Corona Love Story : मुक़म्मल ना होकर भी अमर हुई ये मोहब्बत..

ऐसा क्यों होता है कि जब भी बात प्यार मोहब्बत की होती है तो ज़िक्र हमेशा प्रेमी प्रेमिकाओं का ही होता है। आपने भी आजतक ज़्यादातर प्रेमी प्रेमिका वाली लव स्टोरी ही सुनी होंगी। बहुत ही कम ऐसा होता है जब पति पत्नी के प्यार उनके त्याग की कहानियां रेडियो पर किसी चैनल पर आए या किसी मैगज़ीन में पढ़ने को मिले। लेकिन कोरोना से बिछड़े पति पत्नी की कहानी जो में आपको सुनाने जा रही हूँ उसे सुनकर आप अपने आंसू नहीं रोक पाएंगे। और यक़ीनन आप यही कहेंगे कि प्यार तो असली यही है वो जो फूल भेजना फैंसी डिनर करना लॉन्ग ड्राइव पर जाने वाले प्यार की कहानियां आप सुनते हैं न वो तो सब बेकार हैं। ये तो आपने देखा ही होगा कि कोरोना की दूसरी लहर में कितने बच्चे अनाथ हुए। कितने ही आज अपने जीवनसाथियों को खोए बैठे हैं। कितने ही माँ बाप ने अपने जवान बच्चों को खो दिया। कोरोना ने लाखों लोगों के घर की खुशियां छीन ली।

कोरोना की ऐसी ना जाने कितनी ही सच्ची कहानियां मैने अपने आस पास देखी और सुनी। मगर गुजरात के वडोदरा की ये कहानी दिल को कचोट लेती है। क्योंकि हर हॉस्पिटल की कुछ टर्म्स और पालिसी होती है इसलिए इस कपल की प्रिवीसी को ध्यान में रखते हुए हॉस्पिटल ने तो इनका नाम नहीं बताया। इसलिए अभी के के लिए हम इन्हे अमित और नेहा मान लेते हैं। अमित और नेहा आज से 5 साल पहले एक दूसरे से मिले थे और तभी से ये दोनों प्यार में थे आखिर अक्टूबर 2020 में इन दोनों ने शादी कर ली। दोनों ही इंडिया से बहार सेटल थे और एकदूसरे के साथ काफ़ी खुश थे। ज़ाहिर सी बात है कि नई नै शादी में हर कोई काफ़ी एक्ससाइटेड रहता ही है। शादी के 4 महीने बाद ही इन्हे पता चला कि इंडिया में रहने वाले अमित के पापा को हार्ट अटैक आया है। इसलिए अमित और नेहा 2021 में भारत लौटे ताकि वो अपने फादर का ध्यान रख सकें। उसी बीच इंडिया में कोरोना की दूसरी लहर आ चुकी थी। जिसके बाद अमित को वडोदरा के स्टर्लिंग अस्पताल में एडमिट कराया गया। तब से करीब 2 महीने तक वो बाइलेटरल निमोनिया से जूझ रहे थे। उनके लंग्स पूरी तरह ख़राब हो चुके थे। इन 2 महीनों में उनके कई बॉडी पार्ट्स ने काम करना बंद कर दिया थी। आखिरकार डॉक्टर्स ने जवाब दे दिया कि वो ज़्यादा से ज़्यादा 3 दिन और ही ज़िंदा रह पाएंगे।

ज़ाहिर सी बात है कि ये सुनकर कोई भी पत्नी बुरी तरह टूट जाएगी। वो भी तब जब उनकी शादी को ज्यादा वक़्त भी नहीं हुआ हो। नेहा को ऐसा लगा कि उनके कितने सपने और कितने अरमान अचानक धुंधले से दिखने लगे। लेकिन उन्होंने सोचा कि वो अपने प्यार को कभी मरने नहीं देंगे। इसलिए उन्होंने डॉक्टर से कहा कि मैं अपने पति के अंश से मां बनना चाहती हूं। लेकिन डॉक्टर्स ने कहा कि मेडिकल लीगल एक्ट के मुताबिक़ पति की मंजूरी के बिना स्पर्म सैंपल नहीं लिया जा सकता। नेहा ये सुनकर बुरु तरह टूट गईं क्योंकि उनके पास सिर्फ 3 दिन बचे थे और उनके पति इस हालत में नहीं थे कि वो  उनके लिए कुछ भी कर पाएं। इसलिए नेहा ने अपने सास ससुर के साथ मिलकर अपने वकील नीलाय पटेल से बात की और गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। नेहा ने हाईकोर्ट से कहा कि मेरे पति मृत्यु शैया पर हैं। मैं उनके स्पर्म से माँ बनना चाहती हूँ लेकिन कानून इसकी इजाजत नहीं देता। नेहा ने आगे कहा कि हमारे प्यार की अंतिम निशानी के रूप में मुझे पति के अंश के रूप में उनका स्पर्म दिलवाने की कृपा करें। सोचिए अपने पति के चले जाने की बात सुनकर कोई भी औरत शायद निढाल होकर ज़मीन पर गिर पड़ेगी। मगर नेहा उस दौरान हाईकोर्ट के चक्कर लगा रही थीं। हाईकोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई हुई तो सभी थोड़ी देर के लिए एकदम हैरान हो गए। क्योंकि इस तरह का केस शायद इससे पहले आया ही नहीं था। लेकिन एक पत्नी के मन में अपने पति के प्रति बसे इस अमूल्य प्यार का सम्मान करते हुए हुए कोर्ट ने तुरंत सुनवाई की और महिला को स्पर्म लेने की मंजूरी दे दी। कोर्ट की इजाजत के बाद डॉक्टर्स ने टेस्टिक्युलर स्पर्म एक्स्ट्रेक्शन मेथड के जरिए अमित का स्पर्म कलेक्ट किया। किसी मरते हुए आदमी की ज़ायदाद सोने गहने के लिए आपने लोगों को ज़द्दोज़हद करते देखा होगा लेकिन ये अपने आप में पहला ऐसा मामला है जब पत्नी को अपने पति से सिर्फ उसका स्पर्म चाहिए था। ताकि वो उन दोनों के प्यार को हमेशा ज़िंदा रख सके उसे अमर बना सके। अब भले ही अमित ने हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन नेहा के लिए उनके पति की निशानी उसकी एक उम्मीद बनकर बाकी है। वाकई में किसी के ना रहते हुए उसे प्यार करना शायद दुनिया का सबसे कठोर एहसास है।  ये एक ऐसी पीड़ा है जिसके दर्द का इलाज शायद नहीं बना…

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