67 सालों से इस गांव पर राज कर रहे हैं भूतिया जवान

हमारे देश में कई ऐसी जगह हैं जिन्हे भूतिया कहा जाता है। शायद इसलिए कि इन जगहों से जुड़ी हैं कुछ अनहोनी जिसकी वजह से ये जगह हमेशा हमेशा के लिए बदनाम हो गई हैं। एक ऐसा ही गांव है जहां कुछ ऐसी घटना हुई जिसके बाद वो गांव हमेशा हमेशा के लिए खाली हो गया और फिर कभी ये गांव बस नहीं सका। क्योंकि इस गांव पर आजतक भूतों का राज़ है।

भारत में एक ऐसा गांव है, जहां इंसान नहीं बल्कि भूत रहते है। यही वजह है कि ये गांव बिल्कुल खाली पड़ा है। इस गांव का हर घर वीरान है। लेकिन ऐसा क्या हुआ होगा, जो ये गांव भुतिया बन गया। इस गांव के वीरान और भुतिया होने के पीछे बहुत दर्द भरी कहानी है।

Swala Village – खाई में गिरने से हुई थी 8 जवानों की मौत

इस गांव का नाम ‘स्‍वाला’ है, जो उत्तराखंड के चंपावत जिले में है। 1952 में गांव में एक ऐसी घटना हुई, जिसके बाद यहां सब बर्बाद हो गया। 1952 में एक दिन गांव से बटालियन की पी.ए.सी की एक गाड़ी जा रही थी, जिसमें आठ जवान सवार थे। मगर ये गाड़ी खाई में गिर गई।

गाड़ी में फसे जवान मदद के लिए बुरी तरह चिल्लाने लगे। मगर गांव वाले जवानों को बचाने की बजाए उनका सामान लूटने लगे। बहुत देर तक इन जवानों की मदद किसी ने नहीं की और लोग बस सामान ही लूटते रहे। आखिर मदद ना मिलने के कारण जवानों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

कहते है उस घटना के बाद जवानों की आत्माएं उस गांव में भटकने लगी। इन जवानों की आत्माएं किसी को दिखाई तो नहीं देती थी मगर गांव में बहुत अजीब घटनाएं होने लगी। आत्माओं ने गांव में इतना कोहराम मचाया कि गांव वालों का जीना मुश्किल कर दिया था। लोग बीमार होने लगे आर्थिक संकट से झूझने लगे। गांव वालों की खुशियां मानों जैसे किसी ने छीन ली हों।

Swala Village – बस एक हादसे ने बदली इस गांव की पूरी तस्वीर

गाँव वालो को लगता था जैसे कोई और भी उनके साथ चल रहा है। इन सब घटनाओं से तंग होकर एक दिन गांव वाले गांव छोड़ कर भाग गए। धीरे धीरे इस गांव के भुतहा होने की खबर आस पास भी फैलने लगी लगी। जिसके बाद किसी ने भी इस गांव में जाने की भी कोशिश नहीं की। इस गांव के कोसो दूर तक कोई इंसानी गांव नहीं बसा हुआ है। लोग कहते है कि गांव में जवानों की आत्माएं आज भी भटकती है, इसीलिए ये गांव वीरान पड़ा है।

मगर कुछ समय बाद गांववालों ने जिस खाई में जवानों की गाड़ी गिरी थी, उस जगह पर जवानों की आत्मा की शांति के लिये नवदुर्गा का मंदिर बनवाया। मगर फिर भी इस जगह पर रहना तो दूर जाना तक लोग पसंद नहीं करते हैं। कभी एक समय था जब यहां लोग बसा करते थे लेकिन 1952 में हुए एक हादसे के बाद सब कुछ बदल गया। तब से लेकर अभी तक इतने सालों से ये गांव वीरान पड़ा है और ना जाने कब तक ये गांव ऐसे ही वीरान रहेगा।

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