ग्रीन हीरो सदिमान, जिसने बदल दी अपने क्षेत्र की पूरी तस्वीर, लगा ड़ाले 11 हज़ार बरगल-पीपल के पेड़

हमेशा हम अपने देश की तमाम बेहतरीन इंसानों से लेकर, बेहतरीन कामों को आपके सामने लेकर आते हैं. हालांकि आज की स्टोरी काफी अलग है. क्योंकि आज की स्टोरी हमारे देश की नहीं Indonesia की स्टोरी है. आज पर्यावरण के नाम पर महज़ गिने चुने लोग हैं. जो इस तरह ध्यान दे रहे हैं. पर्यावरण को लेकर सरकारों की नीतियां न तो कारगर होती हैं. न ही सरकारें इस तरह ज्यादा ध्यान देती हैं. यही वजह है कि, आज पूरे देश से लेकर दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या सबसे ज्यादा है.

भारत की बात करें तो, हमारे देश के कई शहर पूरी दुनिया में सबसे दूषित शहरों में से एक हैं. लेकिन आज हम आपको जिस इंसान के बारे में बताने जा रहे हैं. उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर ऐसा कारनामा किया है. जिसने वहां के क्षेत्र को ही बदलकर रख दिया. जिन्हें आज Indonesia में लोग ग्रीन हीरो के नाम जानते हैं. जिसकी शुरुवात उन्होंने आज से लगभग 24 साल पहले की थी.

Indonesia के रहने वाले Sadiman ने जिस समय बंजर पड़े इलाके पर 24 साल पहले पेड़ लगाने की कवायद की शुरुवात की थी. उस समय उनके गांव के लोग उन्हें पागल कहते थे. लोगों का मानना था कि, वो बेवजह ही मेहनत करता है. हालांकि आज उसी हरियाली को देखकर वहां के लोग फूले नहीं समाते. पर्यारवण की खातिर कुछ कर गुजरने की चाह रखने वाले सदिमान को न तो लोगों के बोलने से कोई फर्क पड़ा. न ही कोई चीज़ इस संरक्षण के सामने आई.

Indonesia Eco Warrior Sadiman

Indonesia Eco Warrior Sadiman

दरअसल Sadiman जिस इलाके में रहते हैं. वो सूखा ग्रस्त इलाका है. इसके बावजूद भी सदिमान जिस पहाड़ पर पेड़ लगाते थे. वहां पानी लेकर जाते. आज की उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि, 69 साल के सदिमान को वहां के लोग प्यार से ‘Mbah’ यानि की “दादाजी” कहते हैं. अपने पूरे क्षेत्र में हरियाली लाने की खातिर सदिमान ने अपनी जिंदगी के 24 साल Indonesia के सेंट्रल जावा में बिता दिए. कहते हैं कि, इलाके में आग लगने की वजह से सब कुछ जलकर खाक हो गया था. सूखा इस तरह था की नहरें-नदियां तक सब सूख चुकी थी. लेकिन सदिमान ने अपनी मेहनत और पर्यारवण के संरक्षण की बादौलत एक बार फिर उन्हें जीवत कर दिया है.

Sadiman कहते हैं कि, “मैंने सोचा कि, अगर मैं बरगद के पेड़ नहीं लगाऊंगा तो हमारा इलाका पूरी तरह से सूख जाएगा. जितना मुझे मालूम था की बरगद और पीपल के पेड़ के आस-पास ढेर सारा पानी स्टोर होता है. इसलिए मैंने इन पेड़ों को सबसे अधिक लगाया.”

Indonesia Eco Warrior Sadiman

अब तक लगभग 11,000 बरगद और पीपल के पेड़ लगाने वाले Sadiman ने लगभग 617 एकड़ इलाके में एक फिर से हरा भरा जंगल तैयार कर दिया है. जिसकी फायदा यह हुआ कि, इस इलाके में पानी रुकने की शुरुवात हो गयी. साथ ही भूस्खलन जैसी समस्या भी पूरी तरह से खत्म हो गई. आज उनही मेहनत का ही नतीजा है कि, एक समय इस क्षेत्र को सूखा ग्रस्त घोषित कर दिया गया था. हालांकि इस समय वहां पानी की किल्लत खत्म हो चुकी है. लोगों के पास अब इतना पानी है कि, वो उस पानी का इस्तेमाल अपने खेतों की सिंचाई के लिए भी करते हैं.

Sadiman कहते हैं कि, “एक समय था. जब लोग मुझे शक की नज़रों से देखते थे. खासकर उस समय जिस समय मैं बरगद और पीपल के पेड़ गांव में लेकर आता था. उन्हें ऐसा लगता था कि, इन पेड़ों पर भूत रहते हैं. हालांकि इनके अलावा मैंने और भी कई तरह के पेड़ लगाए. जैसे कटहल, लौंग और भी कई अन्य तरह के पौधे. उन्हीं के चलते मेरी थोड़ी बहुत कमाई होती है. लोग इन्हें खरीदते हैं.”

Indonesia Eco Warrior Sadiman

ज़ाहिर है कि, पर्यावरण का संक्षरण भले ही सरकारों की जिम्मेदारी है. हाँ मगर जितनी जिम्मेदारी सरकार की है. उससे कई ज्यादा जिम्मेदारी हर एक देश के नागरिक की है. वक्त है उसके प्रति सजग होने का है, Eco Warrior बनने का है. अपने आस पास खाली पड़ी ज़मीनों पर फिर से हरियाली लाने का. ताकि हम भविष्य में आने वाली समस्याओं को कुछ और पीछे ढ़केल सकें.

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