नक्सल प्रभावित इलाकों में आठ साल से काम कर रही Doctor Didi, रोज चलती हैं मीलों

कहते हैं, अगर आपको अपना कद बढ़ाना है तो अपने लिए जीना छोड़कर सबके लिए जीना पड़ेगा. तभी आपको लोग अपना मसीहा कहेंगे. नर्स दिवस (nurses day) के मौके पर आज हम आपको छत्तीसगढ़ की एक ऐसा महिला नर्स के बारे में बताने जा रहे हैं. जो नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में भी अपने काम की बादौलत अनोखी पहचान हैं. जिसने बिन मोबाइल कनेक्टिविटी, बिना सड़क, बिना तमाम व्यवस्थाओं के लोगों के दिल में वो स्नेह जगाया है कि, आज पूरा नारायणपुर जिला उन्हें ‘डॉक्टर दीदी’ doctor didi कहता है.

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले की ओरछा ब्लॉक की रहने वाली कविता पात्र पिछले आठ सालों से अपने गांव से लेकर अनेकों गांवों में अपनी सेवाएं दे रही हैं. जाटलूर में पदस्थ कविता ANM हैं. जिन्हें लोग doctor didi के नाम से पहचानते हैं.

इस काम में कविता की मदद उनके साथ स्वास्थ्य कर्मी भीमराव सोढ़ी करते हैं. पिछले आठ सालों से भीमराव सोढ़ी और कविता (doctor didi), अपने आस पास के पूरा इलाके में बीमार पड़े लोगों की दवा करने के साथ, उनकी देखभाल कर रहे हैं.

कविता बनी (Doctor Didi)

ANM की डिग्री हासिल करने वाली, कविता उस क्षेत्र में रहती हैं. जहां नक्सल प्रभावित एरिया सबसे अधिक है. गांव के नाम पर पिछड़े और बेबस गांव हैं. कच्ची सड़के हैं. जंगली इलाका है. यहां तक की नदियों के ऊपर पुल तक नहीं कि, अगर किसी को एंमरजेंसी पड़े तो उसका ठीक से उपचार हो सके. बावजूद इसका ख्याल किए बगैर कविता दीदी यहां मौजूद हर इंसान-बच्चे और ग्रहणी का उपचार करती हैं. जब भी इनके आस-पास के गाँवों में कोई बीमार होता है तो, सबको doctor didi का ख्याल आता है.

नक्सल प्रभावित होने के चलते नारायणपुर के जाटलूर सिहत रासमेटा, कारंगुल, मुरुमवाड़ा, डूडी और लंका जैसे गांवों में न तो स्वास्थ्य केंद्र आज तक बन सका है. न ही यहां लोगों के लिए कोई खास व्यवस्था है. ऐसे में जब कोई यहां बीमार होता है. या फिर गर्भवती महिला की डिलीवरी और बच्चों को टीका लगाने की बारी आती है. इन सबका जिम्मा doctor didi यानि की कविता निभाती हैं.

Doctor Didi करती हैं हर रोज़ 35 किमी का सफर

Doctor Didi, Nurse Day

हर इंसान को अपनी जान की फ्रिक होती है. नक्सल प्रभावित इलाकों में आए दिन खबरें आती रहती हैं कि, हमारे जवानों की शहादत हो गई. या फिर नक्सलिओं ने इस गांव में लोगों को गोली मारी दी. ये डर कविता दीदी के अंदर भी रहता है. हालांकि अपने काम के प्रति सजगता और दृढशक्ति उन्हें साहत देती है. यही वजह है कि, हर रोज़ जाटलूर से मेडिकल किट लेकर doctor didi गांवों में लोगों के इलाज़ के लिए निकलती हैं. हर रोज़ कविता औसतन 30-35 किलोमीटर पैदल चलती हैं. अक्सर लोगों का इलाज़ करते हुए शाम हो जाती है. ऐसे में नक्सलियों के इसी इलाके के जंगल उनके लिए आशियाना बनते हैं. ऐसा एक बार नहीं, बीते आठ सालों में अनेकों बार हो चुका है. जबकि जंगलों में जानवरों का भी ड़र होता है. लेकिन अपने काम को लेकर कविता कभी पीछे नहीं हटी.  

Doctor Didi बनी हैं, इलाके की मिसाल

आज हर इंसान जानता है कि, ओरछा ब्लॉक का बड़ा इलाका पूरी तरह से नक्सलियों के कब्जे में है. अनेकों जगहों पर नक्सलिओं ने IED बिछा रखी होती है. इसके अलावा अनेकों जगहों पर नक्सलिओं ने स्पाइक्स होल बनाए होते हैं.

बावजूद इसके कविता हर रोज़ अपनी जान जोखिम में डालकर कोसो पैदल चलकर. गांव के लोगों का इलाज़ करती हैं. यहीं नहीं ब्लॉक के लंका गांव में पहुंचने की खातिर उन्हें दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों से होकर गुजरना पड़ता है. जिसकी वजह है कि, यहां के ग्रामीण पूरी तरह से doctor didi पर निर्भर हैं. जब भी किसी भी इंसान को कोई समस्या या परेशानी होती है तो, उन्हें कविता दीदी याद आती हैं.

इस बात को कविता बेहतर रूप से समझती हैं. इसलिए कविता कहती हैं कि,

“बीते 8 सालों में गांवों की जिम्मेदारी मुझ पर है. हर गांव में मुझे सभी का प्यार और साथ मिलता है. जिसके चलते गांव के लोग मुझे doctor didi कहते हैं. मैं भी गांव के लोगों के स्नेह के चलते पिछले आठ सालों से दिन रात काम कर रही हूँ.”

कविता पात्र, ANM, ओरछा ब्लॉक, नारायणपुर

ज़ाहिर है, Doctor Didi यानि की कविता Nurses Day की एक ऐसी प्रेरणा हैं. जिनका उदाहरण किसी भी परिस्थिति में पूरी तरह से फिट बैठता है. यही वजह है कि, The Indianness उन्हें सलाम करता है.

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