर बहुत कम हैं। हालांकि प्राचीन काल में राजाओं ने देवी सरस्वती के मंदिर पूरे देशभर में कई राज्यों में बनवाए थे। आज भी माँ सरस्वती के कई मंदिर इंडोनेशिया में भी हैं क्योंकि उस समय हमारे देश का राजाओं का साम्राज्य वहां तक फैला था। वैसे तो इन सभी मंदिरों का काफ़ी महत्व है मगर बसंत पंचमी पर इन मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है। इन सभी मंदिरों में माँ सरस्वती का एक मंदिर ऐसा भी है जहां मां सरस्वती पहली बार प्रकट हुई थीं।

ये मंदिर देवभूमि उत्तराखंड में बद्रीनाथ मंदिर के पास ही है। ऐसा माना जाता है कि यहां सरस्वती नदी का उद्गम भी हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी जगह पर मां सरस्वती पहली बार प्रकट हुईं थीं। ये मंदिर आपको दिखने में बेहद छोटा और साधारण सा लग सकता है मगर देवी सरस्वती अपने आप में अनोखा और चमत्कारिक है। यहीं पर यानी सरस्वती नदी के ठीक ऊपर एक बड़ी से शिला है जिसे भीम शिला कहते हैं। यहां पर एक और ऐसी चीज है जो सबको हैरत में डाल देती है। दरअसल सरस्वती नदी की धारा में एक चेहरे की आकृति बनती है। जी हां आप गौर से देखेंगे तो यहां नदी की धारा एक शक्ल बनाती है। इस मंदिर के पास भीम पुल भी है जहां से आप ये अद्भुत नज़ारा देख सकते हैं। भीमपुल से आपको सरस्वती नदी धरातल के अंदर बहती हुई दिख जाएगी। ऐसे में जब नदी की धारा पर सूरज की रोशनी पड़ती है तो सामने इंद्र धनुष के सातों रंग नजर आते हैं।

मान्यता तो ये भी है कि उत्तराखंड के इस दिव्य स्थान से ही पांडवों ने स्वर्ग की यात्रा तय की थी। यही नहीं, ये भी कहा जाता है कि महर्षि वेद व्यास जी ने भी इसी जगह पर महाभारत की रचना की थी। कहा तो ये भी जाता है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के बीच में कुछ विवाद हुआ था। जिसके बाद माँ सरस्वती को यहां नदी के रूप में प्रकट होना पड़ा था। ख़ुद इस बात का ज़िक्र श्रीमद्भगवद पुराण और विष्णु पुराण में भी किया गया है। वैसे महाभारत में सरस्वती नदी के अदृश्य होने का वर्णन है। और ये हैरानी की बात है कि आज भी हरियाणा और राजस्थान के कई स्थानो पर सरस्वती नदी के धरातल के अंदर ही अंदर बहने की बाते कहीं जाती हैं। लेकिन शायद ही कभी कोई इस नदी के असली रहस्य को जान और समझ पाए।

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