Bhutan भूटान से हमें ये बातें जरूर सीखनी चाहिए

हमारे देश में पॉलुशन दिन पर दिन बढ़ रहा है, समुन्द्र में प्लास्टिक इकठ्ठा हो रहा है पानी की कमी बढ़ती ही जा रही है। मगर हमेशा की तरह हम कर क्या रहे हैं सिर्फ बाते बाते और बातें। मगर हमारा पडोसी देश भूटान ऐसा बिलकुल भी नहीं है क्योंकि अपने देश को पोलुशन फ्री और सबसे खुशहाल देश बनाने के लिए वहां की सरकार और ख़ुद भूटान के लोग हमेशा आगे रहते हैं।

भूटान में जितना कार्बन सालभर में पैदा होता है, उसे यहां के जंगल ही ख़त्म कर देते हैं। जानते हैं क्यों क्योंकि वो लोग अपने जंगलों को काटते नहीं है और एक हम हैं जो पहाड़ों पर लगातार कंस्ट्रक्शंस करते ही जा रहे हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा टूरिस्ट आ सके और अच्छा मुनाफा मिलता रहे। वहीं भूटान के लोग प्रकृति को भगवान मानते हैं। इसलिए वो प्रकृति की कद्र करते हैं। तो भगवान् तो प्रकृति को हम भी मानते हैं नदियों को माँ वायु को देव कहते हैं मगर बस हम उनका ध्यान नहीं रखते। भूटान की सबसे बड़ी ताकत ही यहां के जंगल। इसे दुनिया का सबसे हरा-भरा देश माना जाता है। प्रकृति के घिरे भूटान को दुनिया का सबसे ज्यादा ऑक्सीजन बनाने वाला देश माना जाता है। यहां के 70 फीसदी हिस्से में जंगल है। ऊंचे पर्वत, नदियों का साफ पानी और हरियाली यहां की खासियत है। इस खूबी के कारण भूटान पॉलुशन फ्री है।

Bhutan ने 1999 में ही लगा दिया था प्लास्टिक पर प्रतिबंध

प्लास्टिक कितनी खतरनाक है ये हम आज भी नहीं समझे तो क्या मगर इसे भूटान में बहुत पहले ही समझ लिया गया था। 1999 में यहां प्लास्टिक के कई सामानों पर प्रतिबंध लगाया गया था। तभी से भूटान में ये नियम लागू है। प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के नियम को यहां का हर नागरिक अभियान की तरह मानता है और सख्ती से इसका पालन भी करता है। लेकिन 20 साल बाद भी हमारे देश समेत कई देशों ने इस नियम को अपने यहां अभी तक लागू नहीं किया, रिजल्ट आपके सामने है। समुद्र की गहराई टनों प्लास्टिक कचरा पहुंच रहा है।

भूटान की हरियाली और स्वच्छता के चर्चे तो विदेशों में भी हैं। देश को और हरा-भरा बनाने के लिए 2015 में ‘सोशल फॉरेस्ट्री डे’ के मौके पर भूटान में 100 जवानों की टीम ने मिलकर एक घंटे में 49,672 पेड़ लगाए थे। सबसे ज़्यादा पेड़ लगाने के लिए भूटान का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। इस बार पिछले रिकॉर्ड के मुकाबले, 10 हजार ज़्यादा पेड़ लगाए गए। 2015 में हजारों लोगों ने भूटान के राजा-रानी के पहले बच्चे, राजकुमार ग्यालसे, के जन्मदिन का जश्न भी 1,08,000 पौधे लगाकर मनाया था। और हम, हम क्या करते हैं एक नेता अपने साथ 20 चेले लाकर एक पौधा लगाता है और उसे हर अखबार और न्यूज़ की हैडलाइन बनाया जाता है बस।

Bhutan के लोगों का है पर्यावरण से करीबी रिश्ता

पिछले साल भूटान में विश्व पर्यावरण दिवस को ‘पैदल दिवस’ के रूप में मनाने की पहल की गई थी। भूटान के यातायात विभाग ‘रॉयल भूटान पुलिस’ देशभर के शहरों में यातायात बंद रखा था। जिसे यहां के लोगों ने भी सख्ती से पालन भी किया था। इस दिन यहां के लोग ख़ुशी ख़ुशी पैदल चलते हैं सरकार को कभी कोसते नहीं है।

यही नहीं भूटान की ज्यादातर नीतियां ऐसी हैं जो पर्यावरण लोगों और दोनों की सेहत को दुरुस्त रखने का काम करती हैं। सिगरेट से भूटान की लड़ाई काफी पुरानी है। कहते हैं 1729 में तम्बाकू पर कानून लाने वाला भूटान पहला देश था। 1990 में यहां तम्बाकू और सिगरेट के खिलाफ अभियान और सख्त हुआ। नतीजा, भूटान के करीब 20 जिले स्मोक फ्री घोषित किए गए। उसके बाद तो 2004 में स्मोकिंग को पूरे देश में ही बैन कर दिया गया। यही नहीं सिगरेट और तम्बाकू के सेवन करते पकड़े जाने पर यहां सीधी जेल होती है और ज़मानत तक नहीं दी जाती। मगर हमारे देश में आए दिन लोग ज़हरीली शराब से मरते हैं तम्बाकू की वजह से कैंसर होता है लेकिन फिर भी इससे जुड़ा कोई सख्त क़ानून यहां नहीं बनता।

दिलचस्प बात है कि भूटान में एक भी वृद्धाश्रम नहीं हैं और यहां के लोगों का मानना है कि हमारे समाज में ऐसी जगह होनी भी नहीं चाहिए वो लोग वृद्धाश्रम को अपने समाज के लिए कलंक मानते है। भूटान में आज भी कई पीढ़ियां एक साथ, एक ही घर में प्रकृति की फिक्र के साथ रहती हैं। चाहे भूटान की जीडीपी भारत की तुलना में बहुत कम है मगर वहां के लोग प्रसन्नचित, संतुष्ट, प्रकृति से प्रेम करते हुए जीवन मूल्यों को देखते हुए आगे बढ़ रहे हैं। है ना कमाल की बात अगर भूटान की ये सारी अच्छी बातें हम भी अपने देश में लागू कर लें तो सोचिए हम भी अपने देश को कितना बेहतर बना सकते हैं।

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