नीलू की हत्या का जिम्मेदार कौन? उसका पति या हमारा तमाशबीन समाज?

दिल्ली.. जिसे देश का दिल और यहां रहने वाले लोगों को दिलवाले कहा जाता है। लेकिन अभी दो दिन पहले इसी दिलवाली दिल्ली में एक ऐसी घटना हुई जिसे देखने के बाद आपकी रूह कांप उठेगी। दरअसल, दिल्ली के बुद्ध विहार में बीते रविवार को 26 साल की एक महिला नीलू की खुलेआम दिन-दहाड़े चाकू घोपकर हत्या कर दी गई। महिला बीच सड़क पर तड़पती रही लेकिन वहां मौजूद लोगों में से एक भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया और आखिर में मदद की आस करती उस लाचार औरत ने अपना दम तोड़ दिया।

दिल्ली की बुद्ध विहार इलाके में बीते रविवार को एक सड़क किनारे पति हरीश और पत्नी नीलू काफी देर से बहस कर रहे थे। देखते ही देखते ये बहस खूनी संग्राम में बदल गई। अचानक गुलाबी शर्ट पहने हरीश ने अपनी बीवी नीलू को चाकू से मारना शुरू कर दिया। कोई नीलू की मदद को आगे ना आए इसीलिए आस-पास खड़े लोगों को चाकू दिखाते हुए हरीश ने काफी तेज आवाज़ में कहा कि “कोई आगे नहीं आएगा ***, मेरी बीवी है मैनें मार डाला” इस दौरान हरीश ने अपनी पत्नी नीलू पर करीब 40 बार चाकू से वार किया और उसे मौत के घाट उतार दिया। इतनी मेहनत के बाद थके हुए हरीश ने सड़क किनारे बैठकर राहत की सांस ली।

तमाशबीन समाज?

नीलू का हत्यारा हमारा तमाशबीन समाज

करीब 4-5 मिनट तक चले इसे कार्यक्रम को देखने के लिए सड़क पर कई लोग मौजूद थे. जहां इस हत्या को अंजाम दिया गया ठीक उसके सामने कई दुकाने थी। जिनमें लोग बैठकर तमाशबीन बने हुए थे। तो वहीं कुछ लोग तो महिला की चीखती आवाज सुनकर अपनी दुकान से बाहर भी निकले लेकिन सिर्फ चाकू देखकर इतना डर गए कि वापस अंदर जाते हुए दरवाजा भी बंद कर लिया। अपने घर की बालकनी में खड़े कुछ लोगों ने भी इस कार्यक्रम का पूरा लुत्फ उठाया और तो और अपने Social Media पर शेयर करने के लिए इस पूरे शो का वीडियो भी बनाया।

अब गौर करने वाली बात ये है कि, इस घटना का जो वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। उसमें ये सभी लोग साफ देखे जा सकते हैं। बालकनी में खड़े लोगों के पास रखा भारी भरकम गमला भी साफ नज़र आ रहा है।

घटनास्थल के बिल्कुल पास से गुजरे दो मजदूरों के हाथ में हथौड़े पर भी सबकी नज़र गई होगी। और शायद ये चंद औजार काफी थे एक अकेले आदमी को रोकने के लिए, लेकिन बावजूद इसके वहां मौजूद एक भी शख्स ने महिला को बचाने की कोशिश तक नहीं की।

भला करते भी तो क्यों? 26 साल की नीलू ना तो उनकी बहन थी, ना मां और ना ही कोई रिश्तेदार.. “और फिर आज कल माहौल वैसे भी इतना खराब हो गया है कि कोई किसी दूसरे के फटे में टांग नहीं अड़ाना चाहता”।

और बस यही सोच हमारे समाज में दिन दहाड़े बढ़ती इस तरह की घटनाओं के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार है। अक्सर लोग खुद मुसीबत में ना पड़ने के डर से किसी की मदद को आगे नहीं आते हैं। हमारे समाज का एक तबका अभी भी कहीं ना कहीं इस घटना के पीछे महिला को ही जिम्मेदार ठहरा रहा होगा। कई लोगों का कहना होगा कि “अरे जरूर उसने कुछ किया होगा” या “अब बाहर चक्कर चलाएगी तो यहीं होगा ना इसके साथ” या ऐसी ही कई टिप्पणियों के साथ पीड़िता को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा होगा।

सोचिए अगर नीलू की जगह आप होते इस घटना के पात्र?

लेकिन यकीं मानिए नीलू की मौत का जिम्मेदार जितना उसका पति है उससे कई ज्यादा हमारा समाज और हमारी किसी के फटे में टांग अड़ाने वाली सोच है। क्योंकि अगर उस वक्त नीलू को बचाने की एक कोशिश में वहां मौजूद कोई भी शख्स चाकू के उन 40 वार में से एक भी वार सहन कर लेता तो शायद आज नीलू जिंदा होती और दोबारा कोई हरीश इस तरह की घटना को अंजाम देने से पहले समाज के खौफ में 1000 बार सोचता।

जरा सोचिए कभी ऐसी ही किसी मुसीबत में आप खुद खड़े हो तो क्या? कभी आपकी दिन दहाड़े कोई हत्या कर दे या पीटना शुरू कर दें तो क्या आपको लगता है ऐसी मुसीबत में कोई आपकी मदद करने आएगा? सोचिए और हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जवाब जरूर बताएं।

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