Bipin Rawat ने देश को समझाया, एक CDS होने का मतलब क्या होता है..

बड़े गौर से सुन रहा था जमाना.. तुम्हीं सो गए दास्तां कहते-कहते। यह शेर यकीनन जनरल रावत जैसी महान शख्सियत के लिए ही बना है। ऐसे कौन जाता है, जैसे सीडीएस जनरल Bipin Rawat चले गए। जनरल रावत एक ऐसा पहाड़, जिससे टकराना दुश्मनों के चूर-चूर होने की पूरी गारंटी थी। हिमालय सरीखा अटल इरादा, निर्भीकता, कर्मठता, अक्खड़पन,  ईमानदारी, अड़ने और लड़ने का गुण जनरल रावत में कूट-कूटकर भरा था। जनरल रावत पहले सेनाध्यक्ष थे जो तीनों सेनाओं के संयुक्त कमान के अगुवा बने।

फौजी वर्दी और शारीरिक कठोरता के भीतर मोम जैसा दिल छिपा था पर यह मोम जैसा दिल भारत मां की अस्मिता के सवाल पर शेरदिल बन जाता था। उसकी दहाड़ से पाकिस्तान और चीन के लोगों के दिल दहल जाते थे। जो सीधे-सीधे यह उद्घोष करता था  ना दैन्यम… न पलायम। तुम एक गोली चलाओ तो फिर हम अपनी गोलियां नहीं गिनेंगे। जनरल रावत पूरी ठसक और स्वाभिमान के साथ कहते.. अगर हालात बने तो हम पाकिस्तान और चीन से एक साथ निपट लेंगे। एक दिन पहले ही उन्होंने दुनिया को चेताया था कि कोरोना की जंग जैविक युद्ध में बदल सकती है।

भारत की उम्मीदों के ध्वजवाहक थे Bipin Rawat

Bipin Rawat के जाने से एक शून्य पैदा हो गया है, क्योंकि Bipin Rawat सिर्फ देश के पहले सीडीएस नहीं थे, बल्कि भारत की उम्मीदों के ध्वजवाहक थे, क्योंकि जबसे वो सीडीएस बने थे. देश दुनिया के पटल पर मजबूती की कहानी लिख रहा था, क्योंकि ये बिपिन रावत ही थे, जिन्होंने देश को समझाया कि एक सीडीएस होने का मतलब क्या होता है। सीडीएस बिपिन रावत थल,जल और वायु सेना को मजबूत करने में जुटे हुए थे। वह सरकार को सेनाओं को मजबूत करने के लिए लगातार परामर्श दे रहे थे। उसका लाभ सेना को मिल रहा था। सेना लगातार मजबूत हो रही थी।

Bipin Rawat

चाहे टीवी पर पकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की ब्रेकिंग न्यूज़ देखकर ख़ुशी से उछाल पड़ने का मौका हो जब किसी फ़िल्मी के सीन की तरह हमारी सेना ने पाकिस्तान जाकर अपने जवानों की शहादत का बदला लिया था और पाकिस्तान को धुल चटाई थी या चीन की सेना को डोकलाम में बुरी तरह पीछे धकेलना हो या फिर जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 लगने के बाद माहौल को इतनी बढ़िया तरह से संभालना हो कि जहां लगा था कि 370 हटने के बाद बड़ा आतंकी हमला हो सकता है वहां बल्कि आतंकी चुन-चुन के मारे गए हों ऐसे ना जाने कितने ही कारनामें थे जो आपकी और हमारी आँखों ने देखे थे, जिन्हे देखकर हम सिहर से गए थे, हमने अपने देश और अपनी सेना पर गर्व हुआ था उन सबके पीछे हाथ था जनरल बिपिन रावत का। उस शख्सियत का जिसके सामने बड़ी से बड़ी मुसीबत बौनी सी लगती थी।

 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी में CDS जनरल Bipin Rawat का जन्म हुआ था. Bipin Rawat के परिवार के कई लोग भारतीय सेना से जुड़े हुए थे. बिपिन रावत के पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत थे. पिता के सेना में होने की वजह से बिपिन रावत का पूरा बचपन फौजियों के मध्य ही बीता है.

Bipin Rawat ने कैंब्रियन हॉल स्कूल, देहरादून और सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला से अपनी पढ़ाई को पूरा किया था. जिसके उपरांत बिपिन रावत अमेरिका चले गए और उन्होंने अमेरिका के सर्विस स्टाफ कॉलेज से अध्ययन पूरा किया. उन्होंने हाई कमांड कोर्स भी किया है.

रावत को भी देशभक्ति और बहादुरी विरासत में मिली थी. उन्होंने उरी, जम्मू और कश्मीर, सोपोर आदि जगहों पर सेना में मेजर, कर्नल और ब्रिगेडियर आदि पोस्ट पर सालों तक अपनी सेवा दी. 1 सितंबर 2016 को उन्होंने सेना में उप-प्रमुख बनाया गया. जिसके बाद सरकार ने देशा का 27वां आर्मी चीफ बनाया.

रावत की कुशलता और तजुर्बे को देखते हुए सरकार ने उन्हें 1 जनवरी, 2020 को देश का पहला CDS नियुक्त किया था. प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 में लाल किले के प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तीनों सेनाओं के अध्यक्ष के रूप में एक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पोस्ट बनाने का एलान किया था. इससे पहले देश में CDS जैसा कोई पोस्ट नहीं था. 63 वर्षीय रावत, भारतीय सेना में सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे। वह देश के पहले चीफ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) थे।

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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) वह पोस्ट है, जो सीधे सरकार को सेना के बारे में सलाह देता है. इसमें नौसेना, वायु सेना और थल सेना तीनों ही सम्मिलित होती हैं. लंबे समय से इस बात को महसूस किया जा रहा था कि एक ऐसा पद होना चाहिए, जो तीनों ही सेनाओं के बीच एक कड़ी का काम करे. इसके लिए सरकार ने CDS की स्थापना की. Gen Bipin Rawat देश के पहले CDS चुने गए थे.

वह रक्षा मंत्रालय के सलाहकार थे और तीनों सशस्त्र बलों में समन्वय लाने और उनकी लड़ाकू क्षमताओं के एककीकरण के कार्य देख रहे थे। जनरल Bipin Rawat के कार्यों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने सेना प्रमुख पद से उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक पहले सीडीएस के लिए नामित कर दिया। सीडीएस में उनका कार्यकाल 2022 में खत्म होना था, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने दुनिया छोड़ दी।

पूर्वोत्तर में उग्रवाद को खत्म करने में रावत ने अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने साल 2015 में म्यांमार में क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन का अभियान चलाया था, जिसमें भारतीय सेना ने NSCN-K के उग्रवादियों को सफलतापूर्वक जवाब दिया था. यह मिशन रावत की अगुआई में दीमापुर स्थित III कॉर्प्स के ऑपरेशन कमांड से चलाया गया था.

Bipin Rawat की अगुआई में भारतीय सेना ने किया था चीनी सेना का सामना

रावत को पाकिस्तान के खिलाफ कुछ सबसे कड़े कदम उठाने और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है। भारतीय वायुसेना ने जब बालाकोट में हमले किए थे, तब जनरल रावत की अगुआई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया था।

केंद्र सरकार ने 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद को हटा दिया था। इस दौरान मोदी सरकार के सामने घाटी में शांति की कड़ी चुनौती थी। ऐसे में सरकार ने बड़ी संख्या में सेना के जवान कश्मीर में तैनात किए। तब प्रमुख Bipin Rawat ने ही पूरी जिम्मेदारी संभाली और कश्मीर में मोर्चा संभाला था।

Bipin Rawat

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की तरफ से फैलाए जा रहे आतंक ने पिछले कुछ दशकों से अपनी जड़ें जमा ली हैं. बिपिन रावत के कमान संभालने के बाद 2017 में भारतीय सेना की तरफ से ऑपरेशन ऑलआउट लॉन्च किया गया। इस ऑपरेशन के जरिए जम्मू कश्मीर में कई आतंकी संगठनों को ठिकाने लगाया गया।

उरी बेस कैंप पर 2016 में आतंकवादी हमला होने के बाद उनकी अगुआई में सर्जिक स्ट्राइक की योजना बनाई गई थी। भारतीय सेना की एक टुकड़ी ने एलओसी पार करने आतंकवादियों के ठिकाने पर हमले किए थे। जनरल रावत उस समय नई दिल्ली में साउथ ब्लॉक से इस घटना की निगरानी कर रहे थे।

उन्होंने उत्तरी और पूर्वी कमांड सहित कुछ बेहद कठिन इलाकों में सेवा दी है। उनकी अगुआई में भारतीय सेना ने डोकलाम में करीब दो महीने तक चले लंबे गतिरोध के बाद चीन को पीछे ढकेलने पर मजबूर किया था। चीन से सीमा विवाद के बाद उन्होंने सैन्य मोर्चा संभाला था। कहा जाता है कि रावत ने भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच बेहतर संबंध बनाने में भूमिका निभाई। 2017 में डोकलाम में भारतीय और चीनी सेनाएं आमने-सामने थी। चीन डोकलाम के एक हिस्से में सड़क बना रहा था लेकिन भारतीय सेना के कड़े विरोध के बाद दोनों सेनाओं के बीच युद्ध जैसी स्थिति आ गई थी। 70 से ज्यादा दिनों तक ये विवाद चला, लेकिन सेना प्रमुख जनरल Bipin Rawat की अगुआई में भारतीय सेना ने चीनी सेना का डटकर सामना किया और चीन को पीछे होने पर मजबूर किया।

जनरल रावत ने एक ब्रिगेड कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-सी) दक्षिणी कमान, सैन्य संचालन निदेशालय में जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड -2, कर्नल सैन्य सचिव और उप सैन्य सचिव की सेवा में चार दशक बिताए। जनरल रावत जूनियर कमांड विंग में सैन्य सचिव की शाखा और वरिष्ठ प्रशिक्षक के पद पर भी रहे। वह संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (यूएनपीएफ) का भी हिस्सा थे और उन्होंने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में एक बहुराष्ट्रीय ब्रिगेड की कमान संभाली थी। जनरल बिपिन रावत को भारतीय सेना में दी गई उनकी विशिष्ट सेना के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल और सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।

इस जांबाज अफसर की हादसे में शहादत से समूचे भारत में हाहाकार मच गया। उन्हें जानने वाली हर आंख इस वक़्त नम है। वाकई में ये भारत के लिए बहुत बड़ा नुकसान है जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता। दी इंडियननेस भी इस महान शख्सियत को सलाम करता है और इस हादसे में शहीद होने वाले सभी जाबांजों की आत्मा की शांति के लिए प्राथर्ना करता है।

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