11 किसानों ने बनाई लॉकडाउन के बीच कंपनी, कमाई 6 करोड़ से ज्यादा

एक साल से अधिक वक्त हो गया. कोरोना वायरस को दुनिया में आए. जिसके आने के बाद से पूरी दुनिया बदल गई है. जहां कोरोना वायरस जैसी वैश्विक बीमारी ने पूरी दुनिया को कैद कर दिया है. वहीं भारत इस समय इस बीमारी का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. हालांकि आज हम आपको बताने जा रहे हैं. उन लोगों के बारे में जिन्होंने कोरोना वायरस जैसी घातक बीमारी और लॉकडाउन को अवसर में बदल दिया है.

पिछले साल जहां मार्च में कोविड-19 के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था. वहीं अनेकों लोगों की नौकरियां, व्यापार सब बर्बाद हो गए थे. जिससे मध्यम वर्ग से लेकर गरीब वर्ग में सबसे अधिक परेशानी पैदा हो गई थी. हालांकि उसके बावजूद भी कुछ लोग ऐसे रहे. जिन्होंने इन हालात का जमकर सामना किया और अपना कारोबार खड़ा कर ड़ाला. कुछ इसी तरह की दास्तां हैं. महाराष्ट्र के अहमदनगर के कुछ किसानों की. जो कोविड-19 के पहले मुंबई, पुणे और अन्य आस पास के शहरों में अपनी सब्जियां और फल बेचते थे. लेकिन कोरोना बीमारी के चलते बाजार बंद हो गए और किसानों की सब्जियां उन्हीं के पास रह गई. जिसके चलते कुछ किसानों ने मिलकर एक कंपनी खड़ी कर ड़ाली. जिसका नाम रखा ‘Farmer Producer Company’.

ऐसे शुरू हुआ ‘KisanKonnect’

KisanKonnect

एक ओर लॉकडाउन लगने के बाद जहां अनेकों लोगों के रोजगार चले गए. वहीं हर तरफ लोग परेशान थे. ऐसे में जुन्नर के रहने वाले 39 साल के एक किसान के दिमाग में एक ख्याल आया. जिन्होंने अपने यहां के किसानों को अपने साथ जोड़कर डिजिटल बाजार बना ड़ाला. इस दौरान उन्होंन करीब एक दर्जन किसानों को व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए जोड़ा. साथ ही उन सभी के साथ प्लानिंग की कैसे अपने तैयार हुई फसलों को किसान बेच सकते हैं.

जहां एक ओर हमेशा से किसान खरीददारों और बिचौलियों से परेशान रहता है. इसका भी समाधान उन्होंने ढूंढ निकाला. आज एक साल बाद किसानों का ये समूह लगभग 480 किसानों का समुदाय बन चुका है. इन किसानों ने मिलकर ‘KisanKonnect’ नाम से एक कंपनी की स्थापना की है. जिसके जरिए किसान अपनी तैयार सब्जियों फलों को सीधा ग्राहकों को बेचते हैं. यही वजह है कि, महज़ एक साल के अंदर इन किसानों ने सीधा ग्राहकों से जुड़कर सब्जियों की एक लाख पेटी बेचने और 6.6 करोड़ रूपये की इकाई स्थापित करने की योजना बनाई है.

इसके बारे में मनीष मोरे बताते हैं कि, “हमारे यहां के किसान पहले से ही सोशल मीडिया पर एक्टिव थे. लॉकडाउन के समय में वो सब्जियों को कैसे बेचा जाए इस पर विचार कर रहे थे. यही से अवसर पाकर हमने 11 किसानों के साथ मिलकर एक डिजिटल बाजार बनाने की कोशिश की.”

इसके आगे मनीष बताते हैं कि, “मैंने पढाई में एग्रीकल्चर एंड बिज़नेस मैनेजमेंट किया है. इसके साथ ही मैं बिग बाज़ार और रिलायंस जैसी रिटेल कंपनियों में भी काम कर चुका हूँ. यही वजह है कि, मुझे मालूम है की कंपनियां असल में किसानों से क्या चाहती हैं. मुझे उनकी नीतियों के बारे में मालूम है. ये सभी नीतियां किसानों के हक में नहीं होती.”

मनीष मोरे ने साल 2008 में नौकरी छोड़ दी थी. जिसके बाद वो खेती करने लगे थे. इस दौरान उनका कहना है कि, उन्होंने कंपनियों के साथ काम करने की तमाम कोशिश की. हालांकि उन्हें कभी सफलता नहीं मिली. जिसकी एक वजह ये भी थी कि, वो बाज़ार को बेहतर समझते थे. यही वजह रही कि, उन्होंन खुदरा विक्रेताओं पर निर्भर रहने के अलावा, अन्य किसानों को सीधे तौर पर उपभोक्ताओं से जोड़ने की योजना तैयार की.

मनीष बताते हैं कि, “जिस समय देश में लॉकडाउन की शुरूवात हुई थी. उसके कुछ ही दिन बाद हमने अपने नेटवर्क के जरिए मुंबई और पुणे की कई सोसाइटी में पहुँचना शुरू कर दिया. यही वजह रही कि, अन्य लोगों को भी हमारे बारे में मालूम चलता गया. इस दौरान हम लगभग 100 आवसीय सोसाइटी के साथ तालमेल बैठा सके. जहां हम बिना बिचौलिए के अपनी सब्जियों और फलों के पेटियां पहुंचाने लगे.”

“ इसके अलावा हमने चार किलो से लेकर 12 किलो तक की सब्जी और फलों की पेटियां भेजनी शुरू कर दी. इतना ही नहीं हमने अलग-अलग तरह की पेटियां में सब्जियां भेजने की शुरूवात की. इसके अलावा ‘वेजिटेबल बास्केट’, ‘फ्रूट बास्केट’ यहां तक की ‘इम्यूनिटी बास्केट’ की भी सप्लाई हमने शुरू की. जिसे लोगों ने पसंद भी किया. इसके अलावा हम अपने ग्राहकों की मांग के अनुसार उन्हें पेटियां भेजते हैं. ताकि वो लोगों को पसंद आ सके.”

KisanKonnect

‘KisanKonnect’ से जुड़े एक अन्य किसान की मानें तो, डायरेक्ट सेलिंग कॉन्सेप्ट किसानों के साथ उपभोक्ताओं के लिए भी फायदे का सौदा है. इससे जहां बिचौलियों की दिक्कत नहीं है. साथ ही ‘KisanKonnect’ के जरिए हमने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है. जिसके अंतर्गत हम अपने फलों सब्जियों की पैकेजिंग कर, उनको आसानी से और 24 घंटे के भीतर अपने ग्राहकों तक पहुंचा देते हैं.

‘KisanKonnect’ की बढ़ने लगी मांग

आज अनेकों घरों तक सीधे तौर पर सब्जियां और फलों की पेटियां पहुंचाने वाला ‘KisanKonnect’, अनेकों सोसाइटी और घरों की पहली पसंद बन गया है. जिसके चलते इनका कारोबार हर दिन बढ़ रहा है.

अपने शुरूवाती समय में 40 लाख का कारोबार करने वाला ‘KisanKonnect’ की सफलता को देखते हुए, आज हर तरफ के किसान इस कारोबार से जुड़ना चाहते हैं.

मनीष मोरे के साथ काम करने वाले श्रीकांत बताते हैं कि, “जिस समय हमने इसे शुरू किया था तो, यह एक व्हाट्सऐप ग्रुप ही था. हालांकि मांग बढ़ने के चलते व्हाट्सऐप पर लोगों की मांग पूरी करना मुश्किल हो गया. यही वजह रही कि, हमने अपने आईटी सेक्टर के लोगों से बात की. जिसके बाद हमने वेबसाइट तैयार करवाई. ताकि हमारे ग्राहक आसानी से हमसे जुड़ सकें. हम उनकी मांगों को पूरा कर सकें.”

इसके आगे श्रीकांत कहते हैं कि, आज यही वजह है की हमने अपने बीच से बिचौलियों को खत्म कर दिया है. हम ‘फार्म-टू-डोरस्टेप्स’ सप्लाई करते हैं. जिससे सभी की आय में वृद्धि हुई है. जिसकी वजह है निर्माता और खरीददार का डायरेक्ट कनेक्शन.

‘KisanKonnect’ मोबाइल ऐप और कस्टमर केयर सेंटर

KisanKonnect

‘KisanKonnect’ की इन्हीं अपार सफलताओं के बाद, कंपनी ने ग्राहकों को और बेहतर सुविधा की खातिर. जहां एक ओर वेबसाइट बनवाई. वहीं दूसरी ओर कंपनी ने मोबाइल ऐप, कस्टमर केयर सेंटर तक लांच कर डाला. ताकि लोगों को कनेक्ट करने में दिक्कत न हो. इसके लिए कंपनी ने स्थानिय विक्रेताओं से लॉजिस्टिक्स भी किराए पर लिए हुए हैं.

श्रीकांत कहते हैं कि, जिस समय देश में किसानों के लिए हालात ठीक नहीं थे. उस समय हमने किसानों के साथ मिलकर एक समुदाय बनाया. जहां किसानों की समस्या का समाधान हमने सबने मिलकर निकाला. ठीक इसी तरह हर तरफ ऐसा किया जा सकता है. हालाकिं सबको एक साथ आना होगा.

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