अनाथ लड़कियों को मां का साया देने वाली पद्मश्री बीबी प्रकाश कौर

अनाथ होना क्या है ? बिना किसी अपने के साये के दर-दर की ठोकरे खाकर बड़ा होना क्या होता है? और अगर आपकी पैदाइश लड़की की हो तो क्या आसान है कोई महफ़ूज साया तलाश पाना.. खैर इन सवालों का जवाब शायद आपके या हमारे पास नहीं है, लेकिन कोई है जो ना सिर्फ इन सभी सवालों के जवाब जानती हैं बल्कि ये सवाल कभी किसी और से ना पूछा जाए इसके लिए काम भी कर रही हैं. हम बात कर रहे हैं बीबी प्रकाश कौर की. जिन्होंने अपनी पूरी उम्र सिर्फ अनाथ लड़कियों को एक मह़फूज और सुनहरा बचपन देने में गुजार दी.

बीबी प्रकाश कौर का जन्म पंजाब के किस इलाके में हुआ ये कोई नहीं जानता. वो खुद भी नहीं। बस आज से करीब 62 साल पहले पंजाब के जालंधर जिले की किसी सड़क किनारे पर वो पड़ी हुई मिली थी. पास के ही एक गुरूद्वारे के लोगों ने जब प्रकाश कौर को रोता देखा तो उसे अपने साथ गुरूद्वारे ले आए. रातभर उनका ख्याल रखने के बाद अगली सुबह उन्हें नारी निकेतन भेज दिया गया. वहां रहकर ही बीबी प्रकाश कौर ने अपना बचपन बिताया और समझ आने पर फैसला किया कि वो किसी भी बच्ची को अनाथ नहीं रहने देंगी.

बीबी प्रकाश कौर

उनके इसी फैसले का नतीजा है कि आज पंजाब के जालंधर में वो एक यूनिक होम चला रही हैं जो वाकई में बिल्कुल यूनिक है। यहां सैकड़ों की संख्या में लड़कियां रहती हैं जो बीबी प्रकाश कौर को मम्मा कहकर पुकारती हैं। यूनिक होम में रहने वाली सभी बच्चियों को सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिकता शिक्षा के साथ उन्हें आर्थिक तौर पर भी मजबूत बनाया जा रहा है।

बीबी प्रकाश कौर ने लिया कभी शादी ना करने का फैसला

बीबी प्रकाश कौर ने खुद वो सब महसूस किया है जो आज के वक्त में कई अनाथ बच्चे महसूस कर रहे हैं. उन्हें ये एहसास था कि बिना मां-बाप के रहना कितना मुश्किल होता है. बस इसीलिए उन्होंने फैसला किया कि वो कभी शादी नहीं करेंगी. खास बात ये रही कि उनके संगी साथियों ने भी उनके इस फैसले का सम्मान करते हुए उन्हें अपना समर्थन दिया। बीबी प्रकाश कौर ने फैसला तो ले लिया था लेकिन उस फैसले पर वो अमल कैसे करें उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था। बस इसी के चलते वो पहले एक ऐसी संस्था से जुड़ी जो अनाथ बच्चों के लिए काम करती है. मगर संस्था से जुड़ने के बाद कौर ने ये महसूस किया कि ये संस्था जैसी बाहर से दिखती है अंदर से वैसी नहीं है। बच्चों के नाम पर चैरिटी लेने वाली संस्था में काफी कुछ गलत हो रहा था जिसे प्रकाश बर्दाश्त नहीं कर सकी और उन्होंने इसके खिलाफ आवाज़ उठाने का निर्णय लिया, मगर अफसोस की उस वक्त प्रकाश की आवाज़ को दबा दिया गया और संस्था पर कोई कार्यवाही नहीं हुई.

अंत में प्रकाश ने संस्था छोड़ने का फैसला किया, लेकिन तब तक वहां मौजूद कुछ बच्चियों का लगाव प्रकाश से काफी बढ़ चुका था, यानी वो भी बीबी प्रकाश कौर के साथ जाना चाहती थी। प्रकाश का दिल बहुत बड़ा था. वो जानती थी कि उनके खुदके पास रहने के लिए कोई घर नहीं हैं बावजूद इसके उन्होंने बच्चियों को अपने साथ आने से इंकार नहीं किया।

प्रकाश कहती हैं कि “जब आप खुदकों पूरी तरह से भगवान के आगे समर्पित कर देते हो तो वो खुद आकर तुम्हारा हाथ थाम लेता है और तुम्हें संभाले रखता है”.

ऐसा ही कुछ तब भी हुआ प्रकाश की इस मुश्किल घड़ी में उनके एक मित्र ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उन्हें रहने के लिए अपना घर दे दिया. अब प्रकाश के सिर पर एक छत थी जहां वो इन बच्चियों को अपने साथ रख सकती थी.

जब मदद को एक आगे बढ़ता है तो धीरे-धीरे कई और हाथ भी आगे आने लगते हैं। ये कोई कहावत तो नहीं है मगर हकीकत जरूर है. हमारे समाज में अक्सर ये देखने को मिलता है जिसे आज के वक्त में लोग ट्रैंड भी कहने लगे हैं। चाहें बात इंस्टाग्राम रील्स की हो या फिर ट्विटर ट्रैंड की.. एक व्यक्ति के पीछे-पीछे सारी दुनिया वो काम करने लगती है. हालांकि, इनमे से कई काम अच्छे होते हैं तो कई गलत भी साबित होते हैं. बस किसी भी ट्रैंड के साथ चलने से पहले हमें खुद तय करना होता है वो कि सही है या गलत..

बीबी प्रकाश कौर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जहां पहले उनके दोस्त ने अपना घर देकर मदद का हाथ बढ़ाया था तो वहीं इस बात को सुनकर कई और लोग भी उनकी मदद के लिए आगे आए.. प्रकाश भी बिना संकोच किए लोगों से मदद मांग लेती हैं. उनका मानना है कि मदद को आगे आना हर एक व्यक्ति उनके लिए भगवान का ही स्वरूप है.

बीबी प्रकाश कौर

17 मई 1993 को प्रकाश ने पंजाब के जालंधर में ही अपने खुदके यूनिक होम की स्थापना की. यूनिक होम को लेकर प्रशासन की तरफ से कोई दिक्कत ना हो इसलिए उन्होंने इस होम को एक ट्रस्ट के जरिए खोला जिसका नाम भाई घनैया जी चैरिटेबल ट्रस्ट- यूनीक होम है. यहां वो अपनी बच्चियों के साथ रहती हैं. नकोदर रोड स्थित 3 एकड़ के इस होम में 80 लड़कियां रहती हैं। सभी की उम्र 18 साल से कम है। 18 साल से बड़ा होने पर लड़कियों को दूसरे होम भेज दिया जाता है। जिनका खर्च समाज के लोगों द्वारा ही उठाया जाता है. खास बात तो ये है कि बीबी प्रकाश कौर यहां मौजूद किसी भी बच्ची को गोद नहीं देती हैं. क्योंकि अक्सर कई परिवार बच्चों को गोद तो ले लेते हैं मगर फिर उनके साथ गलत तरह का सलूक करते हैं. इसीलिए वो किसी भी बच्ची को गोद नहीं देती हैं सभी बच्चियां उनके पास ही रहती हैं.

1993 में बीबी प्रकाश कौर ने की यूनिक होम की स्थापना

इस यूनिक होम में एक और खासियत ये है कि यहां पर बच्चा छोड़कर जाने के लिए एक खास जगह बनाई गई है जिसे बेबी क्रेडल का नाम दिया गया है. इस जगह पर ना तो कोई सीसीटीवी कैमरा लगा है और ना ही कोई व्यक्ति यहां पर मौजूद रहता है. बस एक खास तकनीक को जरूर प्रयोग किया गया है जिसके चलते जब भी कोई व्यक्ति बेबी क्रेडल में बच्चा रखता है तो एक घंटी खुद-ब-खुद बज जाती है. जो इस बात का संकेत है कि कोई क्रेडल में बच्ची रखकर गया है. हैरानी की बात तो ये है कि आज तक कोई भी इस क्रेडल में अपना लड़का छोड़कर नहीं गया है. बीबी प्रकाश कौर बताती हैं कि यहां जो भी बच्चे आते हैं वो इतने बीमार होते हैं कि 6-7 महीनों तक उनके इलाज पर पैसा खर्च किया जाता है हालांकि, ये इलाज भी पब्लिक सर्विस के जरिए ही किया जाता है. इन बच्चियों को मानसिक तौर से विकसित करने में भी आम बच्चों से ज्यादा समय लगता है.

इस यूनिक होम की एक खास बात और भी है वो ये कि यहां रहनी वाली सभी बच्चियों का जन्मदिन हर साल 24 अप्रैल को मनाया जाता है जिसके पीछे कारण ये है कि किसी को भी अपनी जन्मतिथि के बारे में कोई अंदाजा नहीं है. इसी वजह से 24 अप्रैल को यूनिक होम में करीब 100 किलो का केक काटा जाता है जो अपने आप में खास है. वैसे तो बीबी प्रकाश कौर खुद एक सिक्ख महिला हैं मगर बावजूद इसके उन्होंने अपने होम में बच्चियों के नाम हर धर्म से जुड़े हुए रखे हैं. वो अब तक तकरीबन 17 लड़कियों की शादियां भी करा चुकी हैं तो वहीं यूनिक होम में रहने वाली सभी लड़कियों को अच्छे नामी स्कूलों में शिक्षा दिलाई जाती है ताकि वो बड़े होकर किसी पर निर्भर ना रहें. और होम का भी नाम रौशन कर सकें. सिर्फ देश ही नहीं विदेशों तक यहां के बच्चे पढ़ाई करने जाते हैं.

अपने इस नेक काम के बारे में बात करते हुए प्रकाश कौर ने इंडिया टाइम्स को बताया कि “मुझे जन्म देने वाली अपनी मां को मैं को साबित करना चाहती हूँ कि जो लड़की उन्होंने छोड़ दी, वो आज अपने पैरों पर खड़ी है। मैं फेमस होना चाहती हूँ ताकि उन्हें बता सकूँ कि लड़कियां बोझ नहीं हैं।” प्रकाश कौर को भारत सरकार द्वारा उनके नेक काम के लिए पद्मश्री सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है.

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