Angrezi Medium, अपनी भाषा भूलने का जरिया

आदमी का सपना टूट जाता है ना, तो आदमी खतम हो जाता है. (डॉयलाग- Angrezi Medium)…भले ही ये वाक्य कुछ शब्द में खत्म हो जाता है. हालांकि इस एक वाक्य में कितना कुछ है. ये शायद वही समझ सकता है. जिसने या तो कुछ खोया हो, या फिर सपना देखने के बावजूद भी वो सपना पूरा ना हुआ हो…इतिहास ग्वाह है कि, हमारा भारत हजार सालों तक गुलाम रहा. जहाँ पहले मुगलों से लेकर मुस्लिम शासकों ने कुछ साल राज किया. उसके बाद अंग्रेज भारत आए और फिर क्या हुआ हर एक इंसान जानता है. यानि कि, भारत उसके बाद 200 सालों तक गुलाम रहा. उसके बाद देश के अंदर आजादी का एक जूनून जगा और भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया और हमें गोरो से आजादी मिल गई.

वहीं दूसरी तरफ हमारे देश को अगर आज दुनिया जानती है, तो उसकी सबसे बड़ी और खास वजह यहां की विविधता, सभ्यता और यहां की भाषा-बोली है. क्योंकि हमारे यहां कहा जाता है कि, “कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी.” हकीकत भी कुछ इसी तरह है. क्योंकि हमारे यहाँ पूरी दुनिया से परे न जानें कितनी ही बोलियां और सभ्यताऐं हैं….जो पूरे भारतवर्ष को पूरी दुनिया में सबसे खास दर्ज दिलाती हैं.

हालांकि आज सबसे दुर्भाग्य की बात ये है कि, ये भाषाऐं-ये बोलियां दिन-प्रतिदिन खत्म हो रही हैं. जिसकी खास वजह है अंग्रेजी (English). क्योंकि हम अंग्रेजी जानने और उसको पढ़ने में इस तरह रम गए हैं कि, हम अपनी विरासत और अपनी भाषा और बोलियों से कैसे दूर हो रहे हैं, मालूम ही नहीं चल रहा.

जैसे पहले के समय में हमारे पूर्वज कहावत कहा करते थे, ठीक उसी तरह कि एक कहावत है. जोकि आज के समय में प्रचलित है. जिसमें कहा जाता है कि, अगर हिंदी आपकी माता है तो अंग्रेजी आपकी बीबी है. जिसका सीधा सा मतलब बस इतना है कि, हमें अपने देश में रहना है तो, अपनी भाषा चाहे वो हिंदी, उर्दू, मराठी कुछ भी क्यों न हो. हां मगर आपको अंग्रेजी आनी चाहिए. ताकि, जब कहीं भी आप नौकरी करने जाओ तो लोगों के बीच Hello, How are You बोल सको. जिससे आपका स्टेट्स मेंटेन हो सके.

खैर, इरफान खान की फिल्म Angrezi Medium का ट्रेलर जिसमें इरफान शुरूवात में ही एक लाईन इंग्लिश की बोलते हैं कि, खैर वो क्या कहते हैं. ये शायद जानने का विषय नहीं है. हां मगर जानने का इतना सा मतलब है कि, हम सभी अंग्रेजी के खुमार में कुछ इस तरह रम गए हैं कि, वास्तव में हमने अपनी भी भाषा से दूरी बना ली है. वो भी महज इस बात के लिए ताकि हम अपना एक स्टेट्स बना सकें.

क्योंकि उन्हें अपनी क्षेत्रीय या भी यूं कहें मातृ भाषा बोलने में शर्म आती है. यही नहीं आज हम सभी चाहते हैं कि, हमारा बच्चा पैदा हो उसके तुरंत बाद ही अंग्रेजी में बात करनी शुरू कर दे…क्योंकि अंग्रेजी का महत्व सबसे ज्यादा है.

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