समाज में पेश की दहेज प्रथा की अनोखी मिसाल

हमारे समाज में जहां एक ओर दहेज प्रथा को रोकने के लिए कानून तो बना दिए जाते है। लेकिन वहीं दूसरी ओर उन कानूनों को तोड़ने वालों की भी कमी नहीं है। दहेज प्रथा की आड़ में लोग अपने ही बेटों की निलामी बड़ी शान से कर जाते है। और शादी में दहेज मिलना तो बड़े गर्व की बात मानते है।

उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में तो लड़को को पढ़ाने का मकसद ही दहेज होता है। जितना वो पढ़ेंगे और अच्छी नौकरी हासिल करेंगे। उतनी ही ज्यादा उनको शादी में मिलने वाले दहेज की कीमत बढ़ती चली जायेगी।

लेकिन दहेज लेने वालो से ज्यादा गुनहगार होते है। दहेज देने वाले। जी हां, लोग दहेज देते है। इसीलिए मांगने वालों के मुंह भी और ज्यादा खुल जाते है। लड़की की शादी कराने के चक्कर में कई बार माता-पिता भूल जाते है। कि लालची लोगों का पेट तो भर जाता है। लेकिन उनकी नियत कभी नहीं भरती। और ऐसे में दहेज प्रथा का नाम देकर लोग शादी के बाद भी दहेज मांगने से पीछे नहीं हटते हैं। और जब शादी के बाद उनकी मांगो को पूरा नहीं किया जाता। तो सामने आती है, दहेज प्रथा की असलीयत।

Dowry- सरोज कांत बिस्वाल ने दहेज में की 1000 पौधों की मांग

दहेज प्रथा, इसकी शुरूआत आज से सदियों पहले तब हुई, जब दहेज प्रथा की आड़ में औरतों को मौत के घाट नहीं पहुंचाया जाता था। दरअसल, बेटी की शादी पर उसका पिता अपने मन से उसे तोहफे दिया करता था। जिनका लड़की के पति और ससुराल वालों से कोई लेना-देना नहीं होता था।

धीरे-धीरे ये तोहफे पैसों में बदलते चले गए, पैसों से मांगों में और फिर इसकी आड़ में लड़कियों को मारा-पिटा भी जाने लगा। और फिर क्या था, दहेज एक प्रथा से बन गई कूप्रथा।

आज हमारे देश में इस प्रथा के चलते कई औरतों पर अत्याचार किया जाता है। तरह-तरह से उन्हें परेशान कर शादी के बाद भी दहेज की मांग की जाती है। लेकिन इन सब बातों के परे हम आपको दहेज से ही जुड़े एक बेहद अनोखे मामले के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां पर दूल्हे ने दहेज में ऐसी चीज मांग ली, जिसने बारात में मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया, दरअसल इस दूल्हे को रुपए और पैसे से कोई लगाव नहीं है, इस दुल्हे को तो अपनी प्रकृति की चिंता है और बस इसी से लगाव है।

दरअसल, ओडिशा के केंद्रापाड़ा में 22 साल की सरोज कांत बिस्वाल ने अपने ससुराल वालों से दहेज में 1000 पौधों की मांग की। जिसके बाद लड़की वालों ने भी उनकी मांग को तुरंत मानते हुए उन्हें उपहार में पौधे लाकर दे दिए।  सरोज पेशे से एक शिक्षक हैं और वो हमेशा से ही शादी में होने वाली फिजूल खर्ची का विरोध करते रहे हैं।

Dowry- समाज को पेड़ लगाने का संदेश देना चाहते हैं सरोज

वे बेहद आसान तरीके से शादी करना चाहते थे। और  यही कारण था कि जब उनकी शादी की बात चली तो उन्होंने बिना किसी खास मांग के अपनी एक अनोखी शर्त रख दी। उन्होंने लड़की के घरवालों से दहेज में 1000 पौधों की मांग कर दी। यही नहीं जब सरोज और रश्मिरेखा की शादी हुई तो उनके ससुराल वाले समारोह स्थल पर एक ट्रक पौधे लेकर पहुंचे थे।

आपको बता दें कि, सरोज ‘गाछा टाई साथी टाई यानी पेड़ एक साथी है’ संस्था के सदस्य भी हैं। यह संस्था लोगों को पौधे लगाने के लिए जागरूक भी करती है।  वहीं जब सरोज की शादी की सभी रश्में पूरी हो गई, तो वे समय निकालकर अपने गांव पहुंचे और सभी रिश्तेदारों को रिटर्नगिफ्ट के रूप में पौधे दिए।

वे इस कदम के जरिए समाज को पेड़ लगाने का संदेश देना चाहते हैं। वाकई अगर हर दूल्हे या फिर शादी के वक्त लड़के वालों की सोच सरोज के परिवार और उनकी तरह हो जाए तो दुनिया में प्रदूषण की समस्य के साथ ही दहेज की समस्या से भी शांति मिल जाएगी।

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