नॉर्थ ईस्ट का मिरेकल ‘The People’s Road’

मिरेकल का मतलब समझते हैं,  हिन्दी में इसका मतलब होता है चमत्कार। लेकिन यह चमत्कार क्या होता है? क्या कभी सोचा है आपने? शायद चमत्कार का मतलब होता है जो आम इंसान नहीं कर सकता! लेकिन इस दुनिया में ज्यादातर चमत्कार इंसानों ने ही किये हैं। कहते हैं कि, इंसान की इच्छा शक्ति के आगे बड़े से बड़ा पहाड़ भी कुछ नहीं है। यही सोच जब धरातल पर आ जाती है तो शायद वही चमत्कार कहलाता है।

Armstrong Pame

लेकिन क्या आप सड़क के बनाने को चमत्कार मानेंगे? कहेंगे भला सड़क का बनना चमत्कार कैसे हो सकता हैं? इस सवाल का जवाब जानना है तो कई उदहारण है और इन्हीं में से एक है नॉर्थ-ईस्ट के तीन राज्यों का जोड़ने वाली सड़क ’द पीपुल्स रोड’। दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में मक्खन वाली सड़के आम बात हैं, लेकिन नार्थ-ईस्ट के गांवो में एक पक्की सड़क का होना भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। शहर फास्ट और गांव स्लो इसलिए है क्योंकि सड़के हर जगह एक जैसी नहीं हैं। इसके अपने कारण हैं।

असम, नागालैण्ड और मणिपुर को जोड़ने वाली सड़क ’द पीपुल्स रोड’ अपने आप में एक चमत्कार कैसे है यह बताएंगे लेकिन सबसे पहले आपको मिलाते हैं उस मिरेकल मैन से जिनके कारण गांव में पीढ़ियों बाद एक अच्छी सड़क बनी और लोगों ने उसे बनाने में अपनी जान की बाजी लगा दी। उस व्यक्ति का नाम है ’आर्मस्ट्रांग पामें’। आर्मस्ट्रांग तामेंगलांग के रहने वाले हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब वे छोटे थे तो बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे, उस समय छूट्टियों के बाद स्कूल जाने का रास्ता 60 किमी. का था, तब उन्हें बीच के गांवों में रूककर रात काटनी होती थी। स्कूल पहुंचने में 2 दिन लग जाते थे। आर्मस्ट्रांग पामे एक आईएएस ऑफिसर हैं। जिन्होंने बैचलर की पढ़ाई दिल्ली से की और फिर सिविल सेवाओं की तैयारियां करने लगे। इस दौरान वे आईआरएस बने। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी और आईएएस बन गए। इसके बाद उन्हें तामेंगलांग में पोस्टिंग मिली और फिर उन्होने अपने लोगों के लिए वो काम किया जिससे उनका नाम ’मिरेकल मैन’ पड़ गया।

Armstrong Pame को क्यों कहा जाता है Miracle Man?

’द पीपुल्स रोड’ के बनने की कहानी के बारे में बताते हुए आर्मस्ट्रांग पामे कहते हैं कि, जब लोग अपनी कम्यूनिटी के किसी युवा को बड़े ओहदे पर देखते हैं तो उम्मीद जताते हैं कि, वह उनके लिए कुछ करेगा। यहां के लोगों को भी ऐसी उम्मीदें थी। उन्होंने जब मुझे देखा तो उनकी उम्मीदें बढ़ गईं। जिले के गांवो में घूमने के दौरान ही पामें को किसी बुर्जुग ने रोड़ बनवाने की बात कही। जो उनके पुरखों के समय से ही बदत्तर हालत में थी। यह सड़क उस गांव से जिले के हेडक्वाटर के बीच थी। वहीं हेडक्वाटर के आगे एक पहाड़ था जिसके आगे नागालैण्ड से एक हाइवे आती थी। लेकिन बीच में पहाड़ के कारण दोनों जगहों को जोड़ने के लिए कोई सड़क नहीं थी।

पामें ने पहले तो इसका एक रफ स्केच तैयार किया फिर उन्हें पता चला कि इसमें बहुत सा खर्चा आएगा। इसपर पामे ने अपने भाइयों से कुछ मदद ली और अपनी मां की पेंशन तक को इस काम में लगाया। इसके बाद पामें गांव वालों के पास पहुंचे और उनसे सहयोग करने की बात कही। गांव वालों ने भी हर तरीके का सहयोग देने के लिए हामी भरी। इस एक घटना के बारे में बताते हुए पामें ने एक इंटरव्यू मे कहा था कि जब लोगों से मैने कहा कि हमें हर तरह से मिलकर इसमें अपना सहयोग देना होगा तो कई लोगों ने खड़े होकर अलग-अलग तरीके से मदद करने की बात कही।कोई अपनी रोज की कमाई देने को तैयार हो गया। तो कोई मजदूरों के लिए खाना बनाने को, कोई काम करने को तो वहीं कुछ महिला समूहों ने अपनी जमा पूंजी तक इसमें लगा दी। साथ ही वे कई दिनों तक अपना घर छोड़ सड़क बनाने में जुटे रहे।

लोगों की एकजुटता का जीता जागता उदाहरण The Peoples Road

पामें बताते हैं कि, हमारी पुरानी परंपरा रही है एक दूसरे की मदद करना, हमने इसी चीज को अप्लाई किया और नतीजा देखने लायक था। पामें के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने न सिर्फ इस रोड में अपने पैसे लगाए थे बल्कि फेसबुक के जरिए भी 40 लाख रुपये जुटाए थे। लेकिन पामे बताते हैं कि, मैने सिर्फ एक शुरूआत की थी। मैने कोई फंड कभी रेज नहीं किया। इसमें लोगों का सहयोग था, जिसने काम किया और इसलिए सड़क का नाम ’द पीपुल्स रोड’ है।

इस एक रोड के बनने के कारण नार्थ-ईस्ट के तीन राज्य एक सड़क से जुड़ पाए। करीब 100 किमी लंबे ’द पीपुल्स रोड’ के कारण लोगों का जीवन पहले से सुगम हुआ है। सच में यह अपने आप में एक चमत्कार है। इस काम के लिए पामें को 2015 में मोस्ट इमिनेंट ऑफिसर के अवार्ड से नवाजा गया था। इससे पहले 2012 में उन्हें सीएनएन इंडियन ऑफ इयर भी चुना गया। वे अमिताभ बच्चन के संग एक शो में भी दिखे थे।

’द पीपुल्स रोड’ सच में एक मिरेकल है क्योंकि इसकी कहानी में बदलाव की एक चाहत है, उस बदलाव के लिए उतावलापन है, अपनी कम्यूनिटी के लिए कुछ करने का इरादा है। एकजुटता से अपनी तकदीर खुद बदलने का डिटरमिनेशन है। यहीं तो इंडियनेस है हमारे देश की और ’द पीपुल्स रोड’ इसी बात का एक जीता जागता प्रमाण है।

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