21 साल की इंजीनियर सरपंच, जिसने बना दिया अपना पूरा गांव हाईटेक

किसी भी सरपंच का नाम सुनते ही हमारे ज़हन में सबसे पहला ख्याल यही आता है कि, गांव का मुखिया. हकीकत भी कुछ ऐसी है. सरपंच ही अपने गांव में विकास से लेकर वहां के छोटे मोटे मामले निपटाने में मदद करता है. लेकिन ऐसे बहुत कम ही सरपंच हमारे देश में मौजूद हैं. जिन्होंने अपने पूरे गांव का काया ही बदल दी हो.

यही वजह है कि, इन दिनों हरियाणा की एक सरपंच का नाम काफी दिनों से चर्चा में बना हुआ है. वजह है उनकी लगन और उनकी मेहनत. जिन्होंने अपने मेहनत और लगन के चलते ही अपने गांव को पूरी तरह बदल दिया है. जोकि लोगों के लिए आज भी गांव ही है. हालांकि वहां की सुविधाऐं किसी शहर से भी कई गुना बेहतर हैं.

प्रवीण कौर

आज उनके गांव की गलियों में गली-गली सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है. हर गली में सोलर लाइट्स लगी हुई हैं साथ एक में बच्चों के पढ़ने के लिए लाइब्रेरी तक बनी हुई है. जहां बच्चें हो या फिर बड़े हो सभी लोग जाकर पढ़ सकते हैं. और ये सब करने वाली सरपंच का नाम है प्रवीण कौर.

गांव को बेहतर बनाना सपना- प्रवीण कौर

हरियाणा के कैथल जिले के गांव ककराला कुचियां की युवा सरपंच प्रवीण कौर जिस समय 21 साल की थी. उस समय अपने गांव की सरपंच बनी थी. कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली प्रवीण कौर ने पढ़ाई पूरी करने के बाद किसी जगह नौकरी करने का मन नहीं बनाया. उसकी महज़ एक खास वजह थी कि, वो हमेशा से गांव में दिलचस्पी रखती थी. गांव को बेहतर बनाने के सपने देखती थी. गांव के विकास की बात करती थी.

यही वजह थी की साल 2016 में पढ़ाई पूरी कर अपने गांव वापस लौटी प्रवीण कौर ने अपने पिता की मदद से सरपंच का चुनाव लड़ा और 21 साल की उम्र में गांव की सरपंच बन गई. जिसके बाद शुरू हुआ गांव के विकास का सफर, गांव को हाईटेक बनाने का सफर.  

प्रवीण कौर

प्रवीण अपने सरपंच बनने के सफर को लेकर कहती हैं कि, मुझे हमेशा से गांव से लगाव रहा है.
“मुझे यहां की सड़कों से लेकर यहां के स्कूल, पानी या गांव की कोई भी समस्या क्यों ना हो सभी में खामियां नज़र आती थी. इसलिए मैंने तय किया था की मैं बड़ी होकर अपने गांव के लिए जरूर कुछ न कुछ करूंगी.”

यही वजह है की जिस समय प्रवीण गांव की सरपंच बनी. उन्होंने अपने पूरी गांव की सभी समस्याओं की लिस्ट तैयार कर ड़ाली. उसके बाद उन सभी समस्याओं को एक के बाद एक करके निपटाती चली गई.

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चाहे पानी की दिक्कत की बात हो, गांव की लड़कियों की सुरक्षा की बात हो, पढ़ाई की बात हो या फिर रास्तों पर लाईट की बात हो. प्रवीण ने जहां सड़कों पर सीसीटीवी कमरे लगवा ड़ाले, वहीं सोलर लाईट्स, वाटर कूलर और लाईब्रेरी तक बनवा ड़ाली. ताकि गांव के लोगों को मुफलिसी के दौर में न जीना पड़े.

यही वजह है कि, आज प्रवीण कौर अपने गांव के हर इंसान के लिए एक रोल मॉडल बन गई हैं. उनके इन्हीं प्रयासों के चलते केंद्र सरकार ने उन्हें युवा सरपंच प्रधानमंत्री अवार्ड से भी सम्मानित किया है. 

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