हिंदुस्तान का सबसे बड़ा देशभक्त…

क्या किसी का भक्त होना, सच्चा हिंदुस्तानी होना परिभाषित करता है. क्या सोशल मीडिया पर जाकर वंदे मातरम लिख देना देशभक्ति कहलाता है या फिर सिर्फ एक बार साल में झंडा फराकर देश को सलाम कर लेना देशभक्ति कहलाता है. वैसे तो हमारे देश में देशभक्ति के नाम पर आए दिन कोई न कोई घटना हो रही है. किसी को भारत माता की जय में देशभक्ति दिखाई दे रही है, किसी को वंदे मातरम में…लेकिन हम आज आपको मिलाने आए हैं भारत के सबसे बड़े देशभक्त से..और वो असली देशभक्त है. क्योंकि उस अकेले शख्स ने देश की खातिर न्यौछावर हजारों शहादतों को आज भी जिंदा रखा है.

शहीद जवानों के घर भेजते हैं, चिट्ठियां

आज हमारे देश में आए दिन जवान शहीद हो जाते हैं, हम अपनी देशभक्ति दिखाने को झंडा लेकर उस समय वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाते निकल जाते हैं, लेकिन अगले ही पल हमको उनकी कभी सुध नहीं आती. लेकिन हमारे ही देश में एक ऐसा भी शख्स है जो पिछले 20 सालों से देश के लिए कुर्बान हुए शहीदों के परिजनों का ख्याल रख रहा है और शहीदों के घरवालों को खत लिखकर वतन की खातिर मरने वाले सपूतों के प्रति आभार व्यक्त कर रहा है. इस सच्चे देशभक्त के पास आज के समय में लगभग 38,000 शहीदों सैनिकों का ब्यौरा है, जिसमें उनके नाम से लेकर, यूनिट नंबर, उनका पता और उनकी पूरी जानकारी डीटेल में मौजूद है. यही नहीं, देश की खातिर मरने वाले सैनिकों के परिवार वालों को अब तक ये शख्स चार हजार से ज्यादा खत लिख चुका है.

आज सोशल मीडिया का जमाना होने के बावजूद जहां हम अपनो को एक मैसेज करते कतराते हैं, वहीं जितेंद्र सिंह ने सैनिकों के घर चिट्ठियों का दौर सजा रखा है. मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले जितेंद्र सिंह को आज लोग पागल समझते हैं, यही नहीं उनके घर वाले भी उन पर पागल होने का आरोप लगाते हैं. लेकिन जितेंद्र कहते हैं कि, ये मेरा दृढ-संकल्प है और जब तक सांस चलेगी, तब तक देश की खातिर शहीदों को मैं यूं ही याद करता रहूंगा, उनके घर वालों में यूं ही खत भेजता रहूंगा.

सिक्योरिटी गार्ड होने के बावजूद, शहीदों के घर भेज रहे खत

सूरत की एक निजी फर्म में सुरक्षा गार्ड के तौर पर नौकरी करने वाले जितेंद्र सिंह, ये काम पिछले 20 सालों से कर रहे हैं. जिसमें वो शहीदों के परिजनों को शुक्रिया अदा करने के लिए पोस्टकार्ड लिखते हैं, ताकि देख की खातिर कुर्बान हुए वीरों को वो श्रद्धांजलि दे सकें. इसके अलावा उनका मकसद उन वीरों के परिवार वालों को ये एहसास दिलाना भी है कि, आज उनका लाडला भले ही देश की खातिर कुर्बान हो गया. लेकिन वो आज अकेले नहीं हैं. बहुत से लोग हैं, जो उनके बारे में सोचते हैं. अपने खतों में वो ये जिक्र भी करते हैं कि, अगर आज हमारा देश अमन चैन से जी रहा है तो उसके पीछे की वजह ये शहीद और सरहद पर खड़े जवान ही हैं.  

मात्र 10,500 रुपये की नौकरी करने वाले जितेंद्र सिंह अपनी जेब से ही शहीद परिवार वालों के लिए खत लिखते हैं. पोस्टकार्ड खरीदते हैं. जहां आज के समय में मंहगाई दिनों दिन आसमान छू रही है. वहीं इतने से पैसे में जितेंद्र अपना परिवार चलाने के साथ-साथ उन शहीदों को अपना श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं…और तो और उनके लिखे खतों का जवाब भी आता है..और ये जवाब किसी पूरी हुई मुराद से कम नहीं होता है.

सेना में शामिल होने का था सपना-जितेंद्र सिंह

आज जितेंद्र खुद कहते हैं कि, मेरा मकसद महज उन लोगों तक अपना आभार पहुंचाना है, जिन्होंने हमारे देश की रक्षा के लिए अपना लाडला खो दिया, किसी ने अपना पति खो दिया तो किसी ने अपना पिता खो दिया. राजस्थान के भरतपुर जिले के कुटखेड़ा गांव के रहने वाले, जितेंद्र सिंह कहते हैं कि, उनकी कई पीढ़ियों ने भारतीय सेना में शामिल होकर देश की रक्षा की है. यही वजह थी की वो भी भारतीय आर्मी में जाना चाहते थे. लेकिन उनका सलेक्शन नहीं हुआ. इसलिए उन्होंने दूसरा रास्ता चुन लिया. कारगिल वॉर के दौरान अपने पिता को खोने वाले जितेंद्र बताते हैं कि, पिता जी मुझे सरहद की कहानियां सुनाया करते थे. यहीं से मेरे अंदर भी राष्ट्रप्रेम की शुरूवात हुई और ये सिलसिला आज खत लिखने का सफर बन गया है.

यहीं नहीं राष्ट्रभक्ति का मोह ही है कि, जब साल 2003 में जितेंद्र के यहां छोटे से बच्चे ने जन्म लिया तो उन्होंने उसका नाम सैनिक हरदीप सिंह रख दिया. क्योंकि उसी दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते-लड़ते हरदीप सिंह शहीद हो गए थे. इसके अलावा जितेंद्र सैनिकों के यहां फोन भी करते हैं और उनको याद दिलाते रहते हैं कि, भले ही देश और सरकार उनके बेटे को भूल जाए. लेकिन सूरत में रह रहा एक शख्स है जो उन सबके बारे में हमेशा सोचता है.

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