Bachendri Pal -The First Indian woman to climb Mount Everest

कुछ कर गुजरने की चाह रखने वाले रास्ते में आने वाली मुसीबतों से नहीं घबराते। जहां सीढ़ियों से दूसरी मंजिल तक चढ़ने में ही हमारी सांस फूल जाती है, वहीं हमारे देश में ऐसी महिलाएं भी हैं जिन्होनें दुनिया की सबसे ऊंची पहाड़ियों पर अपने मजबूत कदम रखकर हमेशा के लिए अपनी छाप छोड़ दी। आज हम आपको भारत की एक ऐसी ही साहसी महिला बछेंद्री पाल के बारे में बताने जा रहे हैं।

बछेंद्री पाल, ये वहीं नाम है जिसने हिमालय की सबसे ऊंची चोटी माऊंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली देश की पहली महिला होने का खिताब हासिल किया है। तो वहीं अगर दुनिया की बात करें, तो वो ऐसा करने वाली दुनिया की 5वीं महिला हैं। 23 मई 1984, ये वहीं दिन था, जब बछेंद्री पाल ने दोपहर करीब 1 बजकर 7 मिनट पर माऊंट ऐवरेस्ट पर चढ़ने वाली भारत की पहली महिला होने का गौरव हासिल किया। तो वहीं उनके इस महान योगदान के लिए हाल ही में 26 जनवरी 2019 में उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।

Bachendri Pal ने एक स्कूल पिकनिक के दौरान की अपनी पहली चढ़ाई

Bachendri Pal,Mount Everest

बछेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 में उत्तराखंड के नाकुरी गांव में हुआ था.. और सिर्फ 12 साल की उम्र में एक स्कूल पिकनिक के दौरान बछेंद्री पाल ने पहली बार अपने दोस्तों के साथ एक 13,123 फीट ऊंची चोटी पर चढ़ाई की। और बस तब से बछेंद्री पर्वतारोही बनने का सपना देखने लगी। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बचपन से पढ़ाई और स्पोर्टस में अव्वल रहने वाली बछेंद्री राइफल शूटिंग में भी गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी हैं। और तो और बछेंद्री पाल अपने गाँव में ग्रेजुएशन करने वाली भी पहली लड़की है। हालांकि, इसके बाद घर वालों के कहने पर बछेंद्री ने संस्कृत में एम ए पूरी करने के बाद टीचर बनने के लिए बी. एड की पढ़ाई भी की।

लेकिन बछेंद्री अपने पर्वतारोही बनने के सपने को भुला ना सकी, और घरवालों के मना करने के बाद भी बछेंद्री ने नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग में एडमिशन ले लिया। अब बछेंद्री के सपनों को नए पंख मिल चुके थे। अपने सपनों की ओर पहली उड़ान भरते हुए 1982 में बछेंद्री ने गंगोत्री पर 21,900 फीट की ऊंचाई पर चढ़ाई की। ट्रेनिंग के दौरान बछेंद्री ने रुदुगरिया में 19,091 फीट की एक और सफल चढ़ाई की। बछेंद्री की कड़ी मेहनत से खुश होकर ब्रिगेडियर ज्ञान सिंह ने उन्हें बतौर इंस्ट्रक्टर पहली नौकरी दी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद बछेंद्री को भारत के माउंट एवरेस्ट मिशन, एवरेस्ट 84 की टीम में शामिल होने का मौका मिला। विश्व में इतिहास कायम करने वाली ये चढ़ाई एक तरफ तो बहुत ऊंची थी ही, लेकिन वहीं इस पहाड़ी पर चलने का सफर काफी मुश्किल भरा भी था।

बछेंद्री पाल के साथ 7 महिलाएं और 11 पुरुषों की एक टुकड़ी मई 1984 में मिशन पूरा करने के लिए निकल गई। चढ़ाई के दौरान लोटस ग्लेशियर में अचानक भूस्खलन आने से बछेंद्री और उनकी टीम के सदस्य बुरी तरह घायल हो गए। इस आपदा में सबके कैंप तबाह हो गए और आधी से ज्यादा टीम वहीं से बापस घरों की ओर रवाना हो गई। बछेंद्री अब इस टीम की अकेली महिला रह गई थी , लेकिन हार ना मानते हुए बछेन्द्री पाल ठान चुकी थी कि अब वो इस शिखर पर पहुंच कर ही दम लेंगी।

Bachendri Pal 1984 में सागर मत्था पर झंड़ा फहराकर किया देश का नाम रौशन

Bachendri Pal,Mount Everest

साहसी बछेंद्री बचे हुए साथियों के साथ आगे बढ़ती रही और 23 मई 1984 के दिन 1 बजकर 7 मिनट पर 8848 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद सागर मत्था पर भारत का झंडा फहराया। इस तरह बछेंद्री माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली दुनिया की पहली भारतीय महिला बन गई। आपको बता दें कि बछेंद्री पाल साहसी होने के साथ दिल की भी बड़ी अमीर हैं। बछेंद्री ने 2006 में उड़ीसा और 2013 मे उत्तर प्रदेश में आई आपदा के समय अपनी टीम के साथ मिलकर वहां फंसे लोंगो की मदद की।

बछेन्द्री पाल को अपने पर्वतारोहण करियर के दौरान बहुत सारे पुरस्कार और सम्मान मिले। भारतीय पर्वतारोहन फाऊंडेशन ने बछेंद्री को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। जहां 1985 और 2019 मे बछेंद्री पाल को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वही 1986 में बछेंद्री को अर्जुन अवार्ड और कलकत्ता लेडीज स्टडी ग्रुप अवार्ड से नवाजा गया। 1990 में उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में माउंट समिट करने पहली भारतीय महिला के रुप में शामिल किया गया।

हर साल नया रिकॉर्ड बनाती बछेंद्री को 1994 में राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार और 1995 में उत्तर प्रदेश सरकार से यश भारती पुरस्कार मिला। पढाई को जरुरी मानने वाली बछेंद्री ने अपने सपने तो पूरे किए ही साथ ही 1997 में हेमन्नती नंदन बहुगुणा यूनिवर्स्टी गड़वाल से पीएचडी की डिग्री भी ली। यहीं उनको शिरोमणी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। खैर अब बछेंद्री पाल टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन मे काम कर रही हैं, और वहां ये पर्वतारोहीयों को पर्वतारोहन के साथ अन्य खेलों में ट्रनिंग दे रही हैं। दोस्तो बछेंद्री पाल की ये कहानी किसी inspiration से कम नहीं है।  

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