बीमार पत्नी, फिर भी लोगों की मदद की खातिर बेंच दिए सलधाना परिवार ने गहने

कहते हैं, जब तक अपने पर न बीते तब तक किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. मगर इस महामारी में ऐसा अनेकों बार देखा गया, जब बिना अपनी जान की परवाह किए, बिना अपने बारे में सोचे कई लोगों ने अनेकों लोगों की मदद की. जहां कोरोना महामारी का दौर अनेकों ज़िंदगी अब तक ले गया. वहीं अनेकों लोग इस बीमारी के बीच प्रेरणा बन गए. जिनसे पूरे देश से सीख की कैसे एक दूसरे की मदद से सब कुछ बेहतर करना संभव है. ठीक इसी तरह एक परिवार है सलधाना परिवार. एक ऐसा परिवार जो इस महामारी के दौर में उन्हीं लोगों की लिस्ट में शामिल हो गया, जो नेकदिली की पहचान हैं.

कोरोना महामारी में जहां हर इंसान घर में कैद है. वहीं सलधाना परिवार आज मुंबई में उन लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचा रहा है. जिनको उसकी सख्त जरुरत है. इसकी शुरुवात हुई आज से लगभग दो हफ्ते पहले, जब 54 वर्षीय पैसकल सलधाना को एक फोन आया. यह फोन होली मदर स्कूल, मालवणी के प्रिंसिपल रफ़ीक सिद्दीकी का था. जिन्होंने पैसकल को फोन करते ही घबराई आवाज़ में पूछा कि क्या वो ऑक्सीजन सिलेंडर दे सकते हैं?

दरअसल प्रिंसिपल रफ़ीक सिद्दीकी की ऑक्सीजन सिलेंडर की जरुरत इसलिए पड़ी क्योंकि उनके स्कूल की एक शिक्षिका शबाना मलिक के पति को उस समय ऑक्सीजन की सख्त जरुरत थी. प्रिंसिपल रफ़ीक सिद्दीकी ने ऑक्सीजन के लिए पैसकल के पास इसलिए फोन किया था. क्योंकि उन्हें मालूम था की पैसकल सलधाना की पत्नी को ऑक्सीजन की जरुरत पड़ती रहती है. इसलिए सलधाना परिवार हमेशा एक ऑक्सीजन सिलेंडर अपने घर में रखते हैं.

ये बात रफ़ीक सिद्दीकी को इसलिए मालूम थी कि, क्योंकि पैसकल सलधाना उनके खास दोस्त हैं. यही वजह रही कि, उन्होंने उन्हें ऑक्सीजन के लिए फोन किया. दूसरी ओर इस बात की सूचना मिलते ही, पैसकल सलधाना और उनकी पत्नी रोज़ी ने बिना अपनी तबियत की परवाह किए. ऑक्सीजन सिलेंडर देने की हामी भर दी. जिसके चलते एक मरीज की जान बच गई.

पैसकल सलधाना और उनकी पत्नी रोज़ी

pascal saldanha and rozi

हर इंसान जैसे अपना जीवन चलाने की खातिर कुछ न कुछ करता रहता है. ठीक इसी तरह पैसकल भी कोविड19 के पहले शादी और स्कूल के इवेंट्स में डेकोरेशन का काम करते थे. जबकि उनकी पत्नी रोज़ी मुंबई के बोरीवली के सेंट ज़ेवियर स्कूल में पढ़ाती थी. हालांकि लगभग पाँच साल पहले जब उन्हें मालूम चला की उन्की किडनी खराब होने को है. तब से रोज़ी नियमित तौर पर डायलिसिस पर हैं. जिससे उनका स्वास्थ्य काफी खराब रहने लगा है. दोनों पति-पत्नि पिछले काफी समय से मुंबई के मालवणी चर्च इलाके में रहते हैं.

रोज़ी बताती हैं कि, “एक समय तक मेरा वजन 68 किलो हुआ करता था. हालांकि बीमारी की वजह से मेरा वजन आज महज़ 28 किलो रह गया है. मैं अक्सर बिस्तर पर ही पड़ी रहती हूँ. अगर कहीं घूमती या फिर चलती हूँ तो मेरी पल्स रेट गिरने लगती है. मेरी इम्यूनिटी भी काफी वीक है, जिसके चलते मुझे कोरोना महामारी से ज्यादा खतरा है. मैं पैरालिसिस अटैक के साथ हैमरेज बीमारी का भी सामना कर रही हूँ. कुछ महीनों पहले मैं इसी की वजह से कोमा में चली गई थी. यही वजह है कि, हम अपने घर में आपात स्थिति के चलते ऑक्सीजन सिलेंडर रखते हैं. इन सबमें अब तक हमने लगभग दो करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं.”

कहानी यही खत्म नहीं होती. रोज़ी कहती हैं कि, “जिस समय हमने अपना सिलेंडर देकर शिक्षिका के पति की जान बचाई. उसके बाद से हमें हर रोज़ मदद के लिए फोन आने लगे. हमारे पास ज्यादा कुछ नहीं था. आखिर में हमने लोगों की मदद करने की खातिर गहने बेच दिए. ताकि ऑक्सीजन सिलेंडर भरा सकें.”

सलधाना परिवार ने ऐसे की लोगों की मदद

pascal saldanha and rozi

पैसकल कहते हैं कि, “अनेकों फोन हमारे पास आने लगे. कोई हमसे ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने की बात करता. कोई हमें सिलेंडर देने की विनती करता. कुछ अपनी असमर्थता बताते. जिसके चलते हमने लोगों की मदद का फैसला किया. हालांकि पैसे न होने की वजह से मैंने अपने पत्नि के गहने बेच दिए. जिससे हमें 80 हजार रुपए मिले. इन पैसों के जरिए मैंने अपने दोनों बेटों एंसेल्म और शलोम से बात की और उनसे कहा कि, ऑक्सीजन सप्लायर्स से बात करो. ऑक्सीजन सिलेंडर लेना शुरू करो. जहां से हमने छह लोगों को मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की. इसके अलावा भी हमने कुछ ऑक्सीजन सिलेंडरों का ऑर्डर दिया है. ताकि हम लोगों तक उसे पहुंचा सके.”

सलधाना परिवार के सबसे छोटे बेटे शलोम (27) बताते हैं कि, “हमारे पास सीमित साधन हैं. जितने पैसे थे. सब ऑक्सीजन खरीदने, रीफिल और ट्रांसपोर्ट में लगा दिए. माँ की तबीयत खराब रहती है. रोज़ उनकी दवाइयों और अन्य खर्चों की जरुरत पड़ती रहती है. यही वजह है कि, पापा के ऑफिस की कुछ चीजों को बेच कर घर चला रहे हैं.”

इसके उलट रोज़ी सलधाना कहती हैं कि, मुझे नहीं मालूम की मैं कब तक जिंदा रहूंगी. हाँ मगर मरने से पहले लोगों की मदद करना चाहती हूँ. ताकि लोगों की जिंदगी बचाई जा सके.

pascal saldanha and rozi

आज यही वजह है कि, सलधाना परिवार भारतीयता की वो मिसाल है. जिसकी कहानी आने वाले वक्त में अमिट छाप की तरह मौजूद रहेगी. मुफ्त में ऑक्सीन सिंलेडर पहुंचाने वाले इस परिवार की मदद की खातिर की लोगों पैसे दिए. हालांकि जो काम सलधाना परिवार ने किया, उसके आगे ये आर्थिक मदद बेअसर ही है.

अगर आप भी सलधाना परिवार के जरिए लोगों को मुफ्त ऑक्सीजन पहुंचाना चाहते हैं. या फिर रोज़ी और पैसकल की आर्थिक मदद करना चाहते हैं तो, उन्हें आप यहां पर दान कर सकते हैं.

अकाउंट होल्डर का नाम (Name of the account holder) – Pascol Cajetan Saldhana

बैंक का नाम (Name of the bank) – Bank Of India

अकाउंट नंबर (Account number) – 018710110002533

IFSC Code – BKID0000001

Indian

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

महामारी के बीच पानी की अहमियत खत्म, भविष्य का क्या?

Fri May 21 , 2021
Share on Facebook Tweet it Pin it Email पानी एक इंसान की खास जरुरतों में से एक है. बिना पानी इंसान तो क्या किसी भी जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती. उसके बावजूद पानी को लेकर इंसान जितना लापरवाह और लचर है. उससे कल्पना की जा सकती है […]
marachi subburaman