हत्या, अपहरण, लूट-पाट ऐसी घटनाऐं आज इतनी आम हो गई हैं कि, ये खबरें किसी भी न्यूज पेपर से लेकर किसी भी हिस्से में क्यों न चल रही हो, किसी को इससे फर्क नहीं पड़ता. हाँ मगर जब भी कहीं इस तरह की घटनाऐं होती हैं तो निश्चित ही किसी […]

आज आपको एक ऐसी महिला से परिचित करवाने जा रहे है जो एक गृहिणी है, एक मां है एवं उन लाखों बच्चों की एक आस है जिन्हें हमारा समाज अपाहिज कहकर ठुकरा देता है इनका नाम है रीता सक्सेना यह एक बहुत ही अच्छी शिक्षिका है। रीता सक्सेना दिल्ली में रहती […]

अपनों से बिछड़ने का गम अक्सर इंसान उम्र भर नहीं भूल पाता. यही वजह है कि, कभी उसकी जिंदगी उसके इंतजार में गुज़र जाती है या फिर हर राह उसकी याद में कट जाती है. जहाँ इस साल पूरी दुनिया कोरोना वायरस के चलते दूसरों से लेकर अपनों तक सभी […]

अक्सर जब हम खेती-किसानी की बात करते हैं तो, सबसे पहले खेत में एक किसान हमारी कल्पनाओं में गूंज उठता है. जिसकी वजह है हमारा परिवेश. हमने खेती-किसानी को महज़ खेतों की मिट्टी से जोड़कर रख दिया है. या फिर यूँ कहें कि तन पर एक झन्नेदार बनियान और हाथों […]

हम अपनी ज़िदगी को बेहतर करने की खातिर क्या करते हैं, कितना करते हैं. यही दिखाता है कि, हम अपनी ज़िदगी में कितना कुछ पाते हैं. इसकी वज़ह ये है कि, हमारी ज़िदगी में हमेशा चुनौतियां आती रहती हैं और हमें उन्हें उसी तरह पार पाना होता है. जैसे हम […]

अगर आप भारतीय हैं तो अपनी सुबह की शुरूआत बिना चाय के शायद ही करते हों, जिसकी खास वज़ह है हम सभी सुबह की गर्म चाय के आदि हो चले हैं. हममें से भी ऐसे न जानें कितने हैं जो चाहते हैं कि, उन्हें बिस्तर में ही चाय मिल जाए. […]

देश में जिस समय टेलीविजन का चलन हुआ था. उस समय गाँव से लेकर शहरों तक में टेलीविजन देखने के लिए पूरा परिवार इकट्ठा हो जाता था. टेलीविजन पर उस समय दूरदर्शन आता था. जो शायद ही आज के समय में कोई देखता है. इसकी खास वजह है आज की […]

देश को आज़ाद कराने की खातिर अनेकों देशभक्तों से लेकर अनेकों वीरों ने अपनी जान गंवाई है. यही वजह है कि, आज भी आज़ाद भारत उन सभी का शहीदों का ऋणी है. ऐसे में जिस समय भारत आज़ाद हुआ वो एक ऐसा समय था. जब भारत में रह रहे नेताओं […]

रास्ते से गुजरते किसी बोर्ड पर, किसी होर्डिंग पर, किताबों पर या फिर पेड़ पौधों के सुरक्षा कवच पर हम हमेशा से पढ़ते हैं कि, वन नहीं तो जन नहीं, वृक्ष लगाओ जीवन बचाओ….और पढ़कर इन्हें नज़रअंदाज कर देते हैं. जिसकी महज़ एक वजह है कि हमें पढ़कर भूलने की […]

दुनिया जैसे जैसे विकास की ओर अग्रसर है. वैसे वैसे दुनिया से इंसानियत खत्म होती जा रही है. किसी की परवाह खत्म होती जा रही है. इसकी शायद बस एक वज़ह है कि, खुद की परवाह और लोभ. लेकिन इसके अलावा भी कुछ गिने चुने लोग फिर भी उस अपवाद […]