भारत की वो अनोखी जगह जहां पैसा, धर्म और पॉलिटिक्स के लिए कोई जगह नहीं

हमारी सामाजिक जिंदगी में दो चीजें हैं जो हमारी जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर करती हैं। ये हैं पॉलिटिक्स और रिलिजन, यानी धर्म और राजनीति। वहीं अगर ये दोनों मिल जाए तो फिर क्या हो सकता है, ये बताने की जरूरत नहीं है। धर्म और राजनीति के मिलन से पनपने वाली स्थिति हर साल हमारे देश के किसी न किसी हिस्से में दिख ही जाती है। लेकिन हमारे इसी देश भारत में एक ऐसी जगह भी है, जहां धर्म और पॉलिटिक्स के लिए कोई जगह नहीं है। यानि कि इस जगह पर न कोई सरकार है और न कोई धर्म विशेष का बोल बाला। इस जगह का नाम है ओरोविल।

Auroville पुडुचेरी के नजदीक तमिलनाडु के विलुप्पुरम में स्थित है। इस शहर को लेकर कहा जाता है कि ये शहर सूर्योदय का शहर है। आज यहां दुनिया के किसी भी हिस्से या देश का रहने वाला इंसान यहाँ आकर बस सकता है। ना उससे उसका धर्म पूछा जाता है न हीं उससे उसकी राष्ट्रीयता। ये जगह मानवीय संवेदना का चरम स्थान है। यह जगह एक तरह की यूनिवर्सल टाउनशिप है। जहां आज 2400 से ज्यादा लोग रहते हैं। ये दुनिया भर के देशों, जाती, धर्म और नस्ल के है। लेकिन यहां बाकी जगहों की तरह धार्मिक कट्टरता और राजनीति जैसे कोई चीज नहीं है। इस टाउनशिप को बसाने वालों का मन था कि, ये जगह भारत में बदलाव की बयार लेकर आएगा।

किसने बसाया Auroville: The City of Dawn

Auroville: The City of Dawn

ओरोविल का मतलब एक यूनिवर्सल घर से है। जहां दुनिया के सभी लोग जाति, धर्म, नस्ल और राजनीति से ऊपर उठकर एक साथ रह सकें। ये जगह वैश्विक मानव एकता को दर्शाती है। ऐसी महान सोच पर Auroville की नींव श्री औरबिंदो घोष की साथी Mirra Alfassa ने 28 फरवरी 1968 को रखी थी। लोग उन्हें ‘मां’ कहकर बुलाते थे।

इस जगह को बनाने के लिए इसका डिजाइन रोजर अंगर ने तैयार किया था।

Mirra Alfassa मूल रूप से फ्रांस के पेरिस की रहने वाली थीं। वे पहली बार भारत 1914 में आईं और श्री अरबिंदो से मिली। उनके अनुसार उनसे मिलने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि ये वहीं हैं जिनके बारे में उन्हें बचपन में सपने आते थे। वे श्री अरबिंदो की शिष्या बन गईं। श्री घोष उन्हें माता कहते थे, जिसके कारण उनके अनुयायियों ने उन्हें श्री मां कहना शुरू कर दिया। मीरा के कारण ही श्री अरबिंदो का ज्ञान दुनिया तक पहुंचा। अपने पहले भारत दौरे में उन्होंने प्रियोडिकल आर्य का फ्रेंच वर्जन पब्लिश करवाया जिसमें अरबिंदो की लेखनियों का संग्रह था। उन्होंने ही साल 1926 में अरबिंदो आश्रम की स्थापना पुडुचेरी में करवाई।

Auroville: The City of Dawn

श्री अरबिंदो का मानना था कि इंसानी जीवन को आध्यात्मिक जीवन की ओर मोड़ना चाहिए। क्योंकि आध्यात्मिकता का ज्ञान हीं वो ज्ञान है, जो इंसान को सभी बंधनों से मुक्त करता है। साथ ही उसके विचारों की संकीर्णता को बदलता है। और इसी से धरती पर एक सुखमय जीवन का अवतरण हो सकता है। यही वो विचार है जिसकी नींव पर मीरा ने ऑरोविल की टाउनशिप खड़ी की। मीरा की मृत्यु 17 नवंबर 1930 को हुई।

Auroville की स्थापना के लिए भारत सरकार की रजामंदी के बाद इसे यूनिस्को के सामने रखा गया। जहां एक रिजॉल्यूशन पास कर इसके निर्माण की अनुमति दी गई। इस रिजॉल्यूशन का समर्थन भारत समेत यूनिस्को के सदस्य देशों ने किया। इसकी स्थापना के समय यूनिस्को के सदस्य 121 देश अपने यहां की मिट्टी लेकर आए थे, जिसे एक संगमरमर के कमल के आकार के बने कलश में रखा गया। ये काम यहां स्थित एक बरगद के पेड़ के नीचे हुआ।

Auroville में क्या है खास

Auroville: The City of Dawn

Auroville का मतलब होता है उषा की नगरी, यानि नवजागरण का स्थान। इसकी स्थापना भी इसी विचार पर हुई है। एक यूनिवर्सल टाउनशिप होने के कारण इसकी अपनी कुछ खासियतें हैं। मीरा अल्फांसो यानि कि, मां ने इस जगह को लेकर चार सूत्री घोषणा पत्र जारी किया था।

  • – Auroville किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है। ओरोविल समग्र रूप से पूरी मानवता का है। लेकिन ओरोविल में रहने के लिए व्यक्ति को दिव्य चेतना की सेवा के लिए तत्पर होना चाहिए।
  • – Auroville सतत शिक्षा, निरंतर प्रगति और सनातन यौवन का स्थान होगा।
  • – Auroville भूत और भविष्य के बीच का पुल बनने का आकांक्षी है। वाह्य और भीतरी सभी प्रकार के आविष्कारों का लाभ उठाते हुए ओरोविल भविष्य की अनुभूतियों की तरफ निर्भीकता से आगे बढ़ेगा.
  • – Auroville एक वास्तविक मानवीय एकता के जीवरूप शरीर के लिए भौतिक और अध्यात्मिक अनुसंधान का स्थान होगा।

Auroville को लेकर जो सबसे अनोखी बात लोगों को यहां खींचती है। वो है यहां रुपया या पैसा का न चलना। यहां आने वालों को एक अकाउंट खुलवाना पड़ता है जो सेंट्रल अकाउंट से जुड़ा हुआ होता है। वहीं जो विजिटर्स यहां आते हैं। उनके लिए एक टेंपररी अकाउंट ओपन होता है और एक खास तरह का डेबिट कार्ड इन्हे दिया जाता है जिसे औरो कार्ड कहते हैं। यहां रहने वाले लोग अपनी कमाई का कुछ हिस्सा कम्युनिटी के वेलफेयर के लिए देते हैं। इसके अलावा उनसे अपेक्षा की जाती है कि जब भी जरूरत हो तब वे तन, मन या धन से अपना योगदान करेंगे। ऑरोविल के सेंट्रल फंड का बजट का 33 फीसद हिस्सा यहां के कमर्शियल यूनिट्स से आता है। जबकि भारत सरकार भी कुछ योगदान करती है। वहीं यहां एक मेंटेनेंस डिपार्टमेंट है। जहां से यहां रहने वाले लोग अपनी जरूरत के हिसाब से आर्थिक मदद ले सकते हैं। इस जगह पर घरों के मालिक उसमें रहने वाले नहीं बल्कि ओरोविल फाउंडेशन है।

Auroville: The City of Dawn का सिटी प्लान

Auroville: The City of Dawn

पूरा Auroville: The City of Dawn 6 पार्ट में बंटा है। इस टाउनशिप के केंद्र में पीस एरिया है। जहां बड़ा सा गोल्डन स्परिकल वाला एक मंदिर है। जिसे माता मंदिर कहा जाता है। इसके चारों ओर गोलाकार गार्डन है, जिसमे संगमरमर का कलश है जिसमें 121 देशों और भारत के 21 राज्यों की मिट्टी है। वहीं इस गार्डन में वाटर रिचार्ज के लिए एक झील है जो यहां के वातावरण को शांतिमय बनाता है। पीस एरिया के बाद इंडस्ट्रियल जोन है, जिसमें ग्रीन इंडस्ट्रीज है। ये 109 हेक्टेयर में फैला है। इसका मुख्य उद्देश टाउनशिप को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके बाद एक 189 हेक्टेयर का रेजिडेंशियल एरिया है। जिसका 55% भाग ग्रीन है और 45% भाग में बिल्डिंग है।

रेजिडेंशियल एरिया के बाद 93 हेक्टेयर का कल्चरल जोन है। ये शिक्षा, रिसर्च और आर्ट को समर्पित भाग है। इसके बाद एक बड़ा सा ग्रीन बेल्ट एरिया है। जो इन सभी भागों के गोलाकार रूप में घेरे हुए है। इसका रेडियस 1.25 km है। ये मौजूदा रूप से 405 हेक्टेयर में फैला है जहां पशुपालन और अन्य वन्य जीवों के रहने के लिए जगह छोड़ा गया है। यह बाहरी अतिक्रमण से बचाव में भी काम आता है।

भारत के संविधान में एक अलग जगह

जैसा कि ऊपर कहा गया है कि ओरोविल किसी एक का नहीं, लेकिन ये जगह तो भारत में है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या ये जगह स्वतंत्र है? इसका जवाब भारतीय संविधान में मिलता है।

ओरोविल को लेकर श्री मां का मानना था कि, इसकी स्वतंत्रता पर भारत सरकार एक खतरा है। उनके मरने के बाद ऐसा ही हुआ। 1980 में भारत सरकार ने एक इमरजेंसी ओरोविल प्रोविजनल एक्ट पास किया और इसके मैनेजमेंट को अपने हाथों में ले लिया। जिसके खिलाफ यहां की सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील किया, कोर्ट के अंतिम फैसले में सरकार के हस्तक्षेप को संवैधानिक तौर पर वैध माना गया।

1988 में Aurovillie मैनेजमेंट के लिए एक बढ़िया अरेंजमेंट करने की आवश्यकता महसूस हुई। इस समय सरकार में शिक्षा सलाहकार किरीत जोशी जो इस टाउनशिप के रिप्रेंटेटिव भी थे, उन्होंने राजीव गांधी से इसपर बात की और 1988 में The Aurovillie Foundation Act संसद में पास हुआ। इस एक्ट के तहत यहां की सारी चल और अचल संपत्ति फाउंडेशन के अधीन आ गई। यहां तीन स्तर वाला गवर्निंग सिस्टम (गवर्निंग बोर्ड, रेजिडेंट असेम्बली और ओरोविल इंटरनेशनल एडवाइजरी काउंसिल) लागू किया गया। ओरोविल फाउंडेशन मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स के तहत आने वाला एक ऑटोनोमस बॉडी है।

Aurovillie भारत सरकार के अंदर होते हुए भी स्वतंत्र है। यह आज भी अपने मानवता के एकता के संदेश की नींव पर टिका हुआ है। ये भारत के वसुधैव कुटुंबकम् वाली नगरी का एक जीवित प्रमाण है। जहां दुनिया भर के लोग भाषा, धर्म, जाती, रंग आदि के भेद के बाद भी बिना मतभेद के एक साथ रहते हैं। यहीं तो हमारे भारतीयता की पहचान है।

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